सिमुलेशन से आत्महत्या रोकथाम का संदेश
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर फॉरेंसिक साइंस विभाग ने किया जागरूकता कार्यक्रम
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग की ओर से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें एमएससी फॉरेंसिक साइंस के विद्यार्थियों और पीएचडी शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य और कठिन परिस्थितियों में समय पर सहायता लेने के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आउटडोर अपराध स्थल सिमुलेशन प्रस्तुत किया। इसमें एक संदिग्ध मौत को शुरुआती तौर पर आत्महत्या के रूप में दर्शाया गया। सिमुलेशन के माध्यम से बताया गया कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों का बारीकी से मूल्यांकन करना और प्रत्येक पहलू की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जांच करना कितना जरूरी है। कार्यक्रम का शुभारंभ फॉरेंसिक साइंस विभाग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार शर्मा ने किया।
उन्होंने आत्महत्या रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, खुले संवाद और समय पर सहायता प्राप्त करने के महत्व पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भावनात्मक या व्यक्तिगत कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों के लिए सहयोगात्मक माहौल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने आत्महत्या की वैश्विक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनियाभर में हर वर्ष 7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या के कारण जान गंवाते हैं, ऐसे में जागरूकता और प्रभावी रोकथाम के प्रयास लगातार जारी रखना जरूरी है। जागरूकता सत्र की शुरुआत एमएससी फॉरेंसिक साइंस के विद्यार्थियों प्रतिभा नेगी और अभिनव कुमार ने की। इस अवसर पर डॉ. मनीषा कुमारी, डॉ. दीपिका भंडारी और डॉ. प्रदीप कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए फॉरेंसिक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल को सामाजिक रूप से उपयोगी गतिविधियों से जोडऩे के लिए प्रोत्साहित किया।
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