इलेक्ट्रिक बसों की कमाई में ढली आगे, शोघी में फुटफाल ज्यादा

By: Sep 18th, 2026 12:52 am

एक माह के संचालन के बाद एचआरटीसी कर रहा आय-व्यय और रूट प्रदर्शन का आकलन
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 17 अगस्त से शुरू हुआ था। एक महीने के संचालन के बाद अब इन बसों से होने वाली कमाई, यात्रियों की संख्या और विभिन्न रूटों पर इनके प्रदर्शन की स्थिति सामने आ रही है। शिमला शहर में इन बसों को अलग-अलग रूटों पर चलाया जा रहा है। राजधानी शिमला में चल रही 15 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और आय-व्यय का आकलन किया जा रहा है। एचआरटीसी के मंडलीय प्रबंधक देवा सेन नेगी ने बताया कि यात्रियों की संख्या के मामले में ढली रूट कमाई के लिहाज से सबसे आगे चल रहा है जबकि शोघी रूट में सबसे ज़्यादा फूटफाल देखा जा रहा है। एचआरटीसी ने नई इलेक्ट्रिक बसों के लिए प्रतिदिन औसतन 120 किलोमीटर संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके आधार पर बसों की रोजाना तय दूरी, यात्रियों से होने वाली आय और संचालन लागत के आधार पर इनके प्रदर्शन का आकलन किया जा रहा है। शहर में संचालित नई इलेक्ट्रिक बसों की लागत करीब दो करोड़ रुपये प्रति बस है। वहीं, एक अच्छी डीजल बस करीब 30 लाख रुपये एप में उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआती खरीद लागत डीजल बसों की तुलना में काफी अधिक है।

हालांकि, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ईंधन और रखरखाव से जुड़ी लागत अलग होती है, इसलिए दोनों की वास्तविक लागत की तुलना में संचालन खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी है। बता दें कि नई इलेक्ट्रिक बसों में डीजल बसों की तुलना में पर्याप्त लचीलापन नहीं है। इन बसों को संकरे और तीखे मोड़ों पर मोडऩा अपेक्षाकृत मुश्किल होता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की संकरी और घुमावदार सडक़ों पर इनका संचालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विभाग के मुताबिक, जिन ग्रामीण मार्गों पर सडक़ें अधिक संकरी और घुमावदार हैं, वहां फिलहाल डीजल बसें अधिक उपयुक्त हैं और ऐसे मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सीमित रहेगा। बसों के संचालन में बिजली और चार्जिंग पर होने वाले खर्च के साथ-साथ चालक-कंडक्टर, रखरखाव और अन्य परिचालन खर्च को भी शामिल किया जाएगा। इन सभी खर्चों और बसों से होने वाली आय की तुलना के आधार पर यह देखा जाएगा कि इलेक्ट्रिक बसें एचआरटीसी के लिए आर्थिक रूप से कितनी लाभकारी साबित हो रही हैं।

12 साल तक कंपनी करेगी बसों का रखरखाव
नई इलेक्ट्रिक बसों के लिए संबंधित कंपनी के साथ 12 साल का व्यापक रखरखाव अनुबंध किया गया है। इसके तहत 12 साल तक बसों की मरम्मत, तकनीकी खराबी दूर करने और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। इससे इन कार्यों के लिए एचआरटीसी को अलग से खर्च नहीं करना पड़ेगा।

बैटरी खराब होने पर लाखों में आएगा खर्च
बैटरी बदलने की न्यूनतम लागत करीब 25 लाख रुपए तक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च बैटरी की क्षमता, खराबी और संबंधित कंपनी की शर्तों पर निर्भर करेगा। नई इलेक्ट्रिक बसों को नियमित रखरखाव और तकनीकी जांच के लिए प्रत्येक रविवार को कार्यशाला भेजा जाता है। इस दौरान बसों की आवश्यक जांच और मेंटेनेंस का काम किया जाता है।

इलेक्ट्रिक बसों के लिए तीन चार्जिंग स्टेशन
शिमला में चल रही नई इलेक्ट्रिक बसों के लिए तीन चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। इनमें ढली, नगर निगम पार्किंग टूटीकंडी और डिविजनल वर्कशॉप तारादेवी शामिल हैं। तारादेवी स्थित चार्जिंग स्टेशन स्वतंत्र चार्जिंग केंद्र के रूप में संचालित हो रहा है। इन तीनों केंद्रों पर बसों को चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।


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