बड़े होटलों का कचरा नहीं उठाएगा निगम
100 किलो से ज्यादा कचरा निकालने वालों को खुद करना होगा निपटान
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
राजधानी शिमला में बड़े होटल, अस्पताल, सरकारी और निजी संस्थानों को अब अपना कचरा खुद ठिकाने लगाना होगा। नगर निगम ने ठोस कचरा प्रबंधन 2026 के नए नियम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों की पहचान कर उनका पंजीकरण करवाया जा रहा है। नए नियमों के अनुसार रोजाना ‘100 किलो से अधिक कचरा’ पैदा करने वाले सरकारी और निजी संस्थानों को अपने स्तर पर कचरा निपटान की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा ‘20 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल’ वाले संस्थान और रोजाना ‘40 हजार लीटर से ज्यादा पानी की खपत’ करने वाले परिसर भी इसके दायरे में आएंगे। इनमें बड़े होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, बाजार और अन्य बड़े परिसर शामिल हैं। अभी तक नगर निगम कई बड़े संस्थानों से रोजाना कई क्विंटल कचरा उठाकर उसका निपटान करता है।
नए नियम लागू होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव होगा। निगम सर्वे के जरिए ऐसे संस्थानों को चिह्नित कर रहा है और उनका पंजीकरण करवाया जा रहा है। बड़े संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गीले कचरे के निपटान की होगी। इसके लिए संस्थानों को अपने स्तर पर प्लांट लगाने होंगे, जहां गीले कचरे से खाद या बायोगैस तैयार की जा सकेगी। इससे कचरे का निपटान करने के साथ आय का साधन भी तैयार हो सकता है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में इस तरह का प्लांट पहले से स्थापित है। नगर निगम इससे पहले भी बड़े संस्थानों को गीले कचरे का निपटान खुद करने के निर्देश दे चुका है, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी। अब नए नियमों के तहत सर्वे, पंजीकरण के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी है।
एचपीयू से लेकर आईजीएमसी और बड़े होटल राडार पर
नगर निगम के सर्वे में प्रदेश विश्वविद्यालय, सब्जी मंडी, बस अड्डा, आईजीएमसी सहित कई बड़े अस्पताल और शहर के कई बड़े होटल शामिल किए गए हैं। इन संस्थानों का पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया चल रही है। निगम का कहना है कि नए नियमों के तहत बड़े कचरा उत्पादकों को अपनी जिम्मेदारी खुद निभानी होगी। गौरतलब है कि शिमला शहर में घरों से रोजाना करीब 80 से 100 टन कचरा निकलता है। इसके अलावा बड़े संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है। नए नियमों के लागू होने के बाद बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारी तय होने से निगम पर कचरा उठाने और निपटाने का बोझ कम करने की दिशा में भी काम होगा।
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