बारिश ने फेरा किसानों की मेहनत पर पानी, आलू की फसल को करोड़ों का नुकसान

By: Sep 18th, 2026 12:50 am

खेतों में पानी जमा होने से मिट्टी में ही सड़ रहा आलू का बीज, फसल बचाने के लिए किसान दिन-रात जुटे, सारी मेहनत गई बेकार
स्टाफ रिपोर्टर-ऊना
लगातार हो रही बारिश ने जिला ऊना के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने से आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आलू का बीज मिट्टी में ही खराब होने लगा है। फसल को बचाने के लिए किसान खेतों से पानी निकालने और आलू को सडऩे से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि मौसम की मार ने उनकी महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया है। जिला ऊना में हर वर्ष करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जाती है। आलू यहां की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और इससे बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका जुड़ी है। फसल तैयार होने के समय किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन मौसम खराब होने से उत्पादन प्रभावित होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इस बार भी लगातार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा हो गया है।  पानी लंबे समय तक खेत में रहने से मिट्टी में नमी बढ़ गई है, जिससे आलू के बीज के सडऩे और फसल में विभिन्न रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। किसान अपने स्तर पर खेतों से पानी निकालने के लिए नालियां बनाने और जल निकासी की व्यवस्था करने में जुटे हैं। जिन खेतों में पानी अधिक समय तक जमा रहा, वहां फसल को ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। किसानों के अनुसार आलू की खेती में बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च आता है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें उत्पादन के नुकसान के साथ लागत की भरपाई की चिंता भी सताने लगी है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष कभी अत्यधिक बारिश, कभी तापमान में उतार-चढ़ाव और कभी फसल में बीमारी लग रही है।

देश के कई राज्यों से पहुंचते हैं व्यापारी
ऊना में आलू की फसल तैयार होने पर इसे खरीदने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी और ट्रेड कंपनियां पहुंचती हैं। हर वर्ष करीब 8 से 10 राज्यों के व्यापारी जिला में आलू की खरीद के लिए आते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आलू का बड़ा कारोबार होता है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाहरी बाजार मिलता है। उत्पादन प्रभावित होने पर इसका असर किसानों के साथ-साथ आलू के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और अन्य लोगों पर भी पड़ता है। किसानों का कहना है कि बारिश से खराब हुई फसल का वास्तविक नुकसान मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने के बाद ही सामने आएगा। कई खेतों में फसल को बचाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।

हर साल मौसम की मार से जूझ रहे किसान
किसानों का कहना है कि आलू की खेती में जोखिम लगातार बढ़ रहा है। कभी बेमौसम बारिश फसल को नुकसान पहुंचाती है तो कभी अधिक तापमान और बीमारियों के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। इसके बावजूद किसान आलू की खेती कर रहे हैं, क्योंकि यह नकदी फसल होने के कारण कम समय में आय का महत्वपूर्ण साधन बनती है। किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से बारिश से प्रभावित खेतों का जायजा लेने और नुकसान का आकलन करवाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने फसल को बीमारी से बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों से आवश्यक तकनीकी सलाह और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने की मांग की है।


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