डा. जयंतीलाल भंडारी

उम्मीद करें कि 5 जनवरी को ट्रंप के द्वारा दी गई टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बीच भारत के द्वारा नए निर्यात बाजारों की तलाश और एफटीए के साथ निर्यात की नई रणनीति भारत की निर्यात चुनौतियों को कम करने में कारगर भूमिका निभाएगी...

एक अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून लागू होने से उद्योग-कारोबार व निर्यात बढऩे का परिदृश्य उभरकर दिखाई देगा। निश्चित रूप से वर्ष 2026 में भारत के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं हैं, हालांकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना होगा...

उम्मीद करें कि भारत में वर्ष 2026 में महंगाई में कमी और ब्याज दरों में कटौती भारतीय उपभोक्ताओं को नई आशावादी शक्ति देगी और भारत में उपभोक्ताओं की बढ़ी हुई क्रय शक्ति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए घरेलू खपत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देगी। नया साल नई उम्मीदें लेकर आ रहा है। भारतीय आर्थिकी के लिए शुभ समय है...

औपचारिक ऋणों के लिए बेहतर प्रोत्साहन और डिजिटल उपकरणों से लैस बैंक प्रतिनिधियों को ग्रामीण परिवारों और संस्थानों के बीच समन्वय का माध्यम बनाया जाना होगा। नए कानून से ग्रामीण आर्थिकी मजबूत होने की उम्मीद है...

ऐसे में अब भारत व रूस के बीच वार्ता के दौरान व्यापार असंतुलन कम करने के लिए जो प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है, उसके मद्देनजर अब रूस को ध्यान देना होगा कि भारत के कृषि निर्यातकों को लंबी रूसी प्रमाणन और लिस्टिंग प्रक्रियाओं से संबंधित गैर-शुल्क बाधाएं कम की जाए...

इससे जहां ब्रांड इंडिया और मेड इन इंडिया की वैश्विक स्वीकार्यता सुनिश्चित की जा सकेगी, वहीं स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, कारोबार, ऊर्जा, शिक्षा, रक्षा, संचार, अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश तेजी से आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकेगा। उम्मीद करें कि आरडीआई फंड के माध्यम से बीच मुश्किलों का सामना रही भारतीय प्रतिभाओं को भारत लाया जाएगा...

हमें देश के कोने-कोने में विशेषतया ग्रामीण और पिछड़े हुए क्षेत्रों में सेवा निर्यात बढ़ाने के मद्देनजर एआई स्किल्स से जुड़ी प्रोग्रामिक भाषाएं प्रमुख रूप से पायथन, जावा, सी प्लस प्लस, आर और जूलिया में बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाने के कई गुना प्रयास करने होंगे...

इस बात पर भी ध्यान दिया जाना होगा कि विनिवेश से प्राप्त राशि का एक हिस्सा सार्वजनिक ऋण की अदायगी में भी उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में सरकार पर ब्याज भुगतान का बोझ कम होगा और राजकोषीय गुंजाइश बढ़ेगी। ऐसी स्थिति सरकार और अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगी। उम्मीद करें कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के साथ नए सुधारों की डगर पर बढ़ेगी...

निश्चित रूप से इस समय भारत मजबूत घरेलू खपत और नई वैश्विक आर्थिक अनुकूलताओं की उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन देश को वर्ष 2047 तक दुनिया का विकसित देश बनाने के मद्देनजर कई अहम बातों पर ध्यान देना होगा।

इन सुधारों के साथ-साथ वित्तीय जागरूकता में सुधार करने और ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों से जुड़ी बुनियादी वित्तीय शिक्षा से साहूकारों पर निर्भरता कम की जानी होगी। सरकार ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए जो कानून बनाए हैं, उन कानूनों के पर्याप्त परिपालन पर ध्यान देना होगा...