
https://www.artofliving.org/in-hi शांति केवल संघर्ष की अनुपस्थिति नहीं है और न ही कोई ऐसी चीज है जिसे आप बाजार से खरीद लें या कोई उच्च नीति बनाकर प्राप्त लें। इसे अपने भीतर ही पोषित करना होता है। शांति आपका स्वभाव है। शांति की आवश्यकता तीन स्तरों पर होती है। पहला स्तर है- अपने भीतर की शांति;
https://www.artofliving.org/in-hi बच्चों की शिक्षा समग्र होनी चाहिए और केवल उनके मन को जानकारी से भरने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। सिर्फ कक्षा में आना और कुछ पाठ सीख लेना वास्तव में वह शिक्षा नहीं है जिसकी एक बच्चे को आवश्यकता होती है। हमें शरीर और मन के सम्पूर्ण विकास पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे
https://www.artofliving.org/in-hi श्रीकृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव से हुआ था। वासु का अर्थ है, ‘प्राण’ और देवकी का अर्थ है, शरीर। कंस का अर्थ है ‘अहंकार’। ‘अहंकार’ रुपी कंस, ‘शरीर’ रुपी देवकी का भाई है। तो कंस से वासुदेव और देवकी को बंदी बनाने का अर्थ यही है कि अहंकार, शरीर और श्वास को बंदी
https://www.artofliving.org/in-hi रक्षाबंधन की पूर्णमासी सिद्ध-महापुरुषों और ऋषियों को समर्पित है। बंधन का अर्थ है- अधीनता और रक्षा का अर्थ है सुरक्षा। जो बंधन आपकी रक्षा करता है, वही रक्षाबंधन है। एक रस्सी को आपको बचाने के लिए या फिर आपका गला घोंटने के लिए भी बांधा जा सकता है। छोटा मन और सांसारिक विषय-वस्तु आपमें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने के लिए बहुत जोर लगा रहे हैं। सरकारी एजेंसियां एक मजबूत प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से व्यक्त की गई इच्छा पूरी करने के लिए एक-दूसरे से होड़ में हैं। परंतु लोग इस विचार के दीर्घकालिक लाभों और हानियों को न तो
विविध राज्यों के एक अविभाज्य संघ की उपाध्याय जी की धारणा भी राष्ट्रपति शासन प्रणाली से अधिक मेल खाती है। शासन का अमरीकी मॉडल संघीय कहलाता है, परंतु यह संसदीय प्रणाली के मुकाबले अधिक अविभाज्य संघ का गठन करता है। क्योंकि इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो राज्यों को राष्ट्रीय संविधान का उल्लंघन करने
संसद द्वारा दैनिक मूल्यांकन के लिए अंबेडकर की पैरवी में जो भी थोड़ा-बहुत व्यावहारिक या मूल्यवान था, वह भी तब समाप्त हो गया जब भारत ने दलबदल विरोधी कानून अंगीकार कर लिए। वर्ष 1985 के संविधान संशोधन ने सांसद के लिए पार्टी के फरमान के खिलाफ वोट देना अवैध बना दिया। अब अगर बहुमत पार्टी
भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ जहां तक विविधता की बात है, एक विविध समाज के लिए बहुमत शासन की प्रणाली तो बिलकुल उपयुक्त नहीं है। अमरीका हमसे भी अधिक विविध देश है। वहां दुनिया के हर धर्म को मानने वाले, 15 विभिन्न नस्लों के लोग रहते हैं, जो 350 भाषाएं बोलते हैं। उनकी प्रणाली स्थानीय
भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ संसदीय प्रणाली की पसंद दरअसल एक राजनीतिक पार्टी का निर्णय था। यह 1946 की गर्मियों में कांगे्रस पार्टी की एक मीटिंग के दौरान लिया गया था। उसके बाद एक पार्टी के निर्देश के रूप में इसे संविधान निर्माण प्रक्रिया से लागू किया गया। संविधान सभा के लिए कांगे्रस ने नेहरू