पाठकों के पत्र

( देव गुलेरिया, योल कैंप, धर्मशाला ) कई राज्यों में नक्सलवाद भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के लिए कई वर्षों से एक चुनौती बना हुआ है। न जाने कितने ही सैनिक और सामान्य नागरिक इस समस्या से अपनी जान गंवा चुके हैं। शायद पूर्व सरकारों के ढुलमुल कदमों की वजह से हालात इतने बदतर हुए हैं। झारखंड

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) पिछले एक ही महीने के भीतर दो रेल हादसे दुर्भाग्यपूर्ण ही माने जाएंगे? बेशक पिछले कुछ समय में भारतीय रेलवे में कई उल्लेखनीय सुधार हुए हैं, फिर भी ऐसे हादसे चिंता को बढ़ाते हैं। आज जब देश भर में कई पटरियों पर दरारें हैं या कई डिब्बे पुराने हो

( डा. राजीव बिंदल, विधायक, नाहन ) हिमाचल पत्रकारिता शब्द का उदय अपने आप में महत्त्वपूर्ण है। प्रदेश में इस शब्द के जनक के रूप में अगर किसी ने अपना नाम दर्ज करवाया है, तो वह ‘दिव्य हिमाचल’ ने। हिमाचल जैसे छोटे प्रांत में दैनिक समाचार-पत्र निकालना और उसे 20 वर्षों तक चलाना, न केवल

( डा. राजेंद्र प्रसाद शर्मा (ई-मेल के मार्फत) ) आज जब हम 2017 में प्रवेश कर चुके हैं, यह उपलब्धियों में बेहद उथल-पुथल भरे 2016 की कड़वी-मीठी यादों को भुलाकर नए साल में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। हमें परिवार, समाज, प्रदेश, देश और विश्व में सुख और शांति की कामना

( सी. कुणाल  (ई-मेल के मार्फत) ) भारतीय संस्कृति पर पहले से ही आक्रमण होते आए हैं, फिर भी उस चीज का कायम रहना अध्यात्म शास्त्र की तरफ ध्यान आकर्षित करता है। भारत आध्यात्मिक भूमि होने के कारण यहां की संस्कृति को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ी ताकतें खुद ही नष्ट हो गईं। पूरी