भ्रष्टाचार का अड्डा बने बैंक

-राजेश कुमार चौहान, जालंधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में से आर्थिक भ्रष्टाचार की जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए नोटबंदी के टॉनिक का इंतजाम किया था और देश को बैंकों से जोड़ने का प्रयास किया था, ताकि कोई भी कालेधन को अपनी…

ज्ञान की शाखा में पर्यटन

हिमाचल के हर विभाग में पर्यटन विस्तार की तस्वीर देखी जाए, तो प्रादेशिक तासीर में बदलाव आएगा। हम सर्वेक्षण या समीक्षा के जरिए यह पता लगाएं कि हर विभाग की कसौटी में कितना पर्यटन भरा है। उदाहरण के लिए शिक्षा और चिकित्सा विभागों के लक्ष्यों के…

जीएसटी बना जी का जंजाल

-कांतिलाल मांडोत, सूरत (ई-पेपर के मार्फत) भारत और भारतीय की दुहाई देने वाली सत्तारूढ़ सरकार ने जनता की कमर तोड़ दी है। विकास के नाम पर देश की बढ़ती लोकप्रियता को भुनाकर गरीब लोगों को जीएसटी की मार से चिंताग्रस्त कर दिया है। देश के कपड़ा…

राज्यसभा चुनाव के बाद गठबंधन

राज्यसभा चुनाव इतने महत्त्वपूर्ण कभी साबित नहीं हुए, जितने इस बार होंगे और 2019 की राजनीति को तय कर सकेंगे। अकसर सत्तारूढ़ पक्ष के ही सांसद चुनकर राज्यसभा में जाते रहे हैं। एकाध सांसद विपक्ष का भी जीत जाता है, क्योंकि विधायकों की संख्या…

उफ़ ! यह मौसम

हिमाचल में बारिश होते ही अचानक ठंड बढ़ जाती है और धूप चमकते ही गर्मी पसीने छुड़ाने लगती है। मौसम के इस बदलते मिजाज को देखकर हर कोई अचरज में है। सभी यह सोचने को मजबूर हैं कि आखिर यह क्या हो रहा है... इस बार के दखल में मौसम के तेवरों की…

महादेवी वर्मा : रच डाला अनुभूतियों का छायावादी काव्य

महादेवी वर्मा (जन्म : 26 मार्च, 1907, फर्रूखाबाद - मृत्यु : 11  सितंबर, 1987, प्रयाग) हिंदी भाषा की प्रख्यात कवयित्री हैं। महादेवी वर्मा की गिनती हिंदी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत…

कविता

...अकड़न... अब भगवान नहीं लोग विज्ञान की बातें करते रातों को नींद नहीं दिन को आहें भरते बैठे बिठाए मशीनी काम करते कभी कमर कभी घुटने कभी गर्दन अकड़ते घर अपना देकर किराए पर खुद किराए के घर में रहते -कश्मीर सिंह गांव व डाकघर रजेरा …

कांगड़ा-चंबा के ढोलरुओं को सहेजती कृति

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक का नाम : ढोलरू संस्करण-2017 * लेखक का नाम : डा. गौतम शर्मा व्यथित * पृष्ठ 174 * मूल्य : 250 रुपए * प्रकाशक : शीला प्रकाशन, राज मंदिर नेरटी, कांगड़ा (हिप्र) 176208 लोक साहित्य की परंपरा सार्वभौमिक है और लोक मानस…

स्मृति के आईने में सुनील

स्मृति विशेष इनसान की फितरत हमेशा पाने और आजमाने की रही है और इसी हिसाब से हम अपने इर्द-गिर्द अच्छे-बुरे का चयन कर लेते हैं या कोई दूसरा आपको चुन लेता है। हिमाचली पत्रकारों की धूप-छांव के बीच अचानक एक चेहरा सामने आता है, जो शिमला की तहों…

केदारनाथ सिंह : हिंदी कविता को दी नई पहचान

स्मृति विशेष केदारनाथ सिंह (जन्म : 7 जुलाई 1934 - मृत्यु 19 मार्च 2018) हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि व साहित्यकार थे। वे अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के कवि रहे। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का 49वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने…

माखन लाल चतुर्वेदी

माखन लाल चतुर्वेदी (जन्म- 4 अप्रैल, 1889 बावई, मध्य प्रदेश; मृत्यु- 30 जनवरी, 1968) सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के अनूठे हिंदी रचनाकार थे। इन्होंने हिंदी एवं संस्कृत का अध्ययन किया। ये कर्मवीर राष्ट्रीय दैनिक के संपादक थे। इन्होंने…

कश्मीरी हिंदुओं को दो सियासी हक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राज्य सरकार और भारत सरकार दोनों ही उनकी इस मांग की अवहेलना करती रही हैं, लेकिन जब आतंकवाद के कारण कश्मीर से विस्थापित हिंदुओं को देश के किसी भी हिस्से में रहते हुए भी, जम्मू-कश्मीर की…

समाज में फैलता नशे का मकड़जाल

गुरुदत्त शर्मा लेखक, शिमला से हैं सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि मादक वस्तुओं का सेवन अब स्कूलों के विद्यार्थियों को अपनी चपेट में ले रहा है। आज बहुत से नशीले पदार्थ बाजार में आसानी से कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। नतीजतन नशा करने…

पुलिस भर्ती हुई लापता

अजय भंडारी, चंबीधार, राजगढ़ बीते वर्ष से शुरू हुई पुलिस कांस्टेबल भर्ती नया वर्ष और नई सरकार आने के बावजूद सिरे नहीं चढ़ सकी है। लिखित परीक्षा का परिणाम लगभग छः महीने पूर्व घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद पुलिस विभाग तथा प्रदेश सरकार…

अपराध के छत्ते और पुलिस

अपराध के जिस तंत्र का नाम माफिया है, उसकी शाखाओं में हिमाचल की चुनौती बढ़ रही है। शिमला में पुलिस साइंस कांग्रेस के मंथन में कानून व्यवस्था के अपरिहार्य बंदोबस्त तथा तकनीकी व वैज्ञानिक पक्ष को लेकर, भविष्य की सूरत में विभागीय समीक्षा हो रही…