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वैचारिक लेख


धर्म के ठेकेदारों का खूनी खेल

संसार के सभी मुस्लिम समाजों में ओसामा बिन लादेन के अनुयायी हैं, जिन्हें अलकायदा, तालिबान और दर्जनों दूसरे नामों से जाना जाता है। यह सब काफिरों और बिन लादेन का विरोध करने वाले मुसलमानों के खिलाफ जिहाद के प्रति समर्पित हैं…

शेख अब्दुल अज्जान, एक इस्लामी विद्वान ने लिखा है ‘मुसलमान उम्माह का जीवन एकमात्र रूप से विद्वानों की सियाही और शहीदों के खून पर निर्भर है।’ यह सटीक लगता है, लेकिन धर्मों के विद्वानों द्वारा कही गई बातों और उनके अनुयायियों ने उनका संदेश फैलाने के मकसद से जो लिखा, उस पर गंभीरता से गौर करना चाहिए। सबसे पहले इस्लाम की भूमिका को देखें। एक आम सहमति के अनुसार उम्माह (मुस्लिम समाज) में सबसे ज्यादा आदरणीय सउदी अरब का ओसामा बिन लादेन है। उसके संसार के सभी मुस्लिम समाजों में अनुयायी हैं, जिन्हें अलकायदा, तालिबान और दर्जनों दूसरे नामों से जाना जाता है। यह सब काफिरों और बिन लादेन का विरोध करने वाले मुसलमानों के खिलाफ जिहाद के प्रति समर्पित हैं। उसका प्रमुख निशाना सउदी अरब का शाही घराना है। इसलिए कभी भी अपनी मातृभूमि में घुसने की हिम्मत नहीं करता। अब तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहाडि़यों में छिपकर रहता है। अमरीकनों ने उसे मारने के कई प्रयत्न किए। हम भी यही करते अगर वह हमारे हाथ लग जाए, क्योंकि उसके अनुयायी कश्मीर में जिहाद के नाम पर निर्दोष भारतीयों को मारने और शहादत हासिल करने के लिए अपना खून बहाने के लिए घुसपैठ करते रहते हैं। अब हम हिंदुओं को दखें। उनके उद्धारक वीर सावरकर थे, जिनकी आदमकद तस्वीर संसद में लगी है। वह अनोखे ही विद्वान थे। वह राजशाही चाहते थे। एक हिंदू राष्ट्र, जिसमें भारत का सम्राट नेपाल के राजा की तरह हो जो धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी सही जगह दिखा दे। उन्होंने गांधी जैसे लोगों का कड़ा विरोध किया और जिनकी हत्या में उनका भी नाम लिया गया और नेहरू का भी विरोध किया, जो सभी धर्मों के प्रति समान आदर की बात करते थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे हिंदू मिलीटेंट संगठनों के प्रेरणास्रोत थे। भारतीय जनता पार्टी के ज्यादातर नेता यहीं से निकले हैं। वह सफेद कमीज, खाकी निक्कर पहनते थे, हाथ में डंडा रखते थे और स्काउटों की तरह परेड करते थे। उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया और गुजरात में मुसलमानों की हत्या में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने खून बहाया, लेकिन अपना नहीं। और अब अंत में सिखों की बात करें। जरनैल सिंह भिंडरवाले विद्वान कहलाने के लायक बिल्कुल नहीं था, लेकिन उसका संदेश देहाती मुस्टंडों तक पहुंच गया। उसने कहा कि किरपाण के अतिरिक्त सिखों को पिस्तौल और मोटरसाइकिल रखनी चाहिए, ताकि अपना लक्ष्य पा सकें और यही उन्होंने किया। आलोचकों के प्रति उसका जवाब था कि उनका सफाया कर दिया जाए, तो दस वर्षों में उसने पंजाब में हाहाकार मचा दिया।  कुछ लोग अभी भी उसकी याद ताजा करने की कोशिश में लगे रहते हैं, विदेशों में बहुत से गुरुद्वारों में प्रवेश द्वार पर उसके बड़े-बड़े चित्र लगे हैं और कुछ दिमागहीन नौजवान उसकी तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनते हैं। विद्वानों की सियाही और शहीदों के खून की कहानी में इतना सबकुछ है।

सदा सुखी रहो!

सुरेश कलमाड़ी जिनसे मेरी दोस्ती 80 के दशक में हुई थी, वह कुछ सप्ताह पहले मिलने आ गए। वह बहुत उदास लग रहे थे। संयोग से उसी दिन शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर ने शादी भी की थी, जिसमें उनके बच्चे भी शामिल थे। मैंने कलमाड़ी का हौसला बढ़ाने की कोशिश करते हुए कहा कि आप शशि और सुनंदा के बराबर ही अखबारों की सुर्खियों में रहते हैं। मुझे उम्मीद है कि आपकी कहानी का अंत भी उनकी कहानी की तरह से ही होगा और वह उसके बाद हमेशा सुखपूर्वक रहे। उन्होंने प्रसन्न मुद्रा में जवाब दिया कि मुझे उनसे जयादा मीडिया कवरेज मिली है। सदा सुखी रहने के बारे में मैं कामनवैल्थ खेलों के समाप्त होने के बाद ही जान पाउंगा।

हमारी माननीय रेल मंत्री

अपील है तौर-तरीके कुछ औरतों के

और इससे पहले कि मेरी धुनाई हो जाए,

मर्दों के भी साथ ही।

हमारी प्रिय ममता बैनर्जी हैं कैबिनेट मंत्री

अतः अपनी सरकार की सरेआम भर्त्सना करने की,

उन्हें है पूरी छुट्टी

और अब क्योंकि चुनाव में हैं वे उतरी

नक्सलवादियों से कर ली है दोस्ती

भाड़ में गई इस पर राष्ट्रीय नीति

आजकल कोलकाता से ही फोन पर है भारतीय रेल चलती।

और जब कोई रेल दुर्घटना होती  है,

जो कि अकसर होती ही रहती है

तो वे हैं कहती

यह सरासर तोड़फोड़ है

और इसके लिए जिम्मेदार है सीपीएम सीधी

सो ईश्वर के लिए

यदि आपको अपनी

समस्याओं का हल चाहिए

तो पश्चिम बंगाल की

सरकार को भगाइये।

(कुलदीप सलील ने दिल्ली से भेजा)

लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं

खुशवंत सिंह

September 11th, 2010

 
 

भ्रष्टाचार का नया नाम विकास

भ्रष्टाचार या घोटालों की नींव नेताओं द्वारा ही रखी जाती है 99 प्रतिशत घोटाले नेताओं के आशीर्वाद में ही पनपे हैं। शायद एक प्रतिशत घोटाला हो, जिसमें किसी नेता का आर्शीवाद न हो…   भारत  को जैसे दुनिया की नजर लग गई हो। घोटालों ने […] विस्तृत....

September 11th, 2010

 

जनजातीय लोगों की सुरक्षा में

सरकार के उच्च स्तरीय लोगों को गंभीरता से सोचना होगा कि जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति को, निरंतर हो रहे जमीन के अतिक्रमण और शोषण से कैसे बचाया जाए…    भारतीय जनता के 8.2 प्रतिशत लोग जनजातीय हैं और उनका शोषण लगातार सरकार तथा ठेकेदारों द्वारा […] विस्तृत....

September 10th, 2010

 

खेल प्राधिकरण से सुदृढ़ होंगे प्रदेश के खेल

खेल प्राधिकरण बनने से राज्य की खेलों को नई दिशा मिलेगी। आज राज्य में खेलों को चलाने वाली अलग-अलग संस्थाएं हैं, फिर भी प्रतिभा खोज कार्य राज्य में ठीक ढंग से नहीं हो रहा है… पिछले महीने के अंत में हुई राज्य खेल परिषद की […] विस्तृत....

September 10th, 2010

 

खनिज निर्यात के दाम बढ़ाइए

30 वर्ष पूर्व कच्चे चमड़े के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। कुछ समय बाद देश से चमड़े से बने माल का भारी मात्रा में निर्यात शुरू हो गया। इसी प्रकार लौह खनिज के निर्यात में कटौती से शीघ्र ही घरेलू स्टील उद्योग का […] विस्तृत....

September 7th, 2010

 

चिंताजनक है प्रदेश में घटता कृषि उत्पादन

देश में किसान का शोषण हो रहा है। उसे अपनी मेहनत का दाम बहुत कम मिल रहा है। दूसरे देशों की तरफ देखें, तो वहां कृषि के लिए अथाह अनुदान दिया जाता है… हिमाचल में पहले काफी उपजाऊ खेत थे और मक्की, दलहनों व गेहूं […] विस्तृत....

September 7th, 2010

 

नेता विकास चाहते हैं या पर्यावरण?

सब ओर तथाकथित विकास के नाम पर एक ही तस्वीर है। खेती की जमीनें, पहाड़, जंगल, नदियां इस तथाकथित विकास की भेंट चढ़ रहे हैं और सरकारें इसे उचित ठहरा रही हैं… आर्थिक नीतियों के खिलाफ जारी आंदोलनों पर नेताओं के रवैये से देश में […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

खूनी सड़कों और परिवहन

  आज भ्रष्टाचार की सही तस्वीर तो यह है कि जहां टायरिंग के एक हफ्ते के बाद ही सड़कें उखड़ रही हैं, तो वहीं करोड़ों खर्च कर बनाए जा रहे पुल व डंगे उद्घाटन के कुछ समय बाद ही ध्वस्त हो रहे हैं…   हिमाचल […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

क्रॉस कंट्री दौड़ में हितों के अनुरूप हों नियम

क्रॉस कंट्री दौड़ में हितों के अनुरूप हों नियमनियमानुसार क्रॉस कंट्री कच्चे रास्ते पर गांव या गोल्फ कोर्स में दौड़ाई जाती है, किसी जगह यदि पक्की सड़क भी आ जाए, तो प्रतियोगिता के समय वहां पर मिट्टी डाल दी जाती है, मगर हिमाचल में पिछले कई वर्षों से पक्के रोड पर ही क्रॉस […] विस्तृत....

September 2nd, 2010

 

राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार

राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचारशुरू से ही इस आयोजन को ठीक ढंग से नहीं लिया गया और काम पूरा करने में बहुत ही विलंब हो रहा है। अब तो कोई जादूगर भी इस स्थिति को संभाल नहीं सकेगा…  कई बुद्धिजीवी लोग राष्ट्रमंडल खेलों के विरोध की बात कर रहे […] विस्तृत....

September 2nd, 2010

 
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