जादू की झप्पी

By: Feb 9th, 2023 12:05 am

आलोचना का अर्थ है कि कोई परेशानी है, कोई कमी है, उस कमी को दूर कर देने से शिकायत दूर हो जाती है और फुन्सी को फोड़े में तब्दील होने से रोका जा सकता है। अक्सर समस्याएं इसलिए पनपती हैं कि समय पर उनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया, उनको दूर नहीं किया गया और समस्या बड़ी होती चली गई। यदि आवश्यक हो तो आलोचना से जुड़ी समस्या के समाधान के बाद संबंधित व्यक्ति से बात करें और उसे बताएं कि समस्या का समाधान हो गया है और उसे समस्या की तरफ इशारा करने के लिए धन्यवाद दें। इससे उस व्यक्ति में आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा और अगली बार यदि कोई नयी समस्या होगी तो वह आपको समस्या की जानकारी तो देगा, आपकी आलोचना नहीं करेगा। यह आपकी बड़ी जीत है…

यह एक सुखद संयोग ही था कि पिछले हफ्ते ‘स्टुडेंट कलैक्टिव’ के सदस्य छात्रों का एक बड़ा समूह हमारी कंपनी क्विकरिलेशन्स के कार्यालय में हमारे साथ था और वे सब पत्रकारिता और जनसंपर्क के बारे में जानने को उत्सुक थे। स्थानीय माडलिंग एवं विज्ञापन एजेंसी के मुखिया सुनील बंसल भी मेरे साथ थे और हम दोनों ने पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन और माडलिंग क्षेत्र में उपलब्ध विविध अवसरों की जानकारी दी। औपचारिक बातचीत के बाद जब सवाल-जवाब का दौर चला तो एक विद्यार्थी ने मुझसे पूछा कि क्या पर्फेक्ट होने, एकदम सही होने, सर्वथा पारंगत होने से बड़ा भी कोई और गुण है? मुझसे पूछा गया यह पहला सवाल था और यह सवाल इतना बढिय़ा और इतना गहराई लिए था कि मुझे उस विद्यार्थी की काबलियत पर रश्क हुआ। तब उत्तर में मैंने कहा कि हां, पर्फेक्ट होना आदर्श स्थिति है और हर व्यक्ति को पर्फेक्शन का हरसंभव प्रयत्न करना चाहिए परंतु जीवन में बड़ी सफलता के लिए तकनीकी योग्यता ही काफी नहीं है, बड़े पद पर वही व्यक्ति पहुंच पाता है जो लोगों को अपने साथ लेकर चलने की योग्यता रखता हो, टीम लीडर हो, ‘पीपल मैनेजमैंट’ की कला में पारंगत हो। लोगों को साथ लेकर वही चल सकता है जो अपने साथियों के काम का श्रेय उन्हें दे और अच्छे काम के लिए खुले दिल से उनकी प्रशंसा करे। झूठी प्रशंसा की पोल जल्दी ही खुल जाती है, लेकिन दिल से की गई सच्ची प्रशंसा किसी को बुरी नहीं लगती। प्रशंसा की हमेशा प्रशंसा ही होती है। बालीवुड की प्रसिद्ध फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ में फिल्म के नायक संजय दत्त अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी को गले लगाकर उसे धन्यवाद देते हैं, उसके अच्छे काम के लिए उसका शुक्रिया अदा करते हैं तो उससे पहले चिड़चिड़ा रहे उस सफाई कर्मचारी का गुस्सा एकदम काफूर हो जाता है और भावुकतावश उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

धन्यवाद ज्ञापन के उस तरीके को फिल्म में ‘जादू की झप्पी’ कहा गया है जो सचमुच सही है। प्रशंसा का हर शब्द जादू की तरह काम करता है और सामने वाले को विनम्र बना देता है। भारतवर्ष में रिश्तों की गहराई इतनी ज्य़ादा रही है कि उनमें औपचारिकता नहीं थी। मजबूत पारिवारिक बंधन के कारण परिवार के एक सदस्य का दूसरे के काम आना या अपनी खुशियों की कुर्बानी देना सामान्य माना जाता था और उसमें धन्यवाद ज्ञापन की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। वह प्रेम का सुखद सुंदर प्राकृतिक रूप था। उसी प्रकार भारतीय समाज में भी औपचारिकता कम थी, अपनापन ज्य़ादा था और धन्यवाद ज्ञापन की परंपरा ऐसी नहीं थी कि हर छोटी-छोटी बात पर दिन में 10 बार धन्यवाद दिया जाए। पश्चिमी समाज में इसके विपरीत हर बात पर धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता को अधिमान दिया गया और कार्पोरेट जगत में जहां रिश्ते पारिवारिक नहीं होते, पेशेवर जगत में लोगों को साथ लेकर चलने के लिए धन्यवाद की औपचारिकता निभाना बहुत आवश्यक है। ऐसा न होने पर आपको घमंडी और स्वार्थी मान लिया जाता है और आपकी सफलता एक हद के बाद सीमित हो जाती है। धन्यवाद से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण खासियत है आपकी मुस्कान। जब आप मुस्कुराते हैं तो आपका चेहरा खिल जाता है। खिले चेहरे की अपनी अलग आभा होती है, अपना अलग आकर्षण होता है। सिर्फ मुस्कुराते रहकर भी आप सामने वाले का दिल जीत सकते हैं या उसकी कड़वी बातों को अर्थहीन बना सकते हैं। यदि कोई आपकी आलोचना करे तो आलोचना पर प्रतिक्रिया मत दीजिए। आलोचना को ध्यान से सुनिए और मुस्कुराते रहिए, शांत रहिए, चुप रहिए, कुछ भी जवाब न दीजिए। इससे, पहले तो सामने वाला चिढ़ेगा, फिर धीरे-धीरे उसके पास कहने को कुछ नहीं बचेगा और वह चुप हो जाएगा। यदि आप जवाब देंगे तो बहस बढ़ेगी, कड़वाहट बढ़ेगी और लाभ की जगह हानि की संभावना हो सकती है।

चुप रहकर आलोचना को बर्दाश्त करना हालांकि आसान नहीं होता, लेकिन यदि आप इसका अभ्यास कर लें तो आप जीवन में बड़ी सफलताएं आसानी से पा सकते हैं। चुप रहकर मुस्कुराते रहना भी जादू की झप्पी ही है। आलोचना का उत्तर न देने का मतलब यह नहीं है कि आप आलोचना की उपेक्षा कर दें। आलोचना हो तो ध्यान से सुनिए। आलोचना का अर्थ है कि कोई परेशानी है, कोई कमी है, उस कमी को दूर कर देने से शिकायत दूर हो जाती है और फुन्सी को फोड़े में तब्दील होने से रोका जा सकता है। अक्सर समस्याएं इसलिए पनपती हैं कि समय पर उनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया, उनको दूर नहीं किया गया और समस्या बड़ी होती चली गई। यदि आवश्यक हो तो आलोचना से जुड़ी समस्या के समाधान के बाद संबंधित व्यक्ति से बात करें और उसे बताएं कि समस्या का समाधान हो गया है और उसे समस्या की तरफ इशारा करने के लिए धन्यवाद दें। इससे उस व्यक्ति में आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा और अगली बार यदि कोई नयी समस्या होगी तो वह आपको समस्या की जानकारी तो देगा, आपकी आलोचना नहीं करेगा। यह आपकी बड़ी जीत है। इसी प्रकार यदि आप अच्छे टीम लीडर बनना चाहते हैं तो आपको निरीक्षण करने की आदत डालनी चाहिए। आसपास के कामकाज का निरीक्षण करना, लोगों की बातचीत के लहजे का निरीक्षण करना, अनावश्यक न बोलना, सदैव आपके हित में होता है।

जब आप बिना बोले, बिना टोके, पूरी तरह से फोकस होकर निरीक्षण करते हैं तो आपको कई समस्याओं का पता समय पूर्व चल जाता है और आप उनके हल का प्रयास भी समय पर कर लेते हैं। अपने सहकर्मियों के कामकाज के तरीके का निरीक्षण कर आप उन्हें महत्वपूर्ण सुझाव दे सकते हैं। तकनीक ने हमें नई सुविधाएं दी हैं। सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान हुआ है और लगभग मुफ्त के भाव सूचनाएं देना संभव हो सका है। स्मार्टफोन पर सस्ता इंटरनेट पैक आपको ह्वाट्सऐप, टेलिग्राम मैसेंजर, हाइक मैसेंजर आदि द्वारा सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा देता है। फेसबुक, ईमेल, एसएमएस, एमएमएस आदि माध्यमों से आप लोकों से संवाद बना सकते हैं या बनाए रख सकते हैं। परंतु इसने हमें बीमार भी किया है। तकनीक ने हमें स्मार्टफोन का गुलाम बना दिया है और सवेरे नींद खुलते ही स्मार्टफोन हमारे हाथ में आ जाता है जो सोने के लिए बिस्तर में जाते वक्त तक हमारे साथ बना रहता है। ‘आलवेज़ ऑन’ यानी सदैव उपलब्ध रहने की इस संस्कृति ने कई नई समस्याओं को जन्म दिया है और हम पर मानसिक दबाव बनाए हैं। ऐसे में स्वयं खुश रहना और दूसरों को रखना एक बड़ी कला है। सो, जादू की झप्पी का जादू चलाते रहिए, खुश रहिए, खुश रखिए और मत भूलिए कि जो इसमें माहिर हो जाता है, वह सफलताओं के शिखर सहज ही छू लेता है।

पी. के. खुराना

राजनीतिक रणनीतिकार

ई-मेल: indiatotal.features@gmail.com


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