राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ चढ़ा, 2025 में दर्ज हुए सबसे ज्यादा 1820 केस
तेजाब और पेट्रोल बने मौत का हथियार, घरेलू हिंसा पीडि़ताओं को कोर्ट में भी सताने लगे पति
10 साल में 50 प्रतिशत मामले बढ़े
स्टाफ रिपोर्टर — मंडी
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में पिछले एक दशक के दौरान लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेजाब और पेट्रोल मौत के हथियार बने हैं। मंडी जिला में ममता की तेजाब फेंककर हत्या और कोटली में पेट्रोल छिडक़कर मारी गई महिला इसके उदाहरण हैं। घरेलू हिंसा पीडि़ताओं को पति अब कोर्ट परिसर में भी सताने लगे हैं। हाल में गत शुक्रवार को मंडी कोर्ट परिसर में पेशी के लिए आई महिला रीमा पर उसके पति मुकेश कुमार ने शीशी में भरा तरल पदार्थ फेंक दिया। पुलिस ने इस बारे मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल महिला को कोई रिएक्शन नहीं हुआ है। पुलिस ने महिला के कपड़ों से सैंपल लेकर फोरेंसिक जांच को भेज दिए हैं।
रिपोर्ट आने के बाद पता चल पाएगा कि तरल पदार्थ क्या था, लेकिन न्याय के मंदिर में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खिलाफ अपराधों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में ऐसे मामलों की संख्या 1820 तक पहुंच गई, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक रही। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 1216 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद मामलों में लगातार वृद्धि का सिलसिला जारी रहा और वर्ष 2021 में यह संख्या बढक़र 1700 तक पहुंच गई। वर्ष 2022 और 2023 में मामूली गिरावट देखने को मिली, लेकिन 2024 और 2025 में अपराधों का ग्राफ फिर तेजी से ऊपर चढ़ गया। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में ही 573 मामले दर्ज हो चुके हैं। वहीं छेड़छाड़ के मामले सबसे अधिक दर्ज होने वाली श्रेणियों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2016 में 405 मामले दर्ज हुए थे, जो वर्ष 2025 में बढक़र 521 तक पहुंच गए। वहीं अपहरण व महिलाओं को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामलों में सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
रेप के मामलों ने बढ़ाई चिंता
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दुष्कर्म के मामले सबसे अधिक चिंता का विषय बने हुए हैं। वर्ष 2016 में जहां 244 रेप के मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2019 में यह संख्या बढक़र 360 तक पहुंच गई। वर्ष 2025 में 397 मामलों के साथ यह आंकड़ा दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल 2026 तक ही 113 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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