कुल्लू के बागबान कमा रहे मोटा पैसा
सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने बढ़ाई आय, देश-भर में बढ़ी प्लम की डिमांड
कार्यालय संवाददाता-कुल्लू
हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। सेब के अलावा प्लम की खेती भी जिले के हजारों किसानों और बागबानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरी है। इन दिनों कुल्लू जिला से प्लम की खेप विभिन्न मंडियों में पहुंच रही है और फलों के अच्छे दाम मिलने से बागबानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। बंजार उपमंडल के प्रगतिशील बागवान तारा चंद ठाकुर ने लगभग 600 प्लम के पौधे लगाए हैं। सरकार की सहायता से सोलर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली उपलब्ध हुई, जिसके माध्यम से उनके खेतों और बागीचों तक नियमित रूप से पानी पहुंच रहा है। सिंचाई सुविधा मिलने से पौधों की वृद्धि बेहतर हुई है और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
तारा चंद ठाकुर का कहना है कि पहले पानी की कमी के कारण खेती और बागबानी करना कठिन था, लेकिन अब सरकारी सहयोग से उनकी आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। जिला में तारा चंद ठाकुर जैसे हजारों किसान और बागबान आज सरकारी योजनाओं से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। जिले में प्लम की प्रमुख किस्मों में सैंटा रोजाए मैरी पोजाए ब्लैक हैमर तथा फ्रन्टियर शामिल हैं। इन किस्मों के फलों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण बाजार में अच्छी मांग बनी रहती है। जिला कुल्लू में लगभग 2270 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लम की पैदावार होती है।
लोगों की अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती
यह उत्पादन न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आज हजारों किसान और बागवान उठा रहे हैं। सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकए वैज्ञानिक परामर्श, उन्नत पौध सामग्री, सिंचाई सुविधाएं, कृषि एवं बागवानी उपकरणों पर अनुदान तथा विपणन संबंधी सहयोग उपलब्ध करवा रही है।
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