मंडी के पेड़ कमाऊपूत, साढ़े सात करोड़ की हुई आय

By: Jun 21st, 2026 12:45 am

पेड़ की पतियों से कमाए साढ़े चार करोड़, जड़ी-बुटियों ने दिए सवा पांच करोड़, राजीव गांधी वन संवद्र्धध्न योजना में मंडी को 1.24 करोड़

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, मंडी
मंडी को खुबसूरत बनाने वाले पेड़ सरकार के लिए अब कमाऊपूत बन गए हैं। पेड़ों की लकड़ी सहित इनकी पत्तियां सब कुछ सरकार को कमा कर दे रही हैं। इसके साथ ही जंगलों में उगी जडी बूटियां ही सरकार के खजाने को भर रही हैं। मंडी वन वृत में पेडों ने ही सरकारी खजाने में साढे सात करोड डाल दिए हैं। पेडों की पत्तियों से साढे चार करोड तथा जडी बूटियों से सवा पांच करोड की आए हुई है। मंडी में राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना के तहत पेडों को संरक्षित करने के लिए 1.24 करोड़ आबंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना सहित अनेक योजनाएं एवं कार्यक्रम वन संपदा की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मंडी जिला में भी इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। मंडी वन वृत के अंतर्गत जिला मंडी का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 3950 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 1887 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन अच्छादित है, जो कुल क्षेत्रफल का करीब 47.77 प्रतिशत है। वन वृत्त मंडी में राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना के अन्तर्गत वन विकास एवं आजीविका संवर्द्धन में स्थानीय समुदायों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

इस योजना का उद्देश्य हरित आवरण में वृद्धि, वन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करना तथा स्थानीय लोगों में स्वामित्व की भावना विकसित करना है। लाभार्थियों की सहभागिता से पौधरोपण, वन भूमि सुधार एवं संबंधित गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 121.5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए कार्य स्वीकृत किए गए, जिनके लिए लगभग एक करोड़ 24 लाख 20 हजार रुपए की वित्तीय राशि आबंटित की गई। इस दौरान 102.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण कार्य पूर्ण किया गया तथा लगभग एक करोड़ से अधिक की वित्तीय उपलब्धि अर्जित की गई।

महिला-युवक मंडल लगाएंगे पौधे
योजना के अंतर्गत 74 महिला मंडल व युवक मंडलों को लाभान्वित कर 122857 पौधे/पालियों का वितरण किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु स्वच्छ बनाए रखने में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वहीं, वन संपदा के माध्यम से आय अर्जित करने के भी बेहतर साधन सृजित हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान वन विभाग द्वारा विभिन्न स्त्रोतों से लगभग 7 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। इसमें काष्ठ एवं अन्य वन उपज, औषधीय पौधों सहित लघु वन उपज, चराई एवं घास तथा विभिन्न उत्पादों से प्राप्त आय शामिल है।

7712 घन मीटर लकड़ी का उत्पादन
प्रमुख वन उपज के अंतर्गत लगभग 7712 घन मीटर औद्योगिक लकड़ी का उत्पादन किया गया, जिसमें देवदार, चीड़, कैल, फर/स्प्रूस तथा अन्य चौड़ी पत्ती प्रजातियाँ शामिल हैं। इनसे लगभग 4 करोड़ 42 लाख 71 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। लघु वन उपज के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिरोजा, औषधीय जड़ी-बूटी एवं अन्य लघु उत्पादों से महत्वपूर्ण उत्पादन एवं राजस्व अर्जित किया गया, जिसका कुल मूल्य 5 करोड़ 33 लाख रुपए से अधिक रहा।

वन क्षेत्र में बनाए 61 तलाब
इसके अतिरिक्त जल संग्रहण संरचनाओं के अन्तर्गत 61 जल तालाबों का निर्माण किया गया जिनकी कुल जल धारण क्षमता 61 हजार घन मीटर है। पौधारोपण, पुनर्जनन एवं वन संसाधनों की सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रयास करते हुए लगभग 861 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण किया गया। वन वृत्त मंडी में वन अधिकार अधिनियम-2006 (एफआरए) के तहत वर्ष 2025-26 में 59 प्रकरण स्वीकृत कर लगभग 21 हेक्टेयर क्षेत्र आबंंटित किया गया।


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