कल स्कूलों में नहीं बनेगा खाना
मिड डे मील वर्कर का शिमला में राज्यव्यापी प्रदर्शन, धर्मपुर में सम्मेलन कर बनाई रणनीति
टीम, सरकाघाट/धर्मपुर
मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू) ने 22 जून को राज्यव्यापी हड़ताल और शिमला में प्रस्तावित प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए धर्मपुर में सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में घोषणा की गई कि सोमवार को प्रदेश भर के मिड डे मील वर्कर स्कूलों में भोजन नहीं बनाएंगे और अपनी मांगों को लेकर शिमला में होने वाली रैली में भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की धर्मपुर क्षेत्रीय कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें सिद्धपुर की सत्या देवी को प्रधान, लौंगनी की सरोजा एवं सज्याओ की रजनी को उपप्रधान, सरौन की जमना को सचिव, बांदल की शुक्ला और ब्रांग की अंजना को सहसचिव तथा पम्मी देवी को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा माया, संतोष, सुनीता, सीमा, राजकुमारी, सरिता, अत्ती देवी और सपना को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया। कमेटी का गठन यूनियन के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह और यूनियन प्रभारी गुरदास वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में किया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूनियन प्रभारी गुरदास वर्मा ने कहा कि मिड डे मील वर्करों को वर्ष में केवल दस महीने का मानदेय दिया जाता है, जबकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें 12 महीने का मानदेय देने का निर्णय सुनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई है, जिसके चलते यूनियन भी न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने जा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्करों को आकस्मिक, चिकित्सकीय या अन्य प्रकार की छुट्टियां भी उपलब्ध नहीं हैं। यदि किसी कारणवश अवकाश लेना पड़े तो उन्हें स्वयं अपने स्थान पर किसी अन्य कुक की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई बार बीमारी या दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में भी अवकाश नहीं मिल पाता, जो श्रम कानूनों की भावना के विपरीत है। यूनियन ने ऑनलाइन मानदेय भुगतान की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पे-स्लिप जारी करने की मांग भी उठाई। जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो मिड डे मील वर्कर नियुक्त किए जाने चाहिए ताकि किसी एक के अनुपस्थित रहने पर दूसरा कार्य संभाल सके। उन्होंने 25 विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर वर्करों की छंटनी की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की। साथ ही स्कूलों के विलय के बाद अन्य विद्यालयों में समायोजित किए गए वर्करों को समान वेतन देने की बात भी उठाई। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मिड डे मील योजना केंद्र सरकार की योजना है, लेकिन पिछले कई वर्षों में केंद्र स्तर पर मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
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