पेट्रोल पर पहरा; खेतों में ठहरी रफ्तार, बुआई-छिडक़ाव के सीजन में संकट गहराया
कैन में ईंधन बंद होने से ग्रामीण इलाकों में हाहाकार, नए नियम से किसानों-बागबानों की बढ़ी मुश्किलें, पावर टिल्लर और स्प्रेयर हुए बेकार
स्टाफ रिपोर्टर- मंडी
केंद्र सरकार के नए ईंधन वितरण नियमों ने हिमाचल प्रदेश के हजारों किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के बाद पेट्रोल पंपों पर बोतल, कैन और अन्य खुले कंटेनरों में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी गई है। इसका सबसे बड़ा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जो खेती और बागवानी कार्यों के लिए पावर टिलर, पावर स्प्रेयर और अन्य छोटे कृषि उपकरणों पर निर्भर हैं। 11 जून 2026 को जारी मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (खुदरा विक्रय केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026 के तहत फिलहाल 90 दिनों के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।
आदेश का उद्देश्य ईंधन की कालाबाजारी, जमाखोरी और औद्योगिक उपयोग के लिए हो रही अवैध खरीद को रोकना बताया गया है। हालांकि, इस फैसले का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता दिख रहा है। प्रदेश के किसान बताते हैं कि पावर टिलर और स्प्रेयर को कई किलोमीटर दूर स्थित पेट्रोल पंप तक ले जाना व्यावहारिक नहीं है। अधिकांश किसान अब तक छोटे कैनों में पेट्रोल लेकर खेतों और बागानों तक पहुंचाते रहे हैं, लेकिन नए नियम के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के समक्ष मामला उठाने की बात कही है। राज्य सरकार का कहना है कि कृषि और बागवानी गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए व्यावहारिक समाधान तलाशा जा रहा है।
समय पर जुताई-छिडक़ाव न होने से असर
होशियार सिंह के अनुसार इन दिनों खरीफ सीजन की बुआई और बागानों में रोग नियंत्रण के लिए दवा छिडक़ाव का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। ऐसे में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने से कृषि कार्यों में देरी की आशंका बढ़ गई है। समय पर जुताई और छिडक़ाव नहीं होने से उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
सरकार निकाले समस्या का हल
कांशी राम का कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए सरकार नियमों में संशोधन करे। हम सरकार ये मांग करते हैं कि इसका कोई ना कोई हल निकाला जाए।
प्रमाणपत्र के आधार पर दिया जाए ईंधन
राकेश ने कहा कि सरकार को कृषि कार्यों के लिए विशेष छूट चाहिए है। उनका सुझाव है कि किसान पहचान पत्र या पंचायत स्तर के प्रमाण-पत्र के आधार पर सीमित मात्रा में कैनों में ईंधन उपलब्ध कराया जाए।
पंप तक ले जाने के लिए भी खर्च हो रहा तेल
सेवक राम ने कहा कि सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार अब टिल्र क ो पैट्रोल पंप तक ले जाना पड़ रहा है। इसमें भी पैट्रोल खर्च हो रहा है। पेट्रोल पंप लगभग 15 से 20 किलामीटर दूर हैं। कई स्थानों पर किसानों ने पावर टिल्लर लेकर पेट्रोल पंपों के बाहर विरोध भी दर्ज कराया है।
धान की बिजाई रुकी
नरेश ने कहा कि आजकल धान की बिजाई होनी है, लेकिन पेट्रोल-डीजल न मिलने से काम रूक गया है। तेल भरवाने के लिए पेट्रोल पंप तक पावर टिल्लर ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में र्इंधन खत्म होने पर फिर से पावर टिलर को पेट्रोल पंप ले जाना पड़ रहा है। किसार पेट्रोल पंप तक पावर टिल्लर को लाने और ले जाने में ही उलझ गए हैं।
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