60 खड्डों का होगा तटीकरण, सोमभद्रा के बाद कई और क्षेत्रों में बाढ़ पर लगाम लगाने में खर्च होंगे 900 करोड़

By: Sep 24th, 2026 12:01 am

स्टाफ रिपोर्टर — गगरेट

जिला ऊना को बाढ़ के खतरे से पूरी तरह महफूज करने के बाद अब बाढ़ संरक्षण मंडल ने जिले की 60 और खड्डों के तटीकरण की कवायद शुरू कर दी है। इन खड्डों के तटीकरण पर करीब 900 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। बाढ़ संरक्षण मंडल ने जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी खड्डों को चिन्हित कर लिया है, जहां तटीकरण या तो अधूरा है या फिर अभी तक नहीं हो पाया है। अब इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्रीय जल आयोग को बजट मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे पहले जिला ऊना में बाढ़ संरक्षण कार्यों पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। सोमभद्रा नदी के साथ-साथ इसकी पांच प्रमुख सहायक खड्डों का भी तटीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा ब्यास बेसिन की खड्डों के तटीकरण के लिए करीब 350 करोड़ रुपए का प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार के विचाराधीन है।

55 खड्डों का हो चुका तटीकरण

ऊना जिला में अब तक करीब 55 खड्डों का तटीकरण किया जा चुका है। इसके बावजूद बाढ़ संरक्षण मंडल ने 60 ऐसी खड्डों को चिन्हित किया है, जिनमें तटीकरण का काम अधूरा है या अभी शुरू नहीं हुआ है। इनमें कई लंबी दूरी तक बहने वाली खड्डें हैं। कुछ खड्डों के एक हिस्से में तटीकरण हो चुका है, जबकि शेष हिस्सा खुला है। विभाग का मानना है कि यदि इनका पूरा तटीकरण नहीं किया गया तो बरसात के दौरान तेज बहाव से पहले से बने तटबंधों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसी को देखते हुए बाढ़ संरक्षण मंडल ने इन खड्डों का सर्वे कर उन्हें आगामी परियोजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सैकड़ों हेक्टेयर भूमि हुई खेती योग्य

जिला ऊना में बाढ़ संरक्षण के लिए किए गए तटीकरण कार्यों का असर केवल बाढ़ के खतरे को कम करने तक सीमित नहीं रहा है। तटबंध बनने के बाद नदी और खड्डों के किनारे सैकड़ों हेक्टेयर भूमि को रिक्लेम कर दोबारा खेती योग्य बनाया गया है। इससे कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिला है और किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। बाढ़ से होने वाले नुकसान में कमी आने के साथ ही नदी-खड्डों के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि को भी सुरक्षा मिली है। यही वजह है कि ऊना में तटीकरण परियोजनाओं को बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

1988 की बाढ़ ने मचाई थी तबाही

वर्ष 1988 में सोमभद्रा नदी में आई भयंकर बाढ़ ने जिला ऊना में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों में घुस गया था और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि व अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद सोमभद्रा नदी और इसकी सहायक खड्डों के तटीकरण की मांग जोर पकड़ती गई। तत्कालीन सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस मुद्दे को संसद में उठाया था। इसके बाद तटीकरण की दिशा में कदम आगे बढ़े। इसके बाद सोमभद्रा नदी के और इसकी सहायक खड्डों के तटीकरण के लिए परियोजना को मंजूरी मिली।

सतलुज-ब्यास बेसिन से जुड़ाव

सोमभद्रा नदी का जल प्रवाह सतलुज और ब्यास नदी तंत्र से जुड़ा हुआ है। दौलतपुर चौक से बाथड़ी तक सोमभद्रा अपनी सहायक खड्डों के साथ पंजाब में प्रवेश कर सतलुज नदी में समाहित होती है। वहीं, दौलतपुर चौक से आगे मरवाड़ी तक की छह खड्डें पंजाब से होकर ब्यास नदी में मिलती हैं। ऐसे में ऊना जिले में इन खड्डों का तटीकरण बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्रीय जल आयोग से मांगेंगे बजट

बाढ़ संरक्षण मंडल के अधिशाषी अभियंता इंजीनियर पंकज कुमार ने बताया कि जिले में 60 खड्डों को तटीकरण के लिए चिन्हित किया गया है। इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फिलहाल परियोजना की वास्तविक लागत बताना संभव नहीं है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह प्रस्ताव करीब 900 करोड़ रुपए का हो सकता है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्रीय जल आयोग को बजट स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।


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