बुरे घिरे ज्ञानेश कुमार, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां खारिज कर अकेले फैसले लेने के आरोप पर विपक्ष का हमला
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां खारिज कर अकेले विवादित फैसले लेने के आरोप पर विपक्ष का हमला
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बुधवार को एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के बाद विपक्ष के निशान पर आ गए। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए। दोनों ने आयोग के फैसलों पर 28 अक्तूबर, 2025 से 14 अगस्त, 2026 के बीच 14 बार लिखित आपत्तियां जताई गईं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं। कुछ आपत्तियां उन उपचुनाव आयुक्तों को भी भेजी गईं, जो संबंधित काम की निगरानी कर रहे थे। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोडऩे और हटाने की प्रक्रिया से लेकर चुनावी व्यवस्था और एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे शामिल होने की बात कही गई है। यह विवाद बिहार से जून 2025 में शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बीच सामने आया है। एसआईआर के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। हालांकि उनकी आपत्तियों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई विवादित फैसले लागू कर दिए। नियमों के अनुसार निर्वाचन आयोग के फैसलों में तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति होना जरूरी होता है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया में जारी पोस्ट में कहा कि मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो, गलत कर रहे हो। यह राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो। विपक्ष की ओर से प्रियंका गांधी और अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई नेताओं ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में दोबारा चुनाव करवाने की बात कते हुए ज्ञानेश कुमार का गिरफ्तार करने की मांग की है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें देश का दुश्मन तक कह डाला। दीपके ने कहा कि वह चुनाव करा नहीं रहे हैं, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अंगे्रजी अखबार की रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि वास्तव में भाजपा के लोग चुनावों की चोरी कर रहे हैं। इन वोटों की चोरी में ज्ञानेश कुमार सरगना हैं।
हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके ऊपर राष्ट्रदोह का मुकदमा चलाया जाए। पिछले कुछ सालों में जितने चुनाव हुए हैं दिल्ली का, महाराष्ट्र का, बिहार का, वेस्ट बंगाल का, हरियाणा का, मध्य प्रदेश का, ये सारे चुनाव कैंसिल करके दोबारा कराए जाएं। उधर, पूरे विवाद पर सफाई देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। बयान में आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। यह अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों आयुक्तों, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है। 10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है।
दो चुनाव आयुक्तों को इन मुद्दों पर थी आपत्ति
वोटर लिस्ट, नए मतदाताओं के पंजीकरण पर मनमानी
फॉर्म-6 में बदलाव को बताया था ‘अनाधिकृत व गैरकानूनी’
मतदाता डाटा के केंद्रीकरण पर जताई चिंता, पर नहीं सुनी
बंगाल में अपील को लेकर उठाए सवाल, लेकिन बात नहीं सुनी
गोवा में 97 पात्र मतदाता अंतिम सूची से बाहर रहे, एक्शन नहीं
चार महीने तीनों चुनाव आयुक्तों की कोई पूर्ण बैठक नहीं
एसआईआर पर 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्ति
चुनाव आयोग के बचाव में उतरी भाजपा
नई दिल्ली। चुनाव आयोग पर अंग्रेजी अखबार के खुलासे के बाद हमलावर बने विपक्ष को जवाब देते हुए भाजपा ने चुनाव आयोग का बचाव किया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि 2014 के बाद से विपक्ष धाराशायी हो चुका है। जनता ने विपक्ष को बार-बार खारिज किया। इससे विपक्ष बौखला गया है और संवैधानिक संस्था पर आरोप लगा रहा है। संबित पात्रा ने कहा कि जबसे मोदीजी की सरकार बनी है, एक के बाद एक, विरोधी पार्टियां धराशायी होती जा रही हैं। इसके बाद से विपक्षी पार्टियां संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही हैं। विपक्ष की यह आदत बन चुकी है।
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