भरत झुनझुनवाला

वर्तमान में जो बड़ा संकट तालिबान-पाकिस्तान-चीन के गठबंधन के बनने का हमारे सामने खड़ा हुआ है, उसे क्रियान्वित होने से रोकने का प्रयास करना चाहिए। हमें तय करना होगा कि बड़ा दुश्मन कौन? तालिबान-पाकिस्तान या चीन? चीन के साथ हमारी दुश्मनी 1962 के युद्ध से शुरू हुई है। उस समय भी चीन ने हमें सबक

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि अमरीका द्वारा वैयक्तिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल्यों को उतना ही प्रसारित किया जाता है जितना कि अमरीका के अपने आर्थिक हितों को साधने में सहायक होता है। जब ये मूल्य अमरीका के आर्थिक हितों के विपरीत हो जाते हैं तो अमरीका इन्हें प्रसन्नता से त्याग देता है। इसका

केन्द्र सरकार द्वारा तमाम ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं जो केवल व्यक्तिगत लाभ पहुंचाती हैं, जैसे उन्नत जीवन योजना के अंतर्गत एलईडी वितरण योजना, पीएम सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत और जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत बीमा पर सब्सिडी, ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत घर, अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत खाद्यान्न और उज्ज्वला के

इस परिस्थिति में सरकार को वर्तमान सरकारी कर्मियों के वेतन में कटौती करके इन्हें वर्तमान का केवल सातवां हिस्सा कर देना चाहिए, जिससे कि ये वियतनाम और चीन के समान हो जाएं। जैसे यदि किसी कर्मी को आज 70 हजार रुपए का वेतन प्रति माह मिलता है, तो उसे काटकर केवल दस हजार रुपए देना

इस प्रकार ये दोनों विचारधाराएं मूल रूप से समानतावादी होने के बावजूद आज अलग-अलग ढंग से असमानता को बढ़ा रही हैं। इस्लाम बाहरी अर्थात् दूसरे देशों पर आक्रमण नहीं करता, लेकिन अपने ही लोगों के प्रति असमानता का बर्ताव करता है। जबकि पश्चिमी सभ्यता दूसरे देशों का शोषण करती है और अपने लोगों के साथ

दूसरा, देश के उद्यमी अपना देश छोड़कर जो बांग्लादेश, वियतनाम, चीन आदि देशों में जाकर फैक्टरी लगा रहे हैं, उसके पीछे सामाजिक विवादों में वृद्धि दिखती है। अपने देश का सामाजिक ढांचा थरथरा रहा है। उद्यमी नहीं चाहता कि वह अपने परिवार या अपने स्वयं के जीवन को इस प्रकार के वातावरण में रखें। इसलिए

पांचवां उदाहरण 5जी इंटरनेट का लें। आम आदमी के लिए 4जी पर्याप्त है। उसके बच्चे को ऑनलाइन क्लास में सम्मिलित होना होता है अथवा उसे बगल के शहर में फसल के मूल्य की जानकारी की जरूरत होती है। लेकिन 5जी इंटरनेट से भारी मात्रा में सूचना का आदान-प्रदान आसान हो जाता है। जैसे डाटा एनालिसिस

सरकार को चाहिए कि आलोचक मीडिया को अपना विरोधी मानने के स्थान पर अपने सहयोगी के रूप में देखे। अंत में एक और कदम सरकार को उठाना चाहिए। जो शिक्षित एवं अमीर देश छोड़कर पलायन करना चाहते हैं, उनसे भारत की नागरिकता छोड़ने के लिए विशेष टैक्स लगाकर भारी रकम वसूल करनी चाहिए। मेरे संज्ञान

तीसरा कदम यह कि अनावश्यक तारीख न दी जाए। जजों और वकीलों का एक अपवित्र गठबंधन बन गया है। अधिकतर वादों में वकीलों द्वारा हर सुनवाई की अलग फीस ली जाती है, इसलिए जितनी बार सुनवाई स्थगित हो और जितनी देर से कोर्ट द्वारा निर्णय लिया जाए, उतना ही वकीलों के लिए हितकर होता है।

इसलिए सरकार को कठोर कदम उठाते हुए स्टेट बैंक को छोड़ कर अन्य सरकारी बैंकों, एयर इंडिया, तेल कंपनियों आदि का निजीकरण कर देना चाहिए और मिली हुई रकम को नई तकनीकों के आविष्कार में निवेश करना चाहिए। इस सुझाव के विपरीत कहा जा सकता है कि जो सार्वजनिक इकाई के समीप हैं, उनके हितों