ब्लॉग

चुनावी दौर में मतदाताओं की खामोशी तथा प्रजातंत्र की ताकत युवा वेग के चेहरे पर उदासीनता की झलक जम्हूरियत की तबीयत को नासाज कर देगी। बढ़ती जनसंख्या तथा बेरोजगारी देश में सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकती है...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ डा. हेडगेवार के समय से लेकर डा. मोहन भागवत तक के काल में देश के इन्हीं सामाजिक-सांस्कृतिक मसलों से बावस्ता रहा है और प्रयास करता रहा है कि देश की राजनीति देश की समाज रचना और संस्कृति के केन्द्र बिन्दु के इर्द-गिर्द निर्मित होनी चाहिए...

इस तरह हर जिले में किसी न किसी खेल के लिए प्ले सुविधा उपलब्ध है। क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि अच्छे प्रशिक्षकों व पूर्व खिलाडिय़ों को बुलाकर शिक्षा व खेल विभाग मिलकर खेल अकादमियां खोल दें। प्रदेश के दूरदराज शिक्षा संस्थानों में भी उपलब्ध खेल

यही वजह भी है कि इनकी शिक्षाओं को विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के दृष्टिगत स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित किया गया है। बुद्ध का शाब्दिक अर्थ है जागा हुआ, एनलाइटेन्ड अर्थात जिसे सत्य और आत्मज्ञान की प्राप्ति हो चुकी हो। यहां इसका तुच्छ अर्थ केवल राजा शुद्धोधन के पुत्र सिद्धार्थ से नहीं है, बल्कि उनके पहले भी अनेक समाधिस्थ व्यक्तियों को चैतन्यता, स

आज राजनीति में रसूख से कुछ भी हो सकता है। कद्दावर नेताओं ने अपनी जिंदगी में रसूख का इस्तेमाल कर महिलाओं के साथ ज्यादतियां भी की हैं। आज सेक्स शोषण के डर से महिलाएं राजनीति में आने से गुरेज करती हैं। क्या यह सच नहीं है कि बॉलीवुड के कास्टिंग काउच की तरह महिलाओं के लिए भी राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल करने का रास्ता पॉलिटिकल बेडरूम से होकर नि

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 1950 से लेकर 2015 तक कुल जनसंख्या में बहुसंख्यक हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में 7.82 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी में 43.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कई अन्य देशों में भी, जहां बहुसंख्यक आबादी

हम उम्मीद करें कि इस चुनाव के बाद देश में एक ऐसी मजबूत और प्रभावी सरकार का गठन होना जरूरी है जिसके द्वारा प्रवासियों के साथ स्नेह व सहभागिता के नए अध्याय लिखे जा सकेंगे। साथ ही प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान व कौशल की शक्ति से भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने, वर्ष 2027 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में भू

हुक्मरानों को हिमाचल प्रदेश के सैन्य बलिदान से मुखातिब होना होगा। सशस्त्र सेनाओं में वीरभूमि के दमदार सैन्य इतिहास के मद्देनजर राज्य के सैन्य भर्ती कोटे में बढ़ोतरी होनी चाहिए। युवाओं के मुस्तकबिल से जुड़े इस मुद्दे पर सूबे की लीडरशिप को राष्ट्रीय स्तर प

जमानत चाहे पक्की हो, चाहे अंतरिम, उसके लिए मानक भी अलग-अलग ही मान लिए गए हैं। चुनाव लडऩे व उसमें प्रचार करने वालों के लिए अलग मानक और वोट डालने वालों के लिए अलग मानक। कल को कोई भी विचाराधीन कैदी कह सकता है, हुजूर पांच साल बाद चुनाव का प