अनिद्रा ने छीना चैन

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार एक तरफ महंगाई का तांडव है, दूसरी तरफ मांगों का सिलसिला। लोग तनाव में जी रहे हैं और इसका दुष्प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। तनावग्रस्त व्यक्ति खुद पर काबू नहीं रख पाता और किसी ऐसी जगह…

पर्यटन मित्र साबित हो नई नीति

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं आजादी के बाद से अपने अस्तित्व में आने और 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल होने के बाद से विकास के मामले में हिमाचल प्रदेश ने एक लंबी छलांग लगाई है। अपने सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद…

वित्तीय घाटे का कठिन प्रश्न

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्तीय घाटा उस रकम को बोलते हैं जो सरकार अपनी आय से अधिक खर्च करती है। जैसे सरकार की आय यदि 80 रुपए हो और सरकार खर्च 100 रुपए करे तो वित्तीय घाटा 20 रुपए होता है। वित्तीय घाटे का अर्थ हुआ कि सरकार अधिक…

नागरिकता कानून के विरोधी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार ब्रिटिश सरकार का हित इसमें था कि एक नया इस्लामी देश बना कर उसे इस्लामी देशों की कमान सौंपी जा सके और उसका उपयोग भारत में रूसी साम्यवाद को रोकने के लिए किया जाए। इसके साथ ही भारत का एक स्थायी…

गुरु-शिष्य का घटता सम्मान

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार वामपंथ से जुड़े पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और संघ की वर्तमान अध्यक्ष आईशी घोष बात कर रहे हैं। किसी समय पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार मोदी या शाह या किसी अन्य व्यक्ति के बारे में…

सच बोलने वाली सरकार चाहिए

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार सत्या नडेला भारतीय मूल के हैं। वे अमरीका में रह रहे हैं और उन्हें माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनी का सीईओ बनने का अवसर मिला। वह यह कहना चाह रहे हैं कि अन्य देशों के लोग यदि भारत में आएं तो…

कर्मचारियों को मिले पुरानी पेंशन

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं केंद्र सरकार द्वारा एक जनवरी 2004 से और हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 15 मई 2003 से ही लागू न्यू पेंशन स्कीम के दुखदाई परिणाम सामने आने के बाद से इस प्रणाली से जुड़ने वाले नियमित सरकारी कर्मचारियों में…

तकनीकी विकास की चुनौती

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक तकनीकी विकास से अर्थव्यवस्था में इस प्रकार के मौलिक परिवर्तन समय-समय पर होते रहते हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ शुमपेटर ने इसे ‘सृजनात्मक विनाश’ की संज्ञा दी थी। जैसे पूर्व में घोड़ा गाड़ी चलती…

खेल नीति को आकर्षक बनाएं

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह खेल आरक्षण से सरकारी नौकरी लगे खिलाडि़यों के लिए अपनी ट्रेनिंग लगातार जारी रखने के लिए कम से कम पांच वर्षों का समय दिया जाए ताकि वे प्रदेश व देश को पदक जीत…

विरोध की लक्ष्मण रेखा क्या हो?

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करते-करते विपक्षी दलों का नेतृत्व कर रही ममता बनर्जी विरोध की वह लक्ष्मण रेखा पार कर गई लगती हैं। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बांग्लादेश, पाकिस्तान…

फैज की शायरी पर राजनीति

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार यदि कुछ और नहीं तो कविता भारत में अपने उद्वरण के दुरुपयोग के कारण कलह का केंद्र बिंदु बन सकती है। नागरिकता कानून के निहितार्थ के मामले में भारत उबाल पर है और कविता को कुछ मामलों में संदर्भित…

अर्थव्यवस्था की चुनौतियां

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार मोदी की कल्पनाशीलता और वाक्पटुता का आलम यह है कि विपक्षी दलों को कुछ भी सूझता ही नहीं और मोदी विकेट पर विकेट लिए जा रहे हैं या रन पर रन बनाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों के विकेट गिर रहे हैं और मोदी रन लेते…

खपत का अंडा या निवेश की मुर्गी

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक बीमार को भूख नहीं लग रही हो तो उसे घी देने से उसकी तबीयत और बिगड़ती है, सुधार नहीं होता है। अतः पहले परीक्षण करना चाहिए कि मंदी का कारण क्या है? और तब उसके अनुकूल दवा पर विचार करना चाहिए। निवेश और खपत का…

शिक्षा में भारतीय भाषाओं की महत्ता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार व्यक्तिगत रूप में मुझे संस्कृत भाषा पर बहुत अभिमान है। यह भाषा मुझे ठीक से आनी चाहिए, ऐसा मुझे आज भी लगता है। मैं अब खुद ही संस्कृत पढ़ता हूं। अपने इस परिश्रम के कारण मैं थोड़ी-थोड़ी संस्कृत…

साल 2019ः पीड़ा और उल्लास

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार संविधान में महत्त्वपूर्ण बदलावों के लिए भी यह साल याद किया जाएगा और इसका सुचारू प्रबंधन देश के गृह मंत्री ने किया। उनका दावा है कि अनुच्छेद 370 के बदलावों को लागू करने में एक भी गोली नहीं…