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इन झीलों को कम खतरनाक नहीं आंका जा सकता और उत्तराखंड जैसी त्रासदी कहीं और न हो, इसके लिए इन झीलों की सतत निगरानी हो… जलवायु परिवर्तन आज के युग की वास्तविकता बन चुकी है। प्रचलित विकास मॉडल के लिए ऊर्जा की अत्यधिक आवश्यकता है और यह जरूरत लगातार बढ़ती ही जा रही है। वही 

सरकारी और निजी दोनों प्रकार के बैंकों की विशेष लोगों को गलत ऋण देने की प्रवृत्ति होती है जिस पर अंकुश रिजर्व बैंक को लगाना चाहिए। इन परिस्थितियों को देखते हुए वित्त मंत्री को बधाई है कि उन्होंने दो सरकारी बैंकों के निजीकरण का फैसला किया है। जानकार बताते हैं कि दो छोटे सरकारी बैंकों

वैचारिक मतभेद होना आवश्यक है, लेकिन मनभेद घातक होता है। रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से जिस भी व्यक्ति ने यह देखा-सुना, उसे बहुत पीड़ा हुई कि आज संवैधानिक व्यक्ति के ऊपर किस तरह से लोकतंत्र का हनन हो रहा है। भारतीय संविधान में महामहिम राष्ट्रपति और महामहिम राज्यपाल का पद संवैधानिक पद है

निश्चित रूप से मैकेंजी की बदलते हुए वैश्विक रोजगार से संबंधित रिपोर्ट के मद्देनजर देश में डिजिटल रोजगार के मौकों को बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर डिजिटल रोजगार के मौकों को बड़ी संख्या में प्राप्त करने के लिए अभी से ही रणनीतिक कदम उठाए जाने जरूरी हैं। तभी नए अवसर नई पीढ़ी की मुट्ठियों में

बारिशें बेमौसमी होने की वजह से ऐसी प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ोतरी सभी के लिए परेशानी का सबब बन रही है। जंगलों की ज़मीन अवैध निर्माण की वजह से दिनोंदिन घटती जा रही है। राजनीतिक पहुंच रखने वालों ने सरकारी ज़मीनों पर आवासीय मकान सहित रेस्टोरेंट और होटल बनाकर सरकारी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई हैं।

प्रेमचंद की एक कहानी है ‘कफन’! इसके दो पात्र घीसू और माधव निकम्मे और आलसी हैं। जब लड़के की पत्नी मर जाती है तो गांव वाले बाप-बेटे को कफन-दफन के लिए पैसा देते हैं जिसे ये दोनों शराब और खाने में उड़ा देते हैं। प्रेमचंद ने गरीबी की हकीकत बयान की थी, मगर कुछ लोग

मन सदैव सुगमता से प्राप्त होने वाली वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए लालायित रहता है, भक्ति का मार्ग कठिन होता है, इसलिए वह इससे दूर भागना चाहता है। माया के प्रभाव में पड़कर यह लुभावने दिखाई देने वाले विष तुल्य सांसारिक विषयों को सुख का साधन मान लेता है और उनकी ओर आकर्षित होता

स्वाभाविक था सभ्यताओं के संघर्ष में लगी अब्राहमी सेनाओं का ध्यान एक बार फिर भारत की ओर गया। किसी भी तरीके से भारत की राजनीति के केंद्र में पहुंच चुकी सांस्कृतिक शक्तियों को किसी भी तरीके से अपदस्थ करना होगा। शायद शुरू में उन्हें लगता होगा कि नरेंद्र मोदी एक-आध पारी खेल कर निकल लेंगे।

भूपिंद्र सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक लड़कियों की युवावस्था 17-18 वर्ष की आयु में शुरू हो जाती है, लड़कों में यह एक-दो वर्ष बाद आती है। इस अवस्था तक आते-आते खिलाड़ी अपने-अपने खेल के लिए पूरी तरह तैयार हो गए होते हैं… किसी भी देश की तरक्की व खुशहाली उस देश के नागरिकों की फिटनेस पर