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कुछ छोटे-छोटे अभ्यास हमारा जीवन बदल सकते हैं। प्रतिदिन खुलकर हंसें। प्रकृति का आनंद लेने के लिए समय निकालें। जीवन के सभी उपहारों के लिए हर रोज शुक्रिया अदा करें। हर रोज कुछ न कुछ अच्छा होता ही है, उसके लिए शुक्रगुजार हों। तुलना को थोड़ा कम करें। कुछ नया सीखते रहें, कुछ नया करते रहें। कभी किसी की निस्वार्थ सहायता कर दें। सबसे बड़ी बात, परिवार के साथ बिना किसी स्क्रीन के बैठें और मोबाइल की स्क्रीन से अधिक जीवन के दृश्य देखें। धीरे-धीरे हम खुद-ब-खुद जान जाएंगे और अनुभव कर लेंगे कि आनंद खरीदा नहीं जाता, वह विकसित किया जाता है...

उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के नाम पर, भारतीय फर्मों, विशेष रूप से कंसल्टिंग क्षेत्र में, को जानबूझकर सरकारी खरीद अनुबंधों (प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स) के लिए प्रतिस्पर्धा से बाहर रखा जाता रहा है। उदाहरण के लिए कुछ करोड़ रुपए के अनुबंधों के लिए सरकारी टेंडरों में शर्तें होती हैं...

अंग्रेज सरकार ने बहुत ही चतुराई से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लाकर खड़ी कर दी थी। लेकिन बहुत से लोग अंग्रेज सरकार के इस षड्यंत्र में नहीं फंसे। राष्ट्रवादी ताकतें इससे अलग रहीं...

हिमाचल प्रदेश में खेल संस्थान बनता है तो यह प्रदेश के खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पदक विजेता बनाने में सहायक सिद्ध होगा, साथ ही गर्मियों के लिए देश के पास एक अच्छा प्रशिक्षण केन्द्र हो जाएगा...

मन, शरीर और व्यवहार- तीनों का संतुलन ही एक स्वस्थ और प्रसन्न व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, शायद इसीलिए हमें खुशी को खोजने की नहीं, उसे समझने की आवश्यकता है। जिस दिन हम यह स्वीकार कर लेंगे कि खुशी किसी भविष्य की मंजिल नहीं, बल्कि वर्तमान को जीने की गुणवत्ता है, उसी दिन हमारी प्राथमिकताएं बदल जाएंगी। तब खुशी किसी उपलब्धि का पुरस्कार नहीं रहेगी, वह जीवन जीने की शैली बन जाएगी। तब समझ में आता है कि खुशी हमारे पास कहीं बाहर से नहीं आई है, बल्कि वह हमारे अंदर से ही प्रकट हुई है। तब जीवन एक उत्सव बन जाएगा...

हजारों योग्य नेट-पीएचडी धारक शिक्षक 15 से 20 हजार रुपए के मानदेय पर ठेके पर पढ़ाने को मजबूर हैं। जिस शिक्षक के पास खुद का भविष्य सुरक्षित नहीं है, वह छात्रों के भविष्य का निर्माण कैसे करेगा? फर्जी जर्नल्स और कट-कॉपी-पेस्ट रिसर्च हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पेटेंट और मौलिक शोध में योगदान बेहद कम है। अकादमिक तरक्की पाने के लिए पेड जर्नल्स में नकली शोध पत्र छपवाने का एक पूरा रैकेट फल-फूल रहा है...

गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राज्य अमरीका व्यापार प्रतिनिधि द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भारत में यूपीआई लेन-देन के नि:शुल्क होने पर आपत्ति दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि शून्य एमडीआर नीति, रूपे कार्ड का प्रमोशन आदि से हमें हानि हो रही है...

इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, वैश्विक ऋण भुगतान व प्रबंधन आसान होगा और घरेलू बाजार में महंगाई को नियंत्रित रखना संभव हो सकेगा। इन विभिन्न आर्थिक अनुकूलताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष में भारत के सामने कई आर्थिक एवं वित्तीय चुनौतियां उभर कर दिखाई दे रही हैं...

इन रसायनों की बिक्री पर ही प्रतिबंध लग जाना चाहिए। राज्य में कृषि बीज और कीटनाशक दवाइयां बिक्री करने वाले ही इन दवाओं को उपलब्ध करवाते हैं और इन रसायनों को बनाने वाली कंपनियां नई नई लुभावनी जानकारियां विज्ञापनों के माध्यम से फैलाती रहती हैं। आजकल बड़े पेड़ों को सुखाने की दवाइयों के सोशल मीडिया पर विज्ञापनों की बाढ़ आई हुई है। ऐसे विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए। हिमालय नीति अभियान कई दिनों से इन पौध नाशक रसायनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार से भी अनुरोध कर रहा है...