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व्यक्तियों के प्रभाव से अपनी सुविधा के अनुसार नियमों में परिवर्तन न हो, अन्यथा व्यवस्था में अराजकता व व्यवधान पैदा होता है… स्थानांतरण किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के व्यावसायिक जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया है। सरकार के अधीन किसी विभाग में कार्यरत अधिकारी या कर्मचारी का ही स्थानांतरण होता है अन्यथा अपना व्यक्तिगत काम-धंधा, दुकान, उद्योग

अडिय़ल, कडिय़ल या जिद्दी आदमी जीवन में अक्सर पिछड़ जाते हैं जबकि लोगों को साथ लेकर चलना जानने वाले लोग सफलता के शिखर छू लेते हैं। कभी-कभी दिल की बात मान लेना भी हमारे लिए अच्छा होता है और यह प्रेरणा का एक बड़ा कारण बन सकता है। मान लीजिए, आप कोई वस्तु खरीदना चाहते

जोशीमठ जैसी आपदाओं को प्राकृतिक आपदा का नाम देने से पहले पहाड़ों पर इनसानी दखलअंदाजी से हो रही घटनाओं पर रायशुमारी होनी चाहिए। इनसानी सभ्यता के मुस्तकबिल को महफूज रखने के लिए भूगर्भ वैज्ञानिकों की नसीहत व निर्देशों को संजीदगी से लेना होगा। जोशीमठ को हर कीमत पर बचाना होगा… पृथ्वी पर कुदरत की सबसे

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार को योजनाबद्ध ढंग से आवंटन बढ़ाना चाहिए। शिक्षा में विषमताओं को दूर करना होगा… बेशर्मी से केन्द्रित होती पूंजी और व्यापक रूप से फलती-फूलती गरीबी ने हमारे यहां जिस तरह की अश्लील गैर-बराबरी को खड़ा कर दिया है उससे निपटने की तजबीज आखिर कौन देगा? ऑक्सफैम सरीखे

हमारे एक वोट के न डालने से अच्छा उम्मीदवार हार और गलत उम्मीदवार जीत सकता है। अपने मत का मूल्य न पहचान कर यदि मतदाता चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा न लें तो चुनाव एक खिलवाड़ बनकर रह जाएगा। सजग, सावधान और जागरूक मतदाता ही चुनावों को सार्थक बनाने की भूमिका निभा सकता है। अत: अपने

समझा जा सकता है कि जीएम फसलों को अपनाकर उत्पादकता बढऩे के तमाम तर्क असत्य हैं और वास्तव में जीएम फसलों द्वारा उत्पादकता बढऩे की कोई संभावना ही नहीं है। लेकिन इसके कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य और भारत के विदेश व्यापार में नुकसान के मद्देनजर सरकार को सत्य की जांच करनी चाहिए और जीएम फसलों को

वास्तव में आत्म सुरक्षा का अधिकार एक प्रतिरोध है और इसे अधिनियमित किया है… हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी समय और किसी भी परिपे्रक्ष्य में गुस्सा आना स्वाभाविक है। जब गुस्सा व आक्रोश एक सीमा से ऊपर चला जाता है तो व्यक्ति का व्यवहार हिंसक हो जाता है तथा विधि द्वारा

हिमालयी राज्यों की सरकारें केंद्र सरकार पर दबाव डाल कर पर्वतीय विकास के लिए अलग विकास मॉडल बनवाने का प्रयास करें और केंद्र सरकार एसजेड कासिम की अध्यक्षता वाली कमेटी की रपट का अध्ययन करके और वर्तमान में नीति आयोग द्वारा बनाए गए हिमालयी क्षेत्रीय परिषद को इस काम पर लगाना चाहिए और विश्वव्यापी अनुभवों

देश में गरीबी, कुपोषण और भूख की चिंताएं कम करने के लिए इस क्षेत्र की ओर कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीआरआर) व्यय का प्रवाह बढ़ाकर भी बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी तथा कुपोषण की पीड़ाओं से राहत दी जानी होगी। हम उम्मीद करें कि नए वर्ष 2023 में कोरोना के नए संक्रमण तथा वैश्विक मंदी