ग्लोबल वार्मिंग में नया अर्थशास्त्र

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक मनोविज्ञान में मनुष्य की चेतना के दो स्तर- चेतन एवं अचेतन बताए गए हैं। मनोविज्ञान के अनुसार यदि चेतन और अचेतन में सामंजस्य होता है, तो व्यक्ति सुखी होता है। उसे रोग इत्यादि कम पकड़ते हैं,…

कर्नाटक का कड़वा सच

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि विधानसभा के दस सदस्य उच्चतम न्यायालय में जाकर फरियाद लगा रहे हैं कि उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाए। उधर विधानसभा के अध्यक्ष हैं कि जब सदस्य…

नेता की तलाश में एक पार्टी

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार जवाहर लाल नेहरू का लोकतांत्रिक भारत के नेता के रूप में आरोहण भारत में एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम था। यह इसलिए कि मोती लाल नेहरू के बाद जवाहर लाल ने उस वंश परंपरा की नींव रखी जिसने…

प्रशिक्षक मोहताज, फिर कैसे होगा खेल

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक अब हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग उसे प्रशिक्षक बना रहा है, जो जिला स्तर तक खेला है और 42 दिनों की ट्रेनिंग किए हुए है, मगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो एक वर्ष की ट्रेनिंग किए…

कैसे बढ़े रोजगार

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में अभी तक आम लोग यह नहीं समझ पाए हैं कि सरकार का काम रोजगार देना नहीं है, बल्कि उसका काम यह है कि वह ऐसी नीतियां बनाए, जिससे व्यापार और उद्यम फल-फूल सकें और रोजगार के नए-नए अवसर पैदा…

अपेक्षाओं का बही-खाता

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्त मंत्री को चाहिए था कि देश में बढ़ते जल संकट को देखते हुए रिचार्ज वेल, जिसमें बरसात के पानी को सीधे भूगर्भीय जलाशयों में डाला जाता है, उसके लिए विशाल रकम उपलब्ध कराती। सेंट्रल ग्राउंड…

बेटियों को दें सुरक्षित माहौल

अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ प्रदेश पुलिस द्वारा जारी वर्ष 2017 की अवधि में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के आंकड़े बताते हैं कि दर्ज 1260 मामलों में 403 यौन शोषण, 248 रेप, 29 हत्या, दो दहेज हत्याओं, अपहरण के 249 तो बेटियों…

जल संसाधनों की चिंताजनक स्थिति

कुलभूषण उपमन्यु अध्यक्ष, हिमालय नीति अभियान पूरे देश में जल भरण क्षेत्रों और जल निकास क्षेत्रों का सर्वेक्षण होना चाहिए, ताकि भू-जल भरण का काम कहां करना है, इस बात का पता रहे। वैश्विक तापमान वृद्धि के चलते जलवायु परिवर्तन का…

राहुल के इस्तीफे के मायने

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार गांधी परिवार के अंदर का यह विवाद क्या है या फिर हो सकता है? वैसे तो इस झगड़े का धुंआ शुरू से ही उठ रहा था। विवाद शुरू से ही था कि विरासत कौन संभालेगा? राहुल गांधी या फिर प्रियंका…

लापरवाही का ट्रैक बनीं सड़कें

बीरबल शर्मा लेखक, मंडी से हैं लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली, सड़कों की दुर्दशा, पानी की निकासी, खतरनाक जगहों पर क्रैश बैरियर नहीं हैं। आधुनिक बीम रेलिंग भी ऐसी-ऐसी जगहों पर लगी है, जहां पर इसकी जरूरत कम है, मगर जहां होनी…

लोक-लुभावन वादों का औचित्य

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह प्रत्येक किसान को 72000 रुपए सालाना देंगे। यह उस गरीब किसान की भावना को…

अंतरराष्ट्रीय खेल ढांचे को यूं बर्बाद मत करो

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाली प्ले फील्ड बनकर तैयार हैं, मगर प्रदेश में खेल वातावरण के अभाव में खेल का यह स्तरीय ढांचा आज लावारिस बन गया…

खट्टे नहीं हैं अंगूर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जब समस्याएं नई हों, तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा।…

‘एक भारत, एक चुनाव’ लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने के लिए बहुत जोर लगा रहे हैं। सरकारी एजेंसियां एक मजबूत प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से व्यक्त की गई इच्छा पूरी करने के लिए एक-दूसरे से होड़ में हैं। परंतु…

दुर्घटनाओं को खस्ताहाल सड़कें जिम्मेदार

कंचन शर्मा लेखिका शिमला से हैं हैरत यह भी है कि हिमाचल में सड़कों के जो खस्ताहाल हैं, उनके बारे में कोई नीति, दिशा-निर्देश या सख्ती की बात नहीं हो रही, जबकि अन्य कारणों के साथ बस दुर्घटनाओं के लिए खराब, बेतरतीब व बिना पैरापिट की सड़कें…