अध्यापक, मार्गदर्शक और प्रायोजक

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार परिवार से मिले संस्कारों और सीख के बाद बच्चे की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत यहां से होती है। हमारे देश में स्कूल-कालेज की शिक्षा अधिकतर किताबी होती है और शिक्षक सिर्फ शिक्षक है। हमारे देश में ज्यादातर…

कोरोना जंग में जल विभाग की मुश्किलें

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं इस कर्फ्यू के समय में जल शक्ति विभाग बहुत सी मुश्किलों के बावजूद दिन-रात पानी की बहाली में सुचारू रूप से डटा है। प्रशासन का भी बराबर सहयोग है। कर्फ्यू पास, पहचान कार्ड फील्ड स्टाफ को दिए…

अर्थव्यवस्था बचाव के उपाय

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सबसिडी के बल पर निर्यातक माल का निर्यात चालू रख सकें, मेरे आकलन में यह दीवार पर सिर फोड़ने जैसा होगा। जिस समय संपूर्ण विश्व में मांग में लॉकडाउन चल रहा है और यह कब तक चलेगा इसका कोई अनुमान नहीं है, ऐसी…

चीनी वायरस का तहलका

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार आश्चर्य की बात है कि चीन में ही पैदा होने या पैदा किए जाने के बावजूद यह वायरस वुहान शहर के अतिरिक्त चीन के किसी अन्य शहर में नहीं पहुंचा, जबकि उसी कालखंड में यह चीनी वायरस दुनिया के…

कोरोना पर अंकुश के लिए नमस्ते

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार यह महामारी चीनी शहर वुहान में उत्पन्न हुई जहां वायरस के प्रजनन की सबसे अधिक संभावना मांस बाजार में हो सकती है। इसका नाम चीनी फ्लू भी है। इस देश में अब तक लगभग एक लाख लोग इस महामारी से…

निधि डोगरा हिमाचल में उभरता नाम

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक योग की शिक्षा उपनिषदों में मिलती है। योग व ज्ञान के द्वारा मोक्ष की बात प्राचीन भारतीय अध्यात्म में मिलती है। योग से हमें जगत की उत्पत्ति, पालन व संहार करने वाले परमात्मा का ज्ञान होता…

डिजिटल कुशलता और उद्यमिता

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में गरीब होना एक अभिशाप है क्योंकि गरीबों के उत्थान के लिए कोई योजनाबद्ध सामाजिक कार्यक्रम नहीं है और बेरोजगारी भत्ता भी नहीं है, लेकिन कई परिवर्तन युगांतरकारी होते हैं और वे समूचे समाज का ढांचा…

कोरोना ने बिगाड़ी बाजार की चाल

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं कोरोना से भारत सहित विश्व के अनेक देशों की बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की हालत पतली हो रखी है और अब तक भारतीय शेयरधारकों के लाखों करोड़ों रुपए स्वाहा हो चुके हैं। कोरोना के कहर से इस समय दुनिया भर के…

कोरोना की जड़ें वैश्वीकरण में?

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक समय क्रम में बीसवीं शताब्दी के ही अंतिम हिस्से में गरीबी के कारण, साफ- सुथरे इंजेक्शन का उपयोग न करने के कारण, नागरिकों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन न मिलने के कारण अथवा रोजगार न मिलने के कारण, उस एचआईवी…

विश्व जल बनाम जनता कर्फ्यू दिवस

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं जनता कर्फ्यू के बावजूद हमारे डाक्टर, पुलिस, मिलिट्री, भिन्न-भिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकार, राशन, दूध, मेडिकल शाप में अनेक वालंटियर अपनी जान जोखिम में डालकर मानवता की सेवा में…

समान नागरिक संहिता की जरूरत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जो लोग अरब क्षेत्रों से भारत में आकर बस गए, उन्होंने आपराधिक मामलों में भी आंख के बदले आंख की परंपरा जारी रखी। यहां तक कि हत्या के मामले में भी रिश्तेदारों को खून की कीमत चुका कर छुटकारा पाया…

सबसे नवाचारी प्रधानमंत्री

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार जब उन्होंने अपने संडे मॉर्निंग टॉक शो ‘मन की बात’ की शुरुआत की तब कई अभिजात्यों ने मजाक उड़ाया और सोचा कि यह कपिल के हंसी-मजाकिया शो की तरह होगा, एक कॉमेडी या राजनीतिक चैट की तरह। उन्होंने…

बेनकाब हो गई जिंदगी

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार कम्प्यूटर का आविष्कार एक बड़ा मील का पत्थर था, फिर इंटरनेट ने इसमें एक और क्रांति ला दी। इसी तरह गूगल के जादुई प्रभाव ने भी हमारे कामकाज को बहुत आसान बना दिया है। गूगल को ज्यादातर लोग विश्व का सर्वाधिक…

पहाड़ी क्षेत्रों का आर्थिक विकास

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान तेजी से गिर रहा है, मैन्युफेक्चरिंग एवं सेवा क्षेत्र बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि विश्व में कृषि उत्पादों की मांग सीमित है। विश्व की जनसंख्या में मामूली वृद्धि…

कोरोना की लगाम कसते ‘भारतीय संस्कार’

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं यह जानना बहुत आवश्यक है कि यह वायरस कहीं भी मौजूद हो सकता है। जहां हाथ लगने पर यह हमसे चिपक सकता है और फिर हाथों के जरिए मुंह, आंखों के रास्ते शरीर में प्रवेश पा सकता है। इसलिए अत्यावश्यक है कि बार-बार…