
सोने से एक घंटा पहले हल्दी वाला गुनगुना दूध लें। इससे नींद बढिय़ा आएगी और त्वचा में चमक बढ़ेगी, खूबसूरती बढ़ेगी। जब त्वचा खूबसूरत होगी तो महिलाओं को भी बाहरी मेकअप की जरूरत कम से कम पड़ेगी क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से खूबसूरत लगेंगी। अब जऱा इस दूध का तरीका भी समझ लीजिए। दूध को
हम अपने मित्रों में, परिचितों में, रिश्तेदारों में और खुद के परिवार में मृत्यु की घटनाओं को देखते हैं और उसके बावजूद मानते हैं कि हम अभी जि़ंदा रहेंगे। हम नहीं मानते कि हो सकता है कि हमें अगला सांस भी न आए। मृत्यु सच होते हुए भी हमारे लिए सच नहीं है। लेकिन अगर
तब उन्होंने अपना निश्चय फिर दोहराया, अपनी फिटनेस पर फोकस किया, खेल के लिए और मेहनत की और ज्यादा अच्छा खेलना शुरू किया। सन् 2011 विश्व कप मैच के दौरान सचिन की बेहतरीन फार्म के बावजूद शुरुआती असफलताएं मिलीं। तब सचिन ने पहली बार अपने साथी खिलाडि़यों को झिड़का भी और प्रेरित भी किया। परिणाम
यह समझना आवश्यक है कि कोई समस्या आए तो हमें क्या करना चाहिए। समस्याएं सुलझाने का चरणबद्ध जो वैज्ञानिक तरीका मनोवैज्ञानिकों ने सुझाया है, अब मैं उसकी चर्चा करूंगा। पहला चरण है यह स्वीकार करना कि समस्या हमारी है और इसे सुलझाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। यह पहला कदम है, इसे स्वीकार किए
निश्चय ही समय हमें बहुत कुछ सिखाता है, सवाल सिर्फ यह है कि खुद हम कुछ नया सीखने के लिए तैयार हैं या नहीं, या अपने ज्ञान के अभिमान में कैदी बनकर खुद ही खुद पर फिदा रहने की गलती करते हैं। कोरोना ने जहां एक ओर सारे विश्व को घुटनों पर ला दिया, इसके
मैं न ड्रग्स की तरफदारी कर रहा हूं, न ड्रग्स लेने वालों की। मैं तो यह चेतावनी देना चाहता हूं कि पेरेंटिंग को आउटसोर्स करके, बच्चों के पालन-पोषण का काम ट्यूटरों और नौकरों के भरोसे छोड़कर हम अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। आर्यन खान तो सिर्फ एक उदाहरण है। फिल्मी दुनिया में
मैं न मोदी की प्रशंसा कर रहा हूं न निंदा। मैं न विपक्ष की प्रशंसा कर रहा हूं न निंदा। वह मेरा मंतव्य नहीं है। मेरा मंतव्य सिर्फ यह है कि हम किसी प्रचार के प्रभाव में अपना स्वतंत्र चिंतन न खोएं और हर शासक के हर काम का निष्पक्ष दृष्टि से विश्लेषण करें। ह्वाट्सऐप,
हिरण दौड़ते वक्त अक्सर पीछे मुड़-मुड़कर देखता रहता है कि शेर कहां है। इससे उसकी गति कम हो जाती है और शेर थोड़ा और पास आ जाता है। अब शेर पास आता दिखा तो हिरण का आत्मविश्वास और कम हो जाता है, उससे उसकी गति पर और भी ज्यादा फर्क पड़ता है। आत्मविश्वास कम था,
शासन-प्रशासन में जनता की भागीदारी न होने का परिणाम यह है कि या तो अच्छे निर्णय ही नहीं होते और अगर कोई निर्णय अच्छा हो तो भी उसका कार्यान्वयन इस ढंग से होता है कि जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाता। होना तो यह चाहिए कि प्रशासनिक अधिकारी जिस विभाग या मंत्रालय से जुड़े