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श्रीराम शर्मा भगवान बुद्ध अकसर अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। एक दिन प्रातः काल बहुत से भिक्षुक उनका प्रवचन सुनने के लिए बैठे थे। बुद्ध समय पर सभा में पहुंचे, पर आज शिष्य उन्हें देखकर चकित थे क्योंकि आज पहली बार वे अपने हाथ में कुछ लेकर आए थे। करीब आने पर

श्रीश्री रवि शंकर योग का नियमित अभ्यास ऊर्जा के स्तर को उच्च रखता है और साथ ही व्यक्ति के उत्साह को भी बढ़ाता है। हम अपने स्पंदनों के माध्यम से बहुत कुछ प्रकट करते हैं। योग हमारे स्पंदनों को सकारात्मक और आकर्षक बनाता है। हम सब का यह उत्तरदायित्व है कि हम यह सुनिश्चित करें

राजा ने तुरंत कुछ चुने हुए सिपाहियों को तैयार होने के लिए कहा व सूखी घास के गट्ठरों का प्रबंध करने का आदेश दिया। राजा खुद इतना अचंभित था कि वह स्वयं भी साथ जाने को तैयार हो गया। गुफा के मुहाने पर पहुंचकर राजा और दर्जी दबे पांव गुफा के भीतर गए। राजा के

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव ऊपरी तौर पर खुशी है, पर कहीं गहरे में, हर चीज में, अंदर एक पीड़ा है, कोई दुख है। ये दुख सिर्फ  इसीलिए है कि इस दबे हुए जीव को हमेशा एक गहरी चाह है। पर, इस दुख के बारे में जागरूक होने में भी लोगों को कई जन्मों का समय लग

जैसे ही मंदराचल पर्वत को समुद्र में उतारा गया, वह अपने भार के बल से सीधा सागर की गहराइयों में डूब गया और अपना घमंड प्रदर्शित किया। तब असुरों में बाणासुर इतना शक्तिशाली था कि उसने मंदराचल पर्वत को अकेले ही अपनी एक हजार भुजाओं में उठा लिया और सागर से बाहर ले आया। इससे

श्रीश्री रवि शंकर योग का नियमित अभ्यास ऊर्जा के स्तर को उच्च रखता है और साथ ही व्यक्ति के उत्साह को भी बढ़ाता है। हम अपने स्पंदनों के माध्यम से बहुत कुछ प्रकट करते हैं। योग हमारे स्पंदनों को सकारात्मक और आकर्षक बनाता है। हम सब का यह उत्तरदायित्व है कि हम यह सुनिश्चित करें

शृणु देवि, प्रवक्ष्यामि भैरवस्य महात्मनः। आपदुद्धारक स्येह नामाष्टशत मुत्तमम्। सर्वपापहरं पुण्यं सर्वापद्वि निवारणम्।। सर्वकामार्थदं देवि, साधकानां सुखावहम्। सर्व मंगल मांगल्यं सर्वोपद्रव नाशनम्।। बृहदारण्यको नाम ऋषिर्देवोअथ भैरवः। नामाष्टशतकस्याअस्य छंदोअनुष्टप् प्रकीर्तितम्।। अष्टाबाहुं त्रिनयनमिति बीजम् समीरितम्। शक्तिः कं कीलकं शेषमिष्टसिद्धौ नियोजयेत्।। ओउम रुद्राय नमः (अंगुष्ठयोः)। ओउम शिखीमखाय नमः (तर्जन्योः)… -गतांक से आगे… मंत्र ओउम ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… अरोग्य और धन में रखा ही क्या है? धनी से धनी मनुष्य भी अपने धन के थोड़े से अंश का ही उपभोग कर सकता है। हम संसार की सभी चीजें प्राप्त नहीं कर सकते। जब हम उसे प्राप्त नहीं कर सकते तो क्यों हमें उसकी चिंता में डूबे रहना चाहिए?

जीवन एक वसंत/शहनाज हुसैन किस्त-60 सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर करीमबॉय ने अपनी