मैगजीन

श्मशान में जाकर साधना करने का अभिप्राय भी यही है। यदि मन सांसारिक माया-मोह से एकबारगी हट जाए तो दूसरी ओर लग जाता है। यदि साधक को श्मशान उपलब्ध न हो सके तो किसी शिव मंदिर या काली मंदिर में जाकर साधना कर सकता है। यदि यह भी संभव न हो सके तो पहले दिन

दानवों को पता चला कि उनके भांजे रावण ने अकेले ही स्वर्ग में सभी देवताओं को परास्त कर दिया, तीनों लोकों में इस बात का पता चला और इस बात से दानव बहुत खुश हो गए। उनकी वर्षों की मनोकामना पूर्ण हो गई और दानवों ने रावण की जय-जयकार की और रावण को अपना राजा

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… प्राध्यापक महोदय का जीवन प्राचीन भारत के ऋषियों की चिंताराशि के प्रति सहानुभूति जाग्रत तथा उसके प्रति लोगों के विरोध एवं घृणा को नष्ट कर श्रद्धा उत्पन्न करने के दीर्घकाल में संपन्न होने वाले कार्य में ही संलग्न था। मैंने उन्हें एक भाषातत्वविद अथवा पंडित के रूप में नहीं देखा,

बाबा हरदेव महापुरुष हर पल अपने जीवन में साधसंगत को महत्ता देते है। कोई भी मौका हो, आपके लिए सबसे पहले साधसंगत का सहारा है। साधसंगत का मिलाप ही है जो जीवन की नैया को डोलने से बचाता है। निरंतर गुरमुख इस साधसंगत की अपने मन में  कद्र बना कर रखते हैं। कद्र वही जान

जीवन एक वसंत/शहनाज हुसैन किस्त-72 सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर करीमबॉय ने अपनी

ओशो भारतीय ध्यान में उतरना नहीं चाहता, क्योंकि उसे यह ख्याल है, वह जानता ही है ध्यान क्या है। दूसरा अगर उतरने को भी राजी होता है, तो दो दिन में ही आकर खड़ा हो जाता है कि अभी तक नहीं हुआ। और उसे बेचैनी होती है कि पश्चिम से आए लोगों को हो रहा

श्रीराम शर्मा समय हमारे साथ हर पल रहता है, हर क्षण रहता है, इस समय को भूल जाते हैं, लेकिन समय हमें नहीं भूलता। निश्चित समय पर समय हमारा साथ छोड़कर चला जाता है, यही मृत्यु है, समय का अंत है। समय का प्रारंभ होता है हमारे जीवन से और अंत होता है हमारी मृत्यु

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव जो शक्ति सृजन (रचना) करती है, वह अपनी रचना से गायब नहीं हो सकती, लेकिन वह बड़ी कुशलता से खुद को तब तक छिपाने में कामयाब रहती है, जब तक कि आप उसका नकाब हटाने की कोशिश नहीं करते। तो जिसे आप ‘आध्यात्मिक प्रक्रिया’ कहते हैं, वह महज उस ईश्वर पर पड़े

18 अप्रैल रविवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, षष्ठी, स्कंद षष्ठी व्रत 19 अप्रैल सोमवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, सप्तमी 20 अप्रैल मंगलवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, अष्टमी, दुर्गाष्टमी 21 अप्रैल बुधवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, नवमी, रामनवमी, नवरात्र समाप्त 22 अप्रैल बृहस्पतिवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, दशमी, नवरात्र पारणा 23 अप्रैल शुक्रवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, एकादशी, कामदा एकादशी व्रत 24 अप्रैल शनिवार, वैशाख, शुक्लपक्ष, द्वादशी, शनि