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स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… राष्ट्रीय जीवन संगीत के विभिन्न स्वर प्रत्येक राष्ट्र की अपनी अलग कार्य प्रणाली होती है। कुछ राजनीति के माध्यम से कार्य करते हैं तो कुछ सामाजिक सुधारों के माध्यम से और अन्य इससे भी भिन्न मार्गों से। हमारे लिए धर्म का ही एकमेव मार्ग खुला है। अंग्रेज धर्म को राजनीति

श्रीश्री रवि शंकर महर्षि वशिष्ठ द्वारा राम को ‘योग वशिष्ठ’ का ज्ञान दिया गया था। यह इस धरती पर अब तक किए गए सर्वाधिक अद्भुत कार्यों में से एक है! आप में से कितने लोगों ने इसे पढ़ा है? जिन्होंने भी अब तक नहीं पढ़ा है, उन्हें जरूर पढ़ना चाहिए। हो सकता है आपको ये

बाबा हरदेव गतांक से आगे… गुरमुख महापुरुष जहां बीच में आ जाता है, वहीं पर शीतलता हो जाती है। आगे इस अग्नि को बढ़ने के लिए कोई रास्ता ही नहीं मिलता। शायद इसलिए संसार के लोग महापुरुषों को अपने रास्ते की रुकावट मानते हैं।  वो मानते हैं कि ये प्रेम की मानवता की बातें करते

ओशो मुझे लगता है जीवन यात्रा में मैं स्वभाव से बहुत दूर निकल आया हूं। तो क्या स्वभाव में वापस लौटने की, प्रतिक्रमण की यात्रा भी इतनी ही लंबी होगी? या उसमें कोई शर्टकट भी संभव है? शार्टकट तो बिलकुल भी संभव नहीं है और दूसरी बात और ख्याल से समझ लें, यात्रा इतनी लंबी

दक्षिण भारतीय परंपरा में यह मंदिर शक्तिपीठ या देवी पीठ माना गया है। गर्भगृह में माता कालिका की मूर्ति मुखाकृति के रूप में विराजित है। ऐसे भयानक रूप वाली आदि माता हंसती हुई दिखाई देती है। गढ़कालिका की मूर्ति के आसपास माता महालक्ष्मी व माता सरस्वती भी विराजित हैं… मध्यप्रदेश के उज्जैन के कालीघाट स्थित

स्वामी रामस्वरूप श्लोक 17 में भ्रमित हुए अर्जुन ने योगेश्वर श्रीकृष्ण महाराज से यह प्रश्न कर दिया कि ‘हे कृष्ण! मैं तुमको सदा चिंतन करता हुआ कैसे जानूं? अर्थात मैं तुम्हारे किन-किन गुणों का धारणा, ध्यान आदि में बैठकर चिंतन करूं, जिससे मैं तुम्हारे इन गुणों को जान जाऊं… गतांक से आगे… श्लोक 10/4, 10/5

श्रीराम शर्मा महाभारत की समाप्ति के उपरांत पांडवों ने एक महान यज्ञ किया। कहते हैं कि वैसा यज्ञ उस जमाने में और किसी ने नहीं किया था। गरीब लोगों को उदारतापूर्वक इतना दान उस यज्ञ में दिया गया था कि उनके घर सोने से भर गए। एक नेवले ने जब इस प्रकार के यज्ञ का

* ब्रहांड की सभी सार्थक शक्तियां तभी तुम्हारे साथ हो सकती हैं, जब तुम मन, हृदय और वचन से स्वच्छ हो * लफ्ज और उनको बोलने का लहजा ही होते हैं इनसान का आईना, शक्ल का क्या है, वो तो उम्र और हालात के साथ अकसर बदल जाती है * इस प्रकार जिएं कि आपको

17 अक्तूबर रविवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, द्वादशी, संक्रांति 18 अक्तूबर सोमवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, त्रयोदशी, प्रदोष व्रत 19 अक्तूबर मंगलवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, चतुर्दशी, शरद पूर्णिमा व्रत, कार्तिक स्नान 20 अक्तूबर बुधवार, कार्तिक, शुक्लपक्ष, पूर्णिमा, पंचक समाप्त 21 अक्तूबर बृहस्पतिवार, कार्तिक, कृष्णपक्ष, प्रथमा 22 अक्तूबर शुक्रवार, कार्तिक, कृष्णपक्ष, द्वितीया 23 अक्तूबर शनिवार, कार्तिक, कृष्णपक्ष, तृतीया