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प्राचीन काल के ऋषियों-मुनियों ने स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए सूखे मेवों को उपयोगी बताया है। सूखे मेवे मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के तनावों को कम करते हैं और सर्दी के मौसम में ये और भी फायदेमंद होते हैं। इनका सही मात्रा में प्रयोग न केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है,

गतांक से आगे…. भर्थरी की किस्मत में राजयोग था। वह अपने सारे साथियों को इकट्ठा करके खुद राजा बनता और राजाओं की तरह ही दरबार में रौब के साथ रहता। ‘‘ जैसी हो संगति, वैसी उपजे बुद्धि’’ वाली कहावत प्रसिद्ध है। एक दिन लकड़ी के घोड़े पर सवारी करते समय भर्थरी हो-हो करते हुए मुंह

साढ़े बारह वर्षों में कुल 84 दिन महावीर ने भोजन किया। वह भी एक बार दिन में। इनके द्वारा सहन किए गए कष्टों के कारण इंद्र ने ही इनका नाम वर्द्धमान महावीर रखा। इन्होंने अपने जप, तप तथा प्रभुकृपा से अनेक सिद्धियां प्राप्त कर लीं। उन्होंने 4400 विद्धानों को वेदों का यथार्थ अर्थ समझाया। चारों

स्वामी रामस्वरूप श्रीराम, श्रीकृष्ण, सीता, मदालसा आदि का यश संसार विदित है। पूर्व काल में ऐसी असंख्य विभूतियों का यश, वेदाध्ययन, यज्ञ एवं योगाभ्यास के पश्चात ही फैला था, आज भी हमें सत्य पर चलकर उन्हीं की भांति इंद्रिय संयम, वेदाध्ययन, योगाभ्यास, यज्ञ तथा गृहस्थ के शुभ कर्म करते हुए यश प्राप्त करना चाहिए… गतांक

कामकाजी लोग न तो खुद को समय दे पाते हैं और न ही अपने बच्चों के लिए उन्हें ज्यादा वक्त मिल पाता है। ऐसे में कब हमारे शरीर में विटामिन की कमी के लक्षण उभरने लगते हैं, इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई बार ये छोटी-छोटी समस्याएं ही आगे चलकर बड़ी हो जाती

*     याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है *       एक राष्ट्र की संस्कृति उसमें रहने वाले लोगों के दिलों में और आत्मा में रहती है *     मनुष्य की धार्मिक वृत्ति ही उसकी रक्षा करती है *      जैसे सोना अग्नि में चमकता है, वैसे ही

– डा. जगीर सिंह पठानिया, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, आयुर्वेद, बनखंडी द्राक्षा या दाख औषधि के रूप में द्राक्षा का पौधा बेलनुमा होता है जिसे कृत्रिम सहारा तन वगेरा बना कर उस पर चढ़ाया जाता है। यह विशेष रूप से उत्तर पश्चिम भारत पंजाब, कश्मीर तथा बलूचिस्तान तथा अफगानिस्तान में होता है। इसका बोटेनिकल नाम वाइटिस विनिफेरा

*  अजवायन और नमक के साथ हींग का सेवन करने से पेट की ऐंठन ठीक हो जाती है। *  तिल के तेल में हींग को पकाकर ठंडा करके उस तेल की बूंदों को कान में डालने से दर्द समाप्त हो जाएगा। *  चेहरे पर जैतून के तेल में विटामिन ई मिला कर मालिश करने से

पुरातन काल की कथा है कि भगवान श्रीवेदव्यास जी महाराज के शिष्य एवं परम  पौराणिक श्रीसूतजी महाराज श्री गंगाजी और कालिंदी के संगम स्थल पर श्रीशंकर भगवान की नगरी में त्रिभुवनपति श्रीशिवजी की घोर तपस्या में लीन थे। उसी समय वहां पर महर्षि शौनकजी अपने साथ अनेक ऋषियों सहित पधारे। वे श्रीसूतजी महाराज को शिवकी