वैचारिक लेख

कर्नल (रि.) मनीष धीमान स्वतंत्र लेखक भारतीय सेना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, जो आजादी के बाद विदेशी मुल्कों के आक्रमण का समय-समय पर मुंहतोड़ जवाब देती रही है, पर सेना की ताकत मात्र उसकी संख्या ज्यादा होने तक ही निर्भर नहीं रहती बल्कि सेना के पास आधुनिक हथियारों का होना भी अति

क्षणिक लाभ के लिए आदमी लोभ की वृत्ति से ग्रसित हो जाता है और उसके कारण उसका सांसारिक और गृहस्थ जीवन प्रभावित होता है। मनोविकारों पर नियंत्रण पाना ही सबसे बड़ी साधना है… देशभर में दशगुरु परंपरा के नवम गुरु श्री तेगबहादुर जी की चार सौवीं जयंती मनाई जा रही है। उनकी जन्मसाखी में एक

पूरन सरमा स्वतंत्र लेखक रहीम दास जी की बात मानकर मैं चार साल से चुप बैठा हुआ था। लेकिन अब मुझे लग रहा है कि चुप बैठना घाटे का सौदा है। रहीम दास जी को अब कन्टीन्यू किया तो न मैं घर का रहूंगा न घाट का, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और सारे ही राजनीतिक

यही कारण है कि भारत का खेल मंत्रालय व कई राज्य भी अपने यहां हाई परफॉर्मेंस प्रशिक्षण केन्द्र खोलने पर जोर दे रहे हैं तथा वहां पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करवाने वाले प्रशिक्षकों को अनुबंधित कर रहे हैं।  खेलो इंडिया, गुजरात व पंजाब के उच्च खेल परिणाम दिलाने वाले प्रशिक्षण केन्द्रों की तरह ही हिमाचल प्रदेश

विभिन्न संशोधनों के बाद हमारे संविधान में ऐसी खामियां आ गई हैं कि यदि प्रधानमंत्री के पास संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हो और आधे राज्यों में उनकी समर्थक सरकारें हों तो वे चाहें तो सुप्रीम कोर्ट को हमेशा के लिए ख़त्म कर दें, चुनाव आयोग को ख़त्म कर दें, संसद को ख़त्म

पर्यटकों को लुभाने के लिए पहाड़, नदियां, जंगल, डैम, चिडि़याघर, मंदिर, नामी शहर, खजियार झील, बीड़-बिलिंग जैसे पैराग्लाइडिंग स्थल भी यहां हैं। इसके बावजूद हम लोग न तो युवाओं को रोजगार से जोड़ पाए और न ही सरकारों का खाली खजाना भरने में कामयाब बन पाए हैं। हैरानी की बात यह है कि विदेशी लोग

सुरेश सेठ [email protected] ‘भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में इश्क की एक हकीकत नहीं, कुछ और भी है।’ अपने चाक दामन और दागदार उजाले में जिस शायर ने हमें यह सुनाया, बेशक वह साहिर लुधियानवी नहीं थे। आजकल मुर्दा इश्क की छांव में कोई उजाला दाग़दार नहीं होता। बल्कि अब तो लगता

यकीनन इस समय बच्चों को अतिरिक्त पढ़ाई करने की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप एक स्टडी प्लान बनाएं। मसलन, बच्चा पूरे दिन में कितनी देर पढ़ाई करेगा और उसे कितनी देर का ब्रेक लेना है। एक बार में वह कितने पार्ट को कवर करेगा, इन सबकी प्लानिंग पहले ही कर

जब तक देश में सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं हो जाता, इस वर्ग को आरक्षण की सुविधा मिलती रहेगी। देश में न्याय, सौहार्द, समानता कायम कर ही डा. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है… मनुष्य के जीवन की हर चुनौती वह चाहे सामाजिक, सांस्कृतिक या फिर आर्थिक क्षेत्र हो, का सामने करने में