वैचारिक लेख

माना उसकी बीवी संुदर है, लेकिन इतनी भी नहीं कि बाजार जाने से खतरा पैदा हो, लेकिन कई दिनों से उसने पति को शिकायत कर रखी है कि वह सब्जी लेने नहीं जाएगी। उसे सब्जियों से फोबिया हो गया है। जब भी वह सब्जी बाजार जाती है, कोई न कोई सब्जी उसके साथ अश्लील व्यवहार

आज एक साहित्यिक समारोह में जालंधर हूं और सोच रहा हूं कि कोरोना के बाद संभवतः यह पहला साहित्यिक समारोह है जिसमें भाग लेने पहुंचा हूं। डेढ़ दो साल तो सारी गतिविधियां बुरी तरह कोरोना ने लील ली थीं और इसीलिए सन् 2020 में कोई बड़ा साहित्यिक आयोजन नहीं हुआ । यहां तक कि हरियाणा

कृषि प्रणाली को रीडिजाइन करने, बाजार को किसानों के नजदीक लाने और एक ऐसी खाद्य वितरण प्रणाली का विकास करने की आवश्यकता है जो परिवार को पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराए। लेकिन इसे हासिल करना उन लोगों के बूते के बाहर है जिन्होंने कृषि को संकट में डाल रखा है। हमें नए सिरे से शुरुआत करनी

संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे। संविधान के निर्माण में 15 नामी-गिरामी व आजादी के आंदोलन से जुड़ी महिलाओं ने दूरदर्शी व दूरगामी सुझाव देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।  दुर्भाग्य यह है कि नारी को वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह हकदार है… देश भर में 26 नवंबर को संविधान दिवस बड़े

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को देश तथा किसानों से माफी मांगते हुए वापस लेने का फैसला कर दिया है, पर फिर भी किसान संगठन प्रधानमंत्री जी की बात पर विश्वास नहीं कर रहे। उनका मानना है कि जब तक यह बिल संसद में निरस्त नहीं होते, तब तक वे आंदोलन बंद

अब पाकिस्तान ने इसमें ड्रोन का खेला भी शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने सीमांत इलाक़ों में सीमा सुरक्षा बल के कार्य क्षेत्र की सीमा पचास किलोमीटर तक बढ़ा दी है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि यह कार्य क्षेत्र बढ़ाया जाए क्योंकि इससे उसे अपनी योजनाओं को पूरा करने में दिक्कत होती है। लेकिन सिद्धू

हमारे यहां कुछ स्तरीय विद्यालयों में फिटनेस कार्यक्रम तो हैं, मगर शारीरिक क्षमताओं को नापने के लिए कोई परीक्षण नहीं है। इस सबके लिए विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सामान्य फिटनेस का मूल्यांकन कर उसमें सुधार के लिए सुझाव देकर ‘फिटनेस मूल्यांकन व सुझाव’ कार्यक्रम की शुरुआत जल्द ही करनी चाहिए… कोरोना महामारी के भयानक

प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद यदि मुझे पुरस्कार मिल जाए तो मेरे लिए अत्यंत हर्ष की बात होगी। परंतु यह हर्ष नितांत मेरा होगा। काश ! इसमें मेरे समानधर्मा साहित्यकार और सगे-संबंधी भी शामिल होते। वैसे साहित्य सेवा करते हुए मुझे तीस वर्ष का लंबा समय बीत गया है, अतः कोई भी संस्था-अकादमी चाहे तो मुझे

तब उन्होंने अपना निश्चय फिर दोहराया, अपनी फिटनेस पर फोकस किया, खेल के लिए और मेहनत की और ज्यादा अच्छा खेलना शुरू किया। सन् 2011 विश्व कप मैच के दौरान सचिन की बेहतरीन फार्म के बावजूद शुरुआती असफलताएं मिलीं। तब सचिन ने पहली बार अपने साथी खिलाडि़यों को झिड़का भी और प्रेरित भी किया। परिणाम