वैचारिक लेख

पूरन सरमा, स्वतंत्र लेखक मान लिया झूठ बोलना पाप है, परंतु यह बात आज तक समझ में नहीं आई कि लोग क्योंकर क्षण-क्षण में यह पाप करते हैं? एक बार मैंने झूठ बोला तो मेरे बच्चे ने मुझे टोक दिया-‘पापा, झूठ बोलना पाप होता है।’ मैं मन-ही-मन बड़ा हंसा। सोचा बच्चा है, बड़ा होगा तब पता

देश को गरीबी के गर्त से निकालने के लिए यह आवश्यक है कि बचपन से ही बच्चों को उद्यमिता का पाठ पढ़ाया जाए, उद्यमिता के गुरों की जानकारी दी जाए, प्रतियोगिता को समझने और प्रतियोगिता के बावजूद अपने लिए नई पोज़ीशनिंग ढूंढने की कला किसी व्यवसाय की सफलता की गारंटी है। सवाल सिर्फ  यही है

सरकार से तो यही अपेक्षा है कि जिला के खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए, विशेषकर शिक्षा, कृषि, बागवानी, चिकित्सा विभागों में… आकांक्षी जिला चंबा हिमाचल का सबसे पिछड़ा जिला है। हिमाचल में क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा जिला होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। रावी, स्यूहल, चक्की,

सुरेश सेठ [email protected] एक दिन जिस तरह एक चेहरा विहीन वायरस के भय से सब कुछ बंद करके इस भीड़ भरे देश को एक मौन सन्नाटे में धकेल दिया गया, उसी तरह अब इस सन्नाटे को तोड़ने की आवाज़ हो रही है। अंधेरा तब भी था, अभी तो शायद कुछ और गहरा हो गया। इस

जाहिर है भारत इस पहलू में भी काफी पीछे है। भारत में जो स्कूल हैं, उनकी ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, फिनलैंड आदि के स्कूलों से तुलना नहीं की जा सकती। भारत को अभी शिक्षा पर बहुत ज्यादा निवेश करने की आवश्यकता है। अगर शिक्षा में निवेश नहीं बढ़ता है तो इस क्षेत्र में भारत पिछड़

अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे कि एमनेस्टी इंटरनेशनल व एशिया वॉच इत्यादि संस्थाएं विश्व स्तर पर हल्ला मचाना शुरू कर देती हैं। इन संस्थाओं को इन शैतानों के अधिकारों की चिंता ज्यादा रहती है तथा सैनिक जो खून से लथपथ होकर इनका सामना करते-करते शहादत पा लेते हैं, उन पर उनका ध्यान नहीं जाता… मानव अधिकारों की

हर श्रेणी के जनसेवक के हर प्रकार के चुनावी प्रचार के लिए पहली शर्त होते हैं धांसू पोस्टर! उसके बाद दारु, फिर नोट। फाइनली वोट। चुनावी पोस्टर कमिंग सून जनसवेक की जनता से शौचालयों तक की दीवारों पर चिपक इंट्रो करवाता है। गालियां देती जनता के आगे दोनों हाथ जोड़े मुस्कुराता है। हर जनसेवक जानता

हिमाचल में कुछ जगह पंचायत चुनाव हो गए हैं और कुछ जगह अभी होने हैं। धीरे-धीरे सब परिणाम भी आ ही जाएंगे। एक-एक पद, जिनके लिए उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी, उनकी हार-जीत का फैसला जनता कर रही है। पंचायत चुनाव में सभी उम्मीदवार और मतदाता एक ही गांव के होते हैं। ऐसे

ऐसा करने से एक तरफ  किसान को पानी का मूल्य अदा करना पड़ेगा तो दूसरी तरफ  किसान को मूल्य अधिक मिलेगा और उसकी भरपाई हो जाएगी। लेकिन तब हम आप शहरी जनता को महंगा अनाज खरीदना पड़ेगा। इसलिए अंततः प्रश्न यह है हम सस्ते अनाज के पीछे भागेंगे अथवा प्रकृति को संरक्षित करते हुए थोड़ा