अब भी खेल विभाग बेपरवाह क्यों बना है

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं खेल छात्रावासों के खिलाडि़यों के प्रदर्शन में गिरावट आई है। खेल परिणामों के निरीक्षण के लिए कोई भी कार्यक्रम युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के पास नहीं है। खेल विभाग के प्रशिक्षक केंद्रों…

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की खेल यात्रा

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं अगर सही प्रबंधन हो तो प्रदेश के महाविद्यालय आज अच्छे खिलाड़ी देश को दे सकते हैं। जहां खेल छात्रावास हैं, वहां पर अगर शारीरिक शिक्षा का स्नातक कोर्स शुरू कर दिया जाता है, तो जहां…

हिमाचल एथलेटिक : पहले, अब और भविष्य में

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं हिमाचल में बिलासपुर, शिलारू तथा सावड़ा में भी सिंथेटिक टै्रक बिछ रहे हैं। बिलासपुर में तो कुछ महीनों में ही सिंथेटिक पड़ जाएगा। शेष कार्य पूरा हो चुका है। आज राज्य में विश्व स्तरीय…

प्रतिभाओं को बचपन में ही तलाशना होगा

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं प्राथमिक विद्यालयों से ही बच्चों की शारीरिक फिटनेस को अनिवार्य रूप से मुद्दा बनाकर इस पर आवश्यक रूप से काम शुरू कर देना चाहिए, तभी हमें भविष्य के फिट नागरिक व अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे...…

विश्वविद्यालय एथलेटिक प्रतियोगिता 2018

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं हमें अपने भविष्य के स्टार धावकों के लिए बिना भेदभाव के मंच उपलब्ध करवाना होगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय खेल परिषद को भविष्य में ध्यान देना होगा कि उसकी खेल प्रतिभाओं को इस तरह का खेल…

जरूरी है खेल कैलेंडर के लिए समन्वय

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं बच्चों को खेलों में भी भाग लेने के लिए उचित अवसर चाहिए होता है। आज जब खेल संघ, खेल  विभाग तथा स्कूली क्रीड़ा परिषद अपने-अपने स्तर पर इन खिलाडि़यों के लिए विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएं…

बचपन से किशोरावस्था के बीच खेल शुरुआत

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं किस तरह अधिक से अधिक बच्चों को एथलेटिक्स में जोड़ना है, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक महासंघ ने किड एथलेटिक्स कार्यक्रम शुरू किया है। इससे बच्चों में एथलेटिक्स के प्रति शौक जागेगा और…

महाविद्यालय स्तर पर खेल विंग कब तक ?

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं जिन-जिन महाविद्यालयों में जिस-जिस खेल की सुविधा है, वहां पर उस खेल का विंग चला देना चाहिए। इससे जहां खिलाड़ी को वैज्ञानिक ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षक मिलेगा, वहीं पर…

पदक विजेताओं का सम्मान कब ?

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं शिक्षा संस्थान खिलाड़ी विद्यार्थी को उसकी पढ़ाई के साथ-साथ उसके खेल के लिए यदि सहायता करते हैं, तो वह भविष्य का विजेता बनकर देश को गौरव दिला सकता है। इसी तरह जब खिलाड़ी नौकरी में आ जाता…

स्वास्थ्य के बिना शिक्षा अधूरी है

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं आज जब विद्यार्थी को विभिन्न प्रकार के नशे तथा मोबाइल का गुलाम होने से बचाना है, तो वैज्ञानिक समाधान किसी फिटनेस के विशेषज्ञ से हर विद्यालय को अपने यहां शुरू करवाना होगा, ताकि हर…

कब खेल मैदान में पहुंचेगी शारीरिक शिक्षा

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं बिना खेल मैदान व अन्य खेल सुविधाओं के विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को हम शिक्षण के कमरे से बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो सके हैं। अधिकांश विद्यालयों के पास खेल मैदान न होने के कारण…

एशियाई खेलों में भारतीय संतानें

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं भारतीय दल में कुल 572 खिलाड़ी इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। इनमें से एक दर्जन हिमाचली भी हैं। यह आज तक की सबसे अधिक हिमाचली खिलाडि़यों की भागीदारी है। इस बार भारत…

खेल परिषद की बैठक से उपजी संभावनाएं

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं सरकार को भी चाहिए कि वह खेलों के लिए विश्वविद्यालय को अलग से अनुदान जारी करे, क्योंकि प्रदेश के लगभग 95 प्रतिशत युवा खिलाड़ी महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय से ही होते हैं। इस वर्ष साहसिक…

पुलिस खिलाड़ी को प्रशिक्षण सुविधा कब तक

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं हिमाचल पुलिस में आज खिलाड़ी जवानों के प्रशिक्षण व अन्य खेल सुविधाओं का कोई प्रबंध नहीं है। उच्च स्तरीय खेल परिणाम प्राप्त करने के लिए पूरा वर्ष लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम कई वर्षों तक…

खेलो इंडिया तक हिमाचली बालाएं

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं अब भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया नामक योजना के अंतर्गत प्रतिभा खोज से चयनित लगभग एक हजार किशोर खिलाडि़यों को विभिन्न खेलों के लिए हर वर्ष चिन्हित कर, उन्हें अगले आठ वर्षों…