हैंडबाल का हिमाचल चैंपियन

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने अंतर विश्वविद्यालय खेलों में अखिल भारतीय स्तर पर अपना पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक तो भवानी अग्निहोत्री के द्वारा 1980 में ही जीत लिया था, मगर टीम स्पर्धा…

राष्ट्रगान सम्मान की अस्पष्ट नीति

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि कोई भी ऐसा कानून नहीं है जो राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाता हो। अगर राष्ट्रगान बजने के दौरान कोई इसे गाता नहीं है, तो यह अपराध नहीं है। परंतु कोर्ट ने राष्ट्रगान के दौरान…

निर्भीक सैन्य निष्ठा को नमन !

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, घुमारवीं, बिलासपुर से हैं किसी देश की ताकत उसकी सेना होती है। सेना मजबूत होगी, तो दुश्मन भी उस देश की तरफ आंख उठाने से पहले सौ बार सोचेगा। हमारा देश तो 15 अगस्त, 1947 को आजाद हो गया, पर हमारी सेना को असल…

राजनीतिक भीख नहीं तपोवन सत्र

सुरेश कुमार लेखक, योल, कांगड़ा से हैं माननीय विधायक अगर वाकआउट करें, तो खर्च का हिसाब लगाना वाजिब है, लेकिन सदन में सत्र के दिन बढ़ें तो लोकतांत्रिक प्रासंगिकता बढ़ती है। अतः तपोवन में विधानसभा का ताप बढ़ाने के लिए सत्र की अवधि में…

हत्याकांड को दंगा बताने की साजिश

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं सिख समुदाय के सदस्यों को अमानवीय तरीके से मारा जाता रहा और उनको मारने वाले उन्मादी उस वीभत्स कांड पर नाचते रहे। बहुत ही होशियारी और एक सोची-समझी साजिश के तहत इस हत्याकांड को हिंदू-सिख…

हिमाचली सियासत में नाटकीय बदलाव

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हिमाचली राजनीति में बड़ा बदलाव आया है, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। ऐसा बदलाव प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। भाजपा चुनाव जीत गई, लेकिन उसके लिए स्थिति…

विवेकानंद ने स्वाभिमान से जीना सिखाया

शांता कुमार लेखक, कांगड़ा-चंबा से सांसद हैं विश्व इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जहां किसी ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए घर-बार छोड़ दिया और फिर उसी मोक्ष को मातृभूमि की सेवा के लिए छोड़ दिया। ऐसे त्यागी और तपस्वी स्वामी विवेकानंद जी…

जनहित की हांडी में पकती सियासत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सरकारी नौकरियां बेरोजगारी दूर करने का सबसे घटिया साधन है। यदि आवश्यकता न होने पर भी सरकारी पदों की संख्या बढ़ा दी जाए और नए लोग भर्ती कर लिए जाएं, तो नए लोगों का वेतन, भत्ता और…

आवश्यक बदलाव से व्यावहारिक बने रूसा

डा. जोगिंद्र सकलानी लेखक, इक्डोल में राजनीति शास्त्र के सहायक प्राचार्य हैं सरकार ने मुकम्मल तैयारी के बिना ही रूसा को विद्यार्थियों और शिक्षकों पर थोप दिया। अतः ऐसी व्यवस्था जहां छात्रों को पढ़ाई से ज्यादा रोल नंबर लेने की चिंता हो,…

तकनीकी शिक्षा बनाम रोजगार सृजन

वीरेंद्र पैन्यूली लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं अब अधिकांश प्रथम स्तर के इंजीनियरिंग पासआउट छात्र-छात्राएं उच्च कोटी के प्रबंधन संस्थानों में स्पर्धा करके प्रबंधकीय सेवाओं में लगे होते हैं। तकनीकी छात्र ही सिविल सेवाओं में स्पर्धा करने…

हिमाचली शिक्षा ः कुछ अजूबा-कुछ अजीब

सुरेश कुमार लेखक, योल, कांगड़ा से हैं बड़े अधिकारी प्रदेश में शिक्षा की बेहतरी के लिए विदेशों का भ्रमण करके जानते हैं कि कौन सा मॉडल अपनाएं जिससे शिक्षा में गुणवत्ता आए। विदेश में घूमने से शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आएगी। इन शिक्षा…

सामाजिक दायित्वों का वहन करे बजट

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सोच है कि एक कर दर से विवाद कम होंगे, अर्थव्यवस्था सरल और गतिमान होगी। परंतु यह भूला जा रहा है कि यह गतिमानता रोजगार भक्षण की दिशा में होगी, न कि रोजगार सृजन की दिशा में। बजट…

सरकारी संवेदना के सूखे में दम तोड़ती कूहलें

प्रकाश चौधरी लेखक, पालमपुर, कांगड़ा से हैं कांगड़ा में कूहलों द्वारा सिंचाई का प्रश्न है, तो यह सिंचाई का एक बहुत ही सस्ता साधन है, लेकिन यहां कूहलों की स्थिति आज वैसी नहीं रही, जो वर्षों पहले कायम की गई थी। आज कृषि और बागबानी के…

ट्रंप के पाक को अशुभ संकेत

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं अपेक्षा की जा रही थी कि आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को ट्रंप के संदेश का भारत स्वागत करेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अमरीका ने भारत के उस दृष्टिकोण का समर्थन…

उपेक्षित चंबा को नए नजरिए से देखे सरकार

कुलभूषण उपमन्यु लेखक, हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष हैं कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण इस जिला को विशेष ध्यान देने की जरूरत थी, परंतु राजनीतिक अनदेखी का शिकार चंबा विकास की दौड़ में पिछड़ता चला गया। चंबा सभी सामाजिक-आर्थिक मानकों…