हिमाचल की छाती पर मूंग दल रहे पौंग बांध-BBMB
प्रदेश के 91 हजार लोगों की जमीन-जायदाद छीनने के बाद अब हर साल सैकड़ों गांवों को डुबो रहा डैम का पानी
पंकज शर्मा — इंदौरा
बांधों का निर्माण केवल और केवल विनाश ही लेकर आता है और इसे साबित किया है भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने। देश के बहुत बड़े रेगिस्तान को सींचने के लिए 1961 में केंद्र सरकार ने हिमाचल की छाती पर पौंग बांध के रूप में ऐसी चट्टान रखी, जो आज भी रक्त बहा रही है। प्रदेश की सबसे उपजाऊ हलदून घाटी और वहां खुशहाल जिंदगी जी रहे 91 हजार लोगों के ऐसे घर उजाड़े गए, जो आज तक बस नहीं पाए हैं। 28080 हेक्टेयर जमीन पर बांध बनाने से पूर्व केंद्र और अवसरवादी राजस्थान सरकार ने लोगों को विकास और पुनर्वास के जो सपने दिखाए थे, वे आज भी हजारों लोगों की नींद हराम कर रहे हैं। बता दें कि कुल 339 से अधिक गांव बांध के पानी में समा गए। इससे करीब 91 हज़ार लोग प्रभावित हुए थे। विस्थापितों को मुआवज़े के तौर पर राजस्थान में जमीन देने का वादा किया गया, लेकिन पुनर्वास की प्रक्रिया इतनी जटिल रही कि आज तक कई परिवार बसने का इंतज़ार कर रहे हैं। आज हालत यह है कि बीबीएमबी ने तानाशाही से 30 पंचायतों को पानी में डुबो दिया है। करोड़ों की धन-संपदा डूब गई है।
कई घर, पशुशालाएं और व्यावसायिक संस्थान या तो गिर गए हैं या कीचड़ में बर्बाद हो रहे हैं। बरसात में बीबीएमबी बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ता है। यह पानी हर साल फतेहपुर और इंदौरा में कहर बनकर टूटता है। बांध से बिजली उत्पादन पंजाब को जाता है, पानी राजस्थान की नहरों में बह जाता है और हिमाचल को मिलता है तो सिर्फ नुकसान और तबाही। यहां तक कि मंड क्षेत्र की जनता बार-बार आवाज़ उठाती रही कि ब्यास का तटीकरण हो और बीबीएमबी को अतिरिक्त नहर निर्माण कर पौंग के पानी को नियंत्रित करने का कोई स्थायी हल निकालना चाहिए, लेकिन सरकारें केवल वादे करके चुप बैठ जाती हैं। लोगों का आरोप है कि मंड क्षेत्र में क्रशर उद्योग खोलकर बची-खुची ज़मीन भी तबाह की जा रही है। पंजाब और हिमाचल, दोनों ओर से करीब 30 स्टोन क्रशर अवैध रूप से काम कर रहे हैं, जो दिन रात अवैध खनन कर रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि मंड क्षेत्र का दर्द न तो सरकारें समझ पाई हैं औ न ही बीबीएमबी प्रसाशन।
अरनी यूनिवर्सिटी पहुंची मानवाधिकार आयोग
हर साल हजारों बच्चों का भविष्य संवारने में जुटी अरनी यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक गतिविधियों पर पौंग ेसे छोड़े गए पानी ने विराम लगा दिया है। इस समय नए शैक्षणिक सत्र के साथ-साथ प्रवेश प्रक्रिया चरम पर होती है, परंतु सुरक्षा की दृष्टि से यूनिवर्सिटी ने ज्यादातर बच्चों को घर भेज दिया है। विश्वविद्यालय के चांसलर डा. विवेक सिंह ने बीबीएमबी के खिलाफ मानवाधिकार आयोग को शिकायत दी है। उनको पीड़ा है कि बीबीएमबी बिना सूचना के तो पानी छोड़ता ही है, परंतु उसके लिए वह 60 साल में कोई भी सुरक्षात्मक उपाय नहीं कर पाया है।
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