आस्था

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव जीवन को देखने का ये पूरी तरह से एक अलग स्तर है। आपमें ये योग्यता होनी चाहिए कि आप कुछ ऐसा देखें, जो दूसरे लोग न देख सकते हों। आपको ये देखना भी जरूरी है कि आप अभी जो कुछ भी हैं, क्या उसे छोड़ देने की योग्यता आपमें है। चाहे एक

श्रीराम शर्मा श्रद्धायुक्त नम्रता की तरह अंतरात्मा में दिव्य प्रकाश की ज्योति जलती रहे। उसमें प्रखरता और पवित्रता बनी रहे, तो पर्याप्त है। पूजा के दीपक इसी प्रकार टिमटिमाते हैं। आवश्यक नहीं उनका प्रकाश बहुत दूर तक फैले। छोटे से क्षेत्र में पुनीत आलोक जीवित रखा जा सके, तो वह पर्याप्त है। परमात्मा के प्रति

उसका घोड़ा तो दैत्य द्वारा पहले ही खाया जा चुका था। वह दौड़कर काफी दूर निकल गया और हांफने लगा। अब और दौड़ना उसके बस का काम नहीं था। वह वहीं बैठ गया तथा किसी की प्रतीक्षा करने लगा, जो उसे कुछ समय के लिए अपना घोड़ा उधार दे सके। उसे अधिक देर प्रतीक्षा नहीं

सर्द हवाओं के चलते ही हमारी दिनचर्या पूरी तरह से बदल जाती है। खाने से लेकर पहनने तक हर चीज को सोच समझकर इस्तेमाल करना पड़ता है। मगर इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गां के जीवन पर पड़ता है। हांलाकि सर्दी के मौसम में लगभग सभी उम्र के लोग प्रभावित रहते हैं, लेकिन इस मौसम में

हमारे ऋषि-मुनि, भागः 46 जैनधर्म के प्रवर्त्तक महावीर भगवान के एक अनुयायी थे, महर्षि मेतार्य। उन्होंने जैनधर्म के पांचों सिद्धांतों को स्वीकार किया तथा जीवन में पूरी तरह धारण भी किया। ये पांच सिद्धांत हैं अहिंसा, सत्य, अस्तेय, त्याग और ब्रह्मचर्य।   भिक्षा के लिए गए नगर में मेतार्य का जन्म एक शूद्र कुल में

* तिल के तेल में काली मिर्च को जलने तक गर्म करें, फिर ठंडा होने पर इस तेल को हल्के हाथों से लगाएं। इससे जोड़ों के दर्द से राहत मिलेगी। * एक गिलास पानी में नींबू का रस निचोड़ दें और इसी पानी में खीरे के पतले-पतले सलाइस काट कर डाल दें। इसके बाद इन

चकार संहिताः पञ्च शिष्येभ्य प्रददो च ताः। तस्य शिष्यास्तु ते पंच तेषां नामानि मे शृणु।। मुद्गलो गोमुखश्चैव वात्स्यश्शालीय एवं च। शरीरः पञ्चमश्चासन्मैधेय महामतिः।। संहितात्रितयं चक्रे शाकपूर्ण स्तथेतरः। निरुक्तमकरोत्तद्वेचच्तुर्थे मुनिसत्तम्। क्रोञ्चो वैतालिकस्तद्वद्बलाकश्च महामुनिः। निरुक्तकृच्च सुर्थोऽभद्वैदवेद्रांगपारंगः।। इत्येताः प्रतिशाखाभ्य हृनुशाखा द्विजोत्तम्। वाष्कलश्चापरा स्तिश्रस्संहिताः कृतवान्द्विज।। शिष्यः कालायनिर्गाग्सस्ततीयश्च कथाजः। इत्येते बहवृचाः प्रोक्ता यैः प्रवर्तिताः।। इसके पश्चात शाकल्य वेदमित्र ने उस

पानी हमारे शरीर की मूलभूत जरूरतों में से एक है। अकसर लोग तभी पानी पीते हैं, जब उन्हें प्यास लगती है। ये एक बड़ी गलती है, जो लंबे समय में आपकी सेहत को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकती है। सर्दियों में कम पानी पीने की आदत आपको कई बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार बना

शृणु देवि, महमंत्रमापदुद्धारहेतुमकम्। सर्वदुः खप्रशमनं सर्व शत्रु विनाशनम्।। अपस्मारादिरोगाणां ज्वरादीनां विशेषतः। नाशनं स्मृतिमात्रेण मंत्रराजमिमं प्रिये।। ग्रहराज भयानां च नाशनं सुखवर्धनम्। स्नेहाद् वक्ष्यामि ते मंत्रं सर्वसारमिमं प्रियम्।। प्रणवं पूर्व मुद्धृत्य देवी प्रणव मुद्धरेत्। बटुकायेति वै पश्चादापदुद्धारणाय च।। कुरुद्वयं ततः पश्चाद् बटुकाय पुनर्वतेत्। देवी प्रणव मुद्धृत्य मंत्रोद्धारमिमं प्रिये।। मंत्रोद्धारमिमं पुण्यं त्रैलोक्य चाअतिदुर्लभम्। अप्रकाश्यमिमं मंत्रं सर्वशक्ति समंवितम्।। स्मरणादेव