श्री मुथप्पन मंदिर

मुथप्पन मंदिर अथवा परस्सीनिकडवु मुथप्पन केरल के कन्नूर जिले में तालीपरम्बा से लगभग 10 किलोमीटर दूर वलपत्तनम नदी के किनारे पर स्थित एक हिंदू मंदिर है। मंदिर के प्रमुख देवता श्री मुथप्पन हैं, इन्हें तिरुवप्पन और वेल्लत्तम के पात्रों के रूप…

केशवरायपाटन मंदिर

केशवरायपाटन अनादि निधन सनातन जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रत नाथ जी के प्रसिद्ध जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र और भगवान केशवराय जी महाराज तथा भगवान विष्णु के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो राजस्थान के बूंदी जिले में चंबल नदी के तट पर…

मां भीमाकाली मंदिर

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां पर देवी-देवताओं के अनेक मंदिर हैं। यहां के लोग पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी-देवताओं को पूजते हैं तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्रदेश के हर जिले का हर मंदिर अपनी कोई न कोई…

सभ्यता और संस्कृति

श्रीराम शर्मा सभ्यता और संस्कृति इस युग के दो बहु चर्चित विषय हैं। आस्थाओं और मान्यताओं को संस्कृति और तदनुरूप व्यवहार, आचरण को सभ्यता की संज्ञा दी जाती है। मानवीय सभ्यता और संस्कृति कहें या चाहे जो भी नाम दें मानवीय दर्शन सर्वत्र एक ही हो…

विवेक चूड़ामणि

गतांक से आगे... जातिनीतिकुलगोत्रदूरगं नामरूपगुणदोषवर्जितम। देशकालविषयातिवर्ति यद ब्रह्म तत्त्वमसि भावयात्मनि।। जो जाति,नीति, कुल और गोत्र से परे है,नाम,रूप,गुण और दोष से रहित है तथा देश,काल और वस्तु से भी पृथक है तुम ही वही ब्रह्म हो।…

ज्ञान का द्वार

श्रीश्री रवि शंकर हम जो सृष्टि के बारे में जानते हैं वह बहुत ही छोटा है, जो हम नहीं जानते उसके मुकाबले में। जो हम नहीं जानते वह बहुत अधिक है और ध्यान उस अज्ञात ज्ञान का द्वार है। इस नए पहलू से हाथ मिलाइए। ध्यान हमें बहुत से लाभ देता है।…

जीवन का एक अंश

सद्गुरु जग्गी वासुदेव संस्कृत का एक श्लोक है ‘बालास्तवत क्रीड़ासक्तः अर्थात बच्चे की तरह खेल में आसक्त रहो। जब आप बच्चे थे तब आप का खेलकूद आप को पूरी तरह व्यस्त रखता था, आप का खेलकूद हर समय चलता रहता था। आप जब युवा हुए तो वो सब…

श्री गोरख महापुराण

गतांक से आगे... अपने सामने हुनमानजी को देखकर वह हड़बड़ा कर उठ बैठी और हनुमान जी को बैठने के लिए आसन दिया। रानी मैनाकिनी हनुमानजी के आगे हाथ जोड़कर बोली, प्रभु इस समय कष्ट उठाने का कारण। हनुमान जी बोले, जिसका भक्त संकट में हो उसे कैसे…

गुरु के बिना ज्ञान नहीं

ओशो दुनिया में तीन तरह के गुरु संभव हैं। एक तो जो गुरु कहता है गुरु के बिना नहीं होगा। गुरु बनाना पड़ेगा। गुरु बिन ज्ञान नहीं। यह सामान्य गुरु है। इसकी बड़ी भीड़ है और यह जमता भी है। साधारण बुद्धि के आदमी को यह बात जमती है क्योंकि बिना…

धर्म व दर्शन

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे... भाषण करते समय उन्होंने बीच में रुककर अपने श्रोताओं से पूछा इस सभा में कितने लोग ऐसे हैं जो हिंदू धर्म व शास्त्र के साथ भली प्रकार से परिचित हैं? वे लोग हाथ उठाएं। इस पर सात हजार लोगों में से तीन चार लोगों…

ऋषि गौतम

हमारे ऋषि-मुनि, भागः 21 कई हजार साल बाद गौतम ऋषि विश्व की सुंदरतम नारी अहिल्या को लेकर ब्रह्माजी के पास पहुंचे। बोले, आपकी धरोहर आपको लौटा रहा हूं। स्वीकार करें। ब्रह्माजी उनकी ईमानदारी,चरित्र तथा व्यवहार से बेहद प्रसन्न हुए। उनके संयम और…

घर में आयुर्वेद

यह झाड़ीनुमा पौधा होता है, जो की वर्षाऋतु के साथ अंकुरित होता है और हर जगह पाया जाता है। इसका बोटेनिकल नाम एसाईरेंथ्स एस्पेरा है। इसकी जड़, तना, पत्ते, फूल व फल पंचांग चिकित्सा में प्रयोग होते हैं... अपामार्ग या पुठकंडा के गुणः यह…

सृष्टि का सृजन

बाबा हरदेव जब विद्वान कहते हैं कि परमात्मा ने सारी सृष्टि का सृजन किया है, तो इसका एक बड़ा अर्थ है क्योंकि सृजन करने का अर्थ है कि परमात्मा को जगत का सृजन करने में कुछ मिलने अथवा न मिलने की इच्छा नहीं होती। परमात्मा को इससे कुछ उपलब्ध हो,…

फटे होठों से बचने के घरेलू उपाय

सर्दियों में वातावरण में नमी की वजह से होठों का फटना आम बात है, लेकिन फटे होंठ जहां चेहरे पर बदसूरती का एहसास कराते हैं, वहीं दूसरी और शारीरिक पीड़ा का कारण बनते हैं। नारियल तेल, ऑर्गन तेल पर आधारित होंठों के बाम तथा लिपिस्टिक के प्रयोग से…

फटे हाठों से बचने के घरेलू उपाय

यह तो हम सभी जानते हैं कि विटामिन डी हमारे शरीर के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। इसके जरिये न सिर्फ शरीर में आवश्यक तत्त्वों की पूर्ति होती है, बल्कि यह अन्य तत्त्वों को भी शरीर से विघटित होने में मदद करता है। सूर्य की किरणें विटामिन डी…