आस्था

दुर्गाष्टमी का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गाष्टमी व्रत किया जाता है, इसे मासिक दुर्गाष्टमी भी कहते हैं। इस दौरान श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और उनके लिए पूरे दिन का व्रत करते हैं। मुख्य दुर्गाष्टमी, जिसे महाष्टमी कहा जाता है, आश्विन

-गतांक से आगे… औगुन मोर क्षमा करु साहेब। जानिपरी भुज की प्रभुताई।। भवन आधार बिना घृत दीपक। टूटी पर यम त्रास दिखाई।। काहि पुकार करो यही औसर। भूलि गई जिय की चतुराई।। गाढ़ परे सुख देत तुम्हीं प्रभु। रोषित देखि के जात डेराई।। छाड़े हैं माता पिता परिवार। पराई गही शरणागत आई।। अनुमान बिना नहीं

पौराणिक काल से बजरंगबली का नाम चमत्कारों से जुड़ा हुआ है। देश में विभिन्न स्थानों पर हनुमानजी के कई मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हनुमान जी का प्राचीन मंदिर। यह एकमात्र मंदिर है, जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां कई ऐसे देवी-देवताओं के स्थल स्थित हैं और उनकी महत्ता से संबंधित जो भी प्राचीन आख्यान उनसे जुड़े हुए हैं, लोक वाणी के माध्यम से जब भी सुनने को मिलते हैं, उनके प्रति आस्था और भी प्रगाढ़ हो जाती है। लोक देवी-देवताओं के प्रकट

गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि संवत् 1723 विक्रमी यानी कि 22 दिसंबर 1666 को बिहार के पटना में हुआ। इस बार यह तिथि नानकशाही कैलेंडर के मुताबिक 20 जनवरी को है। उनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर और माता का नाम गुजरी था। उनके पिता

बाबा हरदेव गतांक से आगे… हमारा संसार में आने का मनोरथ पूरा हो जाएगा। जन्मों-जन्मों से भटकी हुई, आवागमन के बंधन में पड़ी हुई आत्मा के बंधन टूट जाएंगे। ये बंधन टूटना ही इसके लिए सुख का, चैन का, सहज अवस्था का कारण है। इनसान को चाहे जो मर्जी प्राप्त हो जाए, दुनिया भर के

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… पवित्र हृदय वाले धन्य हैं, क्योंकि वो ईश्वर का दर्शन करेंगे। आध्यात्मिक गुरु के देने से जो ज्ञान आत्मा को प्राप्त होता है, उससे उच्चतर एवं पवित्र वस्तु और कुछ नहीं है। हम ईश्वर को देख नहीं सकते। यदि हम ईश्वर को देखने का प्रयत्न करते हैं, तो हम ईश्वर

श्रीश्री रवि शंकर गीता की मूल यही शिक्षा है कि शांत मन से युद्ध करो। कृष्ण अर्जुन को हृदय शांत रखकर युद्ध की सलाह देते हैं। संसार में जैसे ही तुम एक विरोध समाप्त करते हो, दूसरा खड़ा हो जाता है। एक समस्या हल होती है, दूसरी खड़ी हो जाती है… यदि तुम खुद को

ओशो दुख को त्यागो। लगता है कि तुम दुख में मजा लेने वाले हो, तुम्हें कष्ट से प्रेम है। दुख से लगाव होना एक रोग है, यह विकृत प्रवृत्ति है, यह विक्षिप्तता है। यह प्राकृतिक नहीं है, यह बदसूरत है। पर मुश्किल यह है कि सिखाया यही गया है। एक बात याद रखो कि मानवता