
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं गुजरात में भाजपा की जीत में उसकी हार छिपी है और कांग्रेस की हार में उसकी जीत छिपी है, लेकिन हिमाचल प्रदेश का सबक स्पष्ट है कि सत्ता में रहते हुए भी यदि आपने जनता से संपर्क नहीं रखा तो जनता आपको सिंहासन से उतार देगी।
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह अत्यंत खेद की बात है कि प्रधानमंत्री के विरोध को देशद्रोह का दर्जा दिया जाने लगा है। सरकार की यह मनमानी इसलिए चल रही है कि देश में प्रभावी विपक्ष नहीं है। सत्ता में भाजपा हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य दल हो, मजबूत विपक्ष
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं गुजरात के चुनाव और राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना इतनी बड़ी खबरें हैं कि लगता है देश भर की सारी समस्याएं खत्म हो गई हैं, सारे मुद्दे अप्रासंगिक हो गए हैं। राजनीतिज्ञों को तो जनता को अंट-शंट बातों से मुद्दे भुलाकर फुसलाने की आदत थी
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं दिनेश्वर शर्मा की वापसी के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया केंद्र सरकार की आशाओं के अनुरूप नहीं थी। वस्तुतः ऐसी कार्रवाइयों से अविश्वास और बढ़ता है, नाउम्मीदी और बढ़ती है। इसके बजाय भाजपा के केंद्रीय नेता कश्मीर जाकर वहां के स्थानीय नेताओं से बातचीत करें और
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा पहली बार केंद्र में अपने दम पर सत्ता में आई है। भाजपा निश्चय ही इसका लाभ उठा कर हर राज्य में अपने काडर को मजबूत करना चाहेगी, ताकि वह लंबे समय तक सत्ता में बनी रह सके। सोशल मीडिया तथा विपक्ष की सारी आलोचनाओं
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं लोकतंत्र की सफलता में शक्तियों के तर्कसंगत बंटवारे का मूल मंत्र भुला देना लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है और आज नहीं तो भविष्य में कोई अन्य नेता तानाशाह बन सकता है। इसी तरह संवैधानिक संस्थाओं, खासकर न्यायपालिका की निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया गया। यही नहीं, मुद्दों पर बात करने के बजाय
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह सही है कि राहुल अभी मोदी के मुकाबले में कहीं नहीं दिखते। वह कांग्रेस उपाध्यक्ष बने रहें या अध्यक्ष बन जाएं, इससे आम जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता, पर राहुल गांधी किसी भी रूप में मोदी की बराबरी करते नहीं दिखते। समस्या यह है
पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हालिया सर्वेक्षण का निष्कर्ष यह है कि यदि आज चुनाव हो जाएं, तो भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरेगी, लेकिन वह निर्धारित 360 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाएगी। वह 320 सीटों के आसपास सिमट जाएगी। सर्वेक्षण के निष्कर्ष एक चेतावनी मात्र हैं