पीके खुराना

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जिन नेताओं ने बेईमानी से देश को लूटा है और अकूत संपत्ति बना ली है, उनके विरुद्ध कार्रवाई होना अच्छा है और जनता सदैव उसका स्वागत करेगी, लेकिन जानबूझ कर बेटी की शादी जैसे समारोह के समय विरोधियों पर छापे डलवा कर अपनी ईमानदारी के गाल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा में जहां किसी को मनमर्जी से कुछ भी बोलने की इजाजत नहीं है, वहां अब ऐसा क्यों होने लगा है? तो जवाब यह है कि यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा है कि बेतुके लेकिन संवेदनशील मुद्दों या नीतिगत विषयों से संबंधित ऊल-जलूल बयान उछाले

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं विपक्ष के पास रचनात्मक विपक्ष की भूमिका को लेकर कोई ‘विजन’ नहीं है। यदि कहीं दंगा हो जाए तो विपक्ष का नेता सहानुभूति जताने के लिए वहां पहुंच जाता है, लेकिन क्या विपक्ष ऐसी कोई कोशिश करता है कि भविष्य में वहां दंगा न हो? यदि

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं एक मजबूत जनतंत्र के लिए हमें अपने जनप्रतिनिधियों पर ‘जनप्रतिनिधि वापसी विधेयक’, ‘गारंटी विधेयक’, ‘जनमत विधेयक’ और ‘जनप्रिय विधेयक’ लाने के लिए दबाव बनाना है। इन कानूनों के अस्तित्व में आने से सरकारी कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर आवश्यक अंकुश लगेगा, भ्रष्टाचार का अंत होगा, जनता की

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं समाज बंट रहा है।  लोगों में निराशा है। देखना यह बाकी है कि विपक्षी दलों की एकजुटता का भविष्य क्या रहता है। फिर भी यह सच है कि सारी चुनौतियों के बावजूद इस एक सच को नहीं भुलाया जा सकता कि जिस तरह राज्यों में विपक्ष

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जब समय कठिन होता है तो उत्तेजना की नहीं, बल्कि धैर्य और सम्मति की आवश्यकता होती है। हमारे देश में जनतंत्र की हालत यह है कि शासन-प्रशासन में जनता की भागीदारी कहीं भी नहीं है। देश में जनतंत्र सिर्फ 5 साल बाद आता है, जब लोग

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी ने बहुत से नारे दिए, लेकिन उन्हें जल्दी ही समझ आ गया कि नौकरशाही से लड़ना और घाटे के सरकारी उपक्रमों को बंद करना जनहित का कार्य तो हो सकता है, पर फिर अगला चुनाव जीतना तो दूर, राज्यों के विधानसभा चुनाव भी नहीं जीत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं बिहार और उत्तर प्रदेश उप चुनावों में भाजपा की हार से उत्साहित विपक्ष गाल बजा रहा है, लेकिन जनता की भलाई के लिए कोई वैकल्पिक योजना या नीति का खुलासा नहीं कर रहा। क्यों? क्योंकि उसके पास कोई योजना है ही नहीं। समस्या जनता की है।

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं लोकतंत्र में विपक्ष का काम ही यह है कि वह सरकार की खामियां ढूंढे, जनता को उन खामियों से अवगत करवाए और सरकार को सही कदम उठाने पर विवश करे। अपनी छवि बचाने के लिए सत्ता पक्ष अपने तर्क देता है, विपक्ष की आलोचना का उत्तर