‘करने’ और ‘होने‘ का फर्क

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार मुझे ‘हाउ टु मेक फ्रेंड्स एंड इंफलुएंस पीपल’ का हिंदी अनुवाद ‘लोक व्यवहार’ पढ़ने को मिली। मेरे जीवन पर इस पुस्तक का गहरा प्रभाव रहा है और मेरी सफलता में इस पुस्तक की शिक्षा का भी योगदान रहा है। मेरे बड़े…

जी भर के जियो

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार जीवंत जीवन जीने के लिए आवश्यक है कि हम खुद से ज्यादा प्यार करना सीखें। खुद से प्यार करने का मतलब है कि हम अपनी सेहत पर फोकस करें, सच्चे रिश्ते बनाएं और अपना ज्ञान बढ़ाते रहें। सेहत पर फोकस में फिर तीन…

लोकतंत्र की दशा-दिशा

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार सन1945 में विश्व भर में कुल 12 देशों में लोकतंत्र था। बीसवीं सदी की समाप्ति के समय यह संख्या बढ़कर 87 तक जा पहुंची लेकिन उसके बाद लोकतंत्र का प्रसार रुक गया। कुछ देशों में दक्षिणपंथी…

युवा और बीमार देश का सच

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार मैं जब सवेरे सैर के लिए निकलता हूं तो सैर करते हुए युवाओं को देखकर मन खुशी से भर जाता है लेकिन उनमें से बहुत से ऐसे हैं जो लंबे समय से सैर कर रहे हैं पर स्वस्थ नहीं हैं। खुद मैं भी अज्ञानता का शिकार…

क्या होता है प्रधानमंत्री?

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार मंत्रियों का मुखिया ‘प्रधानमंत्री’ होता है जो पुराने जमाने में राजाओं का प्रमुख सलाहकार होता था, पर प्रधानमंत्री की भूमिका निर्णय करने की नहीं बल्कि निर्णय में सहायता के लिए सलाहकार की होती थी। लेकिन…

दिल तो बच्चा है जी

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हमारा अवचेतन मस्तिष्क जो हमारे मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत है। दूसरा हिस्सा है चेतन मस्तिष्क जो हमारे मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत भाग है। हमारा अवचेतन मस्तिष्क खिलंदड़ा और मनोरंजन प्रिय है…

समृद्धि के नए द्वार

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है।…

भारत की संसद का सच

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार प्रधानमंत्री की असीम शक्तियों के सामने हर दूसरा व्यक्ति कठपुतली जैसा है। सांसदों के वेतन-भत्ते तथा उनको मिली अन्य सुविधाओं पर अनाप-शनाप धन खर्च होता है, लेकिन यदि 543 सांसदों में से कानून बनाने की…

बेनकाब होती जिंदगी

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार गूगल अब सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं रह गया है, बल्कि यह एक डेटा और इंटरनेट कांग्लोमेरेट बन चुका है। यह एक ऐसा दैत्य है, जो हमें लगता है कि बोतल में बंद है, पर दरअसल अब यह बोतल से बाहर है और हमारे जीवन…

अर्थ-अनर्थ का खतरनाक खेल

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हमारे स्कूलों और कालेजों में हमें ‘धन के लिए काम करने’ की शिक्षा दी जाती है, ‘धन से काम लेने’ की शिक्षा नहीं दी जाती है। इसी से हम अपने आर्थिक साधनों का सही उपयोग नहीं कर पाते और नौकरी चले जाने के डर…

भीड़ का हीरो

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार सत्ता में आने पर नेताओं के लिए अपने वादों को भूल जाना इसलिए आसान है, क्योंकि जनता भी तालियां बजाने के बाद सब कुछ भूल जाती है। भीड़ की शक्ति होती है, चुनाव के बाद भीड़ बिखर जाती है और लोग अकेले रह जाते…

कैसे बढ़े रोजगार

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में अभी तक आम लोग यह नहीं समझ पाए हैं कि सरकार का काम रोजगार देना नहीं है, बल्कि उसका काम यह है कि वह ऐसी नीतियां बनाए, जिससे व्यापार और उद्यम फल-फूल सकें और रोजगार के नए-नए अवसर पैदा…

खट्टे नहीं हैं अंगूर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जब समस्याएं नई हों, तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा।…

सड़क दुर्घटनाएं और नींद

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार 26/11 की बदनाम आतंकवादी घटना में जहां 195 निर्दोष लोग मारे गए, वहीं भारतीय सड़कों पर हर रोज औसतन 390 लोग जान गंवाते हैं। यानी सड़कों पर हर रोज दो-दो 26/11 घटते हैं। दुखद सत्य यह भी है कि सड़क…

हम सब राजा के वजीर!

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हम सब वजीर बन गए हैं। मंत्रीगण, सांसद, पार्टी के पदाधिकारी, मीडिया, जज, चुनाव आयोग, जनता यानी हम सब, जी हां, हम सब राजा के वजीर हो गए हैं। सच से हमारा कोई लेना-देना नहीं, देशभक्ति का नाटक चल रहा है…