पीके खुराना

हम भीड़ की मानसिकता में जी रहे हैं। धर्म के नाम पर तलवार भांजने वाली, हर असहमत व्यक्ति को देशद्रोही करार दे देने वाली, आईटी सैल के हर झूठे-सच्चे तर्क को आगे ठेल देने वाली भीड़ एक तरफ है तो मानसिक गुलामी में जी रही एक और भीड़ है जो हर भ्रष्टाचार की उपेक्षा करती

हर रोज़ कुछ नया सीखें, पढ़कर, सुनकर या देखकर, पर सीखें। संगीत का आनंद लें, सवेरे जल्दी उठने की आदत डालें और अपने विचारों में तथा अपने व्यवहार में सामंजस्य लाएं। आपका व्यवहार ही नहीं, आपके विचार भी शुद्ध हों, आपके काम भी शुद्ध हों, उनमें नैतिकता हो, अपने समय का सदुपयोग कीजिए, समय ही

दरअसल अधिकतर सरकारी एजेंसियां, टेलिकॉम कंपनियां और बैंक आदि अपना काम आगे अलग-अलग कंपनियों को ठेके पर देते हैं। इन कंपनियों के कर्मचारी ‘उधार के सिपाही’ हैं जो कुछ पैसों के लिए किसी भी तरह की जानकारी बांटने, बेचने आदि के लिए स्वतंत्र हैं। बहुत सी मार्केटिंग कंपनियों ने ऐसे लोगों की टीम बना रखी

हताश व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता, इसलिए वह कोई नया काम नहीं कर पाता और वह अपनी असफलता को स्थायी बनाकर हमेशा के लिए असफल हो जाता है। वहीं यदि हम असफलताओं से घबराए बिना असफलता के कारणों का विश्लेषण करें तो हम न केवल उन गलतियों का तोड़ निकालने की जुगत

लब्बोलुबाब यह कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। हम कितने ही काबिल हों और कितने ही ऊंचे पद पर हों, हमें दूसरों का साथ चाहिए, सहयोग चाहिए, समर्थन चाहिए, प्रायोजन चाहिए। ऐसा नहीं है कि इनके बिना हम सफल नहीं हो सकते, लेकिन तब सफलता के शिखर छूने में कदरन लंबा समय लग सकता

मान लीजिए कि आप बंगाल के रहने वाले हैं और नौकरी, व्यवसाय या रिश्तेदारी की वजह से आप पंजाब में आकर बस गए हैं तो आपके लिए पंजाब का स्थानीय खाना ज्यादा मुफीद है क्योंकि यह पंजाब की जलवायु के अनुरूप है। इसी तरह अगर कोई पंजाबी बंगाल में जा बसे तो उसे अपने मैन्यु

फिलहाल विशेषज्ञों की राय है कि आपके पासवर्ड में सिंबल, कैरेक्टर, कैपिटल लैटर और नंबर का इस्तेमाल होना चाहिए। इससे पासवर्ड के बिट्स बढ़ते चले जाएंगे और पासवर्ड को तोड़ना आसान नहीं होगा। हमें एक और महत्त्वपूर्ण अंतर जानने की आवश्यकता है। पासवर्ड क्रैक होना और चोरी होना, दो अलग बातें हैं। हमारे यहां पासवर्ड

हमारी टीम अभी आंखों का चश्मा हटाने की दिशा में काम कर रही है। चूंकि यह किसी के जीवन का प्रश्न है, अत: हम इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि हमारा हर काम पूरी तरह से जांचा-परखा हुआ हो। बड़ी बात यह है कि बहुत से इलाज घर बैठे करना संभव है, बिना

विकास की अधकचरी योजनाओं से न देश का भला होता है, न समाज का। शिक्षा महंगी है, इलाज महंगा है, न्याय महंगा है, जीवन महंगा है, आदमी सस्ता है, मौत सस्ती है। हमारा संविधान कानूनों का जंगल है, राजनीतिक दल और वकील इसका लाभ लेते हैं। हमारा संविधान राजनीतिक दलों को बहुत सी अनुचित सुविधाएं