समृद्धि के नए द्वार

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है।…

भारत की संसद का सच

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार प्रधानमंत्री की असीम शक्तियों के सामने हर दूसरा व्यक्ति कठपुतली जैसा है। सांसदों के वेतन-भत्ते तथा उनको मिली अन्य सुविधाओं पर अनाप-शनाप धन खर्च होता है, लेकिन यदि 543 सांसदों में से कानून बनाने की…

बेनकाब होती जिंदगी

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार गूगल अब सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं रह गया है, बल्कि यह एक डेटा और इंटरनेट कांग्लोमेरेट बन चुका है। यह एक ऐसा दैत्य है, जो हमें लगता है कि बोतल में बंद है, पर दरअसल अब यह बोतल से बाहर है और हमारे जीवन…

अर्थ-अनर्थ का खतरनाक खेल

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हमारे स्कूलों और कालेजों में हमें ‘धन के लिए काम करने’ की शिक्षा दी जाती है, ‘धन से काम लेने’ की शिक्षा नहीं दी जाती है। इसी से हम अपने आर्थिक साधनों का सही उपयोग नहीं कर पाते और नौकरी चले जाने के डर…

भीड़ का हीरो

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार सत्ता में आने पर नेताओं के लिए अपने वादों को भूल जाना इसलिए आसान है, क्योंकि जनता भी तालियां बजाने के बाद सब कुछ भूल जाती है। भीड़ की शक्ति होती है, चुनाव के बाद भीड़ बिखर जाती है और लोग अकेले रह जाते…

कैसे बढ़े रोजगार

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में अभी तक आम लोग यह नहीं समझ पाए हैं कि सरकार का काम रोजगार देना नहीं है, बल्कि उसका काम यह है कि वह ऐसी नीतियां बनाए, जिससे व्यापार और उद्यम फल-फूल सकें और रोजगार के नए-नए अवसर पैदा…

खट्टे नहीं हैं अंगूर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जब समस्याएं नई हों, तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा।…

सड़क दुर्घटनाएं और नींद

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार 26/11 की बदनाम आतंकवादी घटना में जहां 195 निर्दोष लोग मारे गए, वहीं भारतीय सड़कों पर हर रोज औसतन 390 लोग जान गंवाते हैं। यानी सड़कों पर हर रोज दो-दो 26/11 घटते हैं। दुखद सत्य यह भी है कि सड़क…

हम सब राजा के वजीर!

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हम सब वजीर बन गए हैं। मंत्रीगण, सांसद, पार्टी के पदाधिकारी, मीडिया, जज, चुनाव आयोग, जनता यानी हम सब, जी हां, हम सब राजा के वजीर हो गए हैं। सच से हमारा कोई लेना-देना नहीं, देशभक्ति का नाटक चल रहा है…

तुम कब ठहरोगे?

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार कलिंग युद्ध के बाद युद्ध क्षेत्र में क्षत-विक्षत लाशें और विधवाओं के हाहाकार से त्रस्त सम्राट अशोक ने भी खुद से ही पूछा - तुम कब ठहरोगे? अब शायद यही प्रश्न हमें आज के शासकों से पूछना है। हर शासक चाहता है…

चार प्रदेश, एक संदेश

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जिस प्रकार मोदी का जलवा आंध्र प्रदेश में नहीं चला, वैसे ही पंजाब में भी मोदी लहर का कोई असर नहीं था। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला तो यह कि भाजपा पंजाब में है ही नहीं और दूसरा यह कि शिरोमणि अकाली दल की…

असली चुनौती अर्थव्यवस्था

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अमरीका के दबाव में हमने ईरान के तेल मंत्री तक को टरका दिया। छप्पन इंच की छाती के बावजूद अब हम तेल महंगा भी ले रहे हैं और उसका भुगतान भी विदेशी मुद्रा में हो रहा है। यह ज्यादा आश्चर्य की बात नहीं है कि देश…

गड़बड़ी तो सिस्टम में है

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अगर सिस्टम ठीक हो, तो समाज के नब्बे प्रतिशत लोगों के ईमानदार बने रहने की संभावना होती है और यदि सिस्टम खराब हो, तो समाज के नब्बे प्रतिशत लोग भ्रष्ट और बेईमान हो जाते हैं। चुनाव आयोग तो बस एक उदाहरण है। देश…

संविधान बदलने का समय

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार भावार्थ यह कि सत्तासीन दल के ऐसे सांसद जो मंत्रिपरिषद में नहीं हैं, संसद में कुछ नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री यदि मजबूत हो, तो वह संसद और अपने दल ही नहीं, अपनी मंत्रिपरिषद की भी परवाह नहीं करता। प्रधानमंत्री…

मोदी, मुद्दे और मसूद अजहर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार संयुक्त राष्ट्र संघ का अस्तित्व अमरीकी सहायता पर निर्भर करता है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ की नीतियां अमरीकी हितों से प्रभावित होती हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और अमरीका ने एकजुट होकर चीन पर दबाव बनाया, तो चीन…