डा. अश्विनी महाजन, कालेज एसोशिएट प्रोफेसर

कहा जा सकता है कि देश में जहां जीएम खाद्य पदार्थों की कोई जरूरत नहीं है, व्यावसायिक ताकतों के दबाव में इनको दी जाने वाली अनुमतियों से देश की खेती-किसानी, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं निर्यातों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। सरकार का दायित्व है कि जीईएसी की सिफारिशों को दरकिनार करे… अक्तूबर 18, 2022 को

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों में एक प्रमुख कार्य सामाजिक समरसता का भी है। समाज के विभिन्न वर्गों में समरसता स्थापित करने के लिए संघ की सभी शाखाएं प्रयास करती हैं। त्योहारों एवं अन्य कई अवसरों पर सामान्यत: गऱीब, वंचित और समाज के पिछड़े वर्गों के बीच जाकर स्वयंसेवकों द्वारा अपने स्नेह और अपनत्व का

चीन के बारे में सुनक मानते हैं कि घरेलू और दुनिया की सुरक्षा के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। उनका यह मानना है कि चीन ने बेल्ट रोड योजना के माध्यम से कई विकासशील देशों को कर्जजाल में फांस लिया है। वे यह भी मानते हैं कि चीन ब्रिटेन की प्रौद्योगिकी चुराने का भी

गौरतलब है कि वर्ष 1998-2002 के बीच अपने आयु से ठिगने बच्चों का अनुपात 54.2 प्रतिशत से घटता हुआ वर्ष 2016-2020 के बीच में मात्र 34.7 प्रतिशत ही रह गया है। यानी अब बच्चे पहले से ज्यादा लंबे हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि बच्चे पहले से ज्यादा लंबे हो रहे हैं,

भारत में वर्ष 2021-22 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3160 लाख टन है, यानी 227 किलो प्रति व्यक्ति। भारत में खाद्यान्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों जैसे दूध, अंडे, सब्जी, फल, मछली आदि सभी का उत्पादन बढ़ा है… आज जब दुनिया के कई मुल्क अपनी खाद्य सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं, भारत दुनिया के सामने एक मिसाल

इन कंपनियों पर अलग ढंग से कर वसूलने की जरूरत है। खास बात यह है कि ये कंपनियां अपने मूल देशों में भी करों से बचने का प्रयास कर रही हैं। जी-20 देशों के बीच इस संबंध में चर्चा के माध्यम से दुनिया के देशों की राजकोष की समस्या के समाधान की जरूरत होगी। जी-20

यूरोपीय देशों ने अपने कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों को फिर से चलाने का निर्णय लिया है, लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा। ऐसे में यह भी चिंता व्यक्त की जा रही है कि पहली बार यूरोप को इन सर्दियों में ऊर्जा की कमी के चलते तापीकरण में कठिनाई हो सकती है। समझना होगा कि हालांकि

आज भारत के यूपीआई का उदाहरण दुनिया में दिया जा रहा है और यह अमेरिकी, यूरोपीय एवं अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों से कहीं बेहतर आंका जा रहा है। कहा जाता है कि यूपीआई दुनिया की बेहतरीन भुगतान प्रणाली है। ऐसे में जब भारत डिजिटल भुगतान में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया

इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि भारत मुद्रास्फीति पर नियंत्रण कर पाएगा तो आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को फलीभूत करते हुए विविध क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए हम अपनी जीडीपी और रोजगार दोनों बढ़ा सकेंगे… इंग्लैंड को पछाड़ते हुए भारत हाल ही में दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय

दिल्ली में मुफ्त बिजली, पानी के लालच से राजनीतिक लाभ उठाने वाली, इस आम आदमी पार्टी ने अब दूसरे राज्यों में भी इसी प्रकार का लालच देना शुरू किया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार के लालच पर प्रश्नचिन्ह लगाने के बाद यह राजनीतिक दल मुफ्त बिजली-पानी को औचित्यपूर्ण ठहराने की कोशिश कर रहा है…