पीके खुराना

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार भारतीय खाद्य निगम पर भी अडानी का बोर्ड लग गया है और पानीपत के पास नौल्था गांव में लगभग सौ एकड़ जमीन पर अडानी का विशाल गोदाम बन रहा है जहां हरियाणा और आसपास के राज्यों से खरीदी गई फसल का भंडारण होगा। भंडारण शायद एक गलत शब्द है, सही शब्द

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अब सवाल यह है कि जब नौकरियों का अकाल हो और व्यवसाय का आसान विकल्प भी विकल्प न रह गया हो तो क्या किया जाए। यह खुशी की बात है कि देश में बहुत सी संस्थाओं ने जैसे गैर-पत्रकार लोगों के लिए व्यवसाय के नए विकल्प सुझाने के लिए वेबिनार किए

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार इसी तरह सत्तासीन लोगों की उदासीनता और भ्रष्टाचार से परेशान जनमानस धीरे-धीरे इस बात के कायल हो जाते हैं कि शासन तो डंडे के जोर पर ही चलता है। यही कारण है कि हमें इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी जैसे तेज़-तर्रार शासक कहीं ज़्यादा पसंद आते हैं। इससे इंकार नहीं किया

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार समस्या यह है कि मोदी अपनी मनमानी के लिए संविधान में कुछ ऐसे परिवर्तन चाहते हैं जिसके लिए उन्हें लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों में भाजपा सरकार की दरकार है। मोदी बहुत दूरअंदेशी हैं और वे जानते हैं कि यदि नीतीश को मुख्यमंत्री न

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार नया सफल व्यवसाय आरंभ करने के लिए आवश्यक यह है कि आप अपने ही क्षेत्र के अनुभव और ज्ञान का लाभ उठाकर ग्राहकों को कोई नई सुविधा या बचत उपलब्ध करवाएं। स्टार्ट-अप कल्चर ने यह साबित कर दिया है कि यह भी हमारा भ्रम ही था कि धन कमाने के लिए

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार देश की सार्वजनिक संपत्ति को यूं कुछ पूंजीपतियों में लुटाना और झूठ और सिर्फ  झूठ के बल पर शासन चलाना एक ऐसी नई परिपाटी है जो देश के पतन का कारण बनेगी। यह कोई मज़ाक नहीं है। यह बहुत गंभीर मामला है। पीएम केयर फंड में किसने दान दिया और कौन

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अगर हम विकसित देश बनना चाहते हैं तो हमें असलियत को समझना होगा, सच को स्वीकार करना होगा और प्रणालीगत दोषों को दूर करते हुए लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत बनाना होगा। इसकी शुरुआत का एकमात्र तरीका यह है कि सत्ता में जनता की वापसी हो यानी जनता के काम

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार किसी भी व्यक्ति से गलती हो सकती है और असफलता हाथ लग सकती है, लेकिन यदि हम उत्साही हों तो असफलता भी जीवन का पाठ बन जाती है। हम कितनी ही बढि़या योजना बना लें, चुनौतियां आ सकती हैं। ऐसे में हमारी कुशलता दो बातों से सिद्ध होती है। पहली, कि

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में प्रधानमंत्री असल में लोकतांत्रिक ढंग से चुना गया तानाशाह है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अकेले ही निर्णय ले लिया कि इस देश को योजना आयोग की जरूरत नहीं है और योजना आयोग समाप्त हो गया। उन्होंने एक ही रात में 1000 और 500 के नोट रद्दी कर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार पिछले 233 सालों में अमरीका का कोई राष्ट्रपति तानाशाह नहीं बन पाया है। अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप को पद संभाले दो ही हफ्ते हुए थे कि वहां के सिस्टम ने उनके पर कतरने शुरू कर दिए, जबकि हमारे यहां आजादी के बाद 30 साल भी पूरे नहीं हुए