पीके खुराना

तुर्रा यह कि खुद सत्तासीन दल के सांसदों के उन स्वीकृत सवालों का जवाब देने से मना कर दिया जाता है जो सरकार की परेशानी का सबब बन सकते हैं। भाजपा सांसद सुब्रहमण्यन स्वामी भी सरकार की इस नीति का शिकार हो चुके हैं। पिछले साल 2 दिसंबर की सुबह उन्हें सूचित किया गया कि

भारतवर्ष में यदि सरकार द्वारा पेश कोई बिल संसद में गिर जाए तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है, इसीलिए पार्टियां ह्विप जारी करती हैं। अमरीका में कोई बिल पास हो या न हो, इससे राष्ट्रपति को कोई फर्क नहीं पड़ता। वह अपनी निश्चित अवधि तक काम करने के लिए स्वतंत्र है, वह अपने मंत्रिमंडल

मायावती की इस कमज़ोरी का लाभ भी अखिलेश यादव को मिल रहा है। सन् 1985 के लोकसभा चुनावों में जब राजीव गांधी ने अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी तो भाजपा कहीं भी दिखाई नहीं देती थी। एनटी रामाराव की तेलुगू देशम पार्टी एक राज्य में ही सीमित होने के

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए सन् 2007 में राज्य के विधानसभा के चुनावों में मोदी ने मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध नफरत का माहौल पैदा करके हिंदू वोटों का सफल ध्रुवीकरण किया था। इसी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करते हुए सन् 2019 में राम मंदिर और हिंदू जागरण को मुद्दा बनाया। सर्जिकल स्ट्राइक ने मोदी की छवि

यह सच है कि हम सभी में दुनिया बदलने की ताकत है, पर इसकी शुरुआत खुद से ही होती है। कुछ और बदलने से पहले हमें खुद को बदलना होता है, खुद को तैयार करना होता है, अपनी योग्यता बढ़ानी होती है, अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक रखना होता है, अपने साहस को फौलाद करना होता

बहुत-सी और भी ऐसी बातें होती हैं, घटनाएं होती हैं, जिन्हें हम परखने की कोशिश नहीं करते, उन पर विचार करने की कोशिश नहीं करते, सवाल नहीं उठाते। कभी वह अज्ञान के कारण होता है, कभी आलस्य के कारण और कभी झूठी आस्था के कारण। एक उदाहरण से हम इसे समझ सकते हैं। यदि कोई

अंततः यह सोच कि खेल अनिश्चित है और खेल का रुख कुछ भी हो सकता है, हमारी जीत की संभावनाएं सिर्फ इसलिए कुछ और बढ़ जाती हैं क्योंकि हम मानकर चलते हैं कि हमारी योजना गलत हो सकती है, उसमें खामियां हो सकती हैं और हम हार सकते हैं, परिणाम यह होता है कि हम

किसी व्यक्ति की सफलता और असफलता में भाग्य की भी भूमिका होती ही है, पर उसका अनुपात क्या था, इसे तय करना हमारे लिए मुमकिन नहीं है। अक्सर हम बाकी सारे घटकों को जानते हैं, उनका विश्लेषण करते हैं, पर उसमें शामिल भाग्य की भूमिका के बारे में नहीं सोचते। जब कोई दूसरा व्यक्ति सफल

सोने से एक घंटा पहले हल्दी वाला गुनगुना दूध लें। इससे नींद बढिय़ा आएगी और त्वचा में चमक बढ़ेगी, खूबसूरती बढ़ेगी। जब त्वचा खूबसूरत होगी तो महिलाओं को भी बाहरी मेकअप की जरूरत कम से कम पड़ेगी क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से खूबसूरत लगेंगी। अब जऱा इस दूध का तरीका भी समझ लीजिए। दूध को

हम अपने मित्रों में, परिचितों में, रिश्तेदारों में और खुद के परिवार में मृत्यु की घटनाओं को देखते हैं और उसके बावजूद मानते हैं कि हम अभी जि़ंदा रहेंगे। हम नहीं मानते कि हो सकता है कि हमें अगला सांस भी न आए। मृत्यु सच होते हुए भी हमारे लिए सच नहीं है। लेकिन अगर