पीके खुराना

आलोचना का अर्थ है कि कोई परेशानी है, कोई कमी है, उस कमी को दूर कर देने से शिकायत दूर हो जाती है और फुन्सी को फोड़े में तब्दील होने से रोका जा सकता है। अक्सर समस्याएं इसलिए पनपती हैं कि समय पर उनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया, उनको दूर नहीं किया गया और

आज जब मैं उस घटना पर विचार करता हूं तो मुझे समझ आता है कि उस ग्रामीण दंपत्ति ने कितनी सरलता से एक बहुत बड़े सच का खुलासा किया था। यदि हम किसी को पसंद नहीं करते, और उसकी प्रशंसा करते हैं तो हम काम तो अच्छा कर रहे हैं, पर हम खुद अच्छे नहीं

अडिय़ल, कडिय़ल या जिद्दी आदमी जीवन में अक्सर पिछड़ जाते हैं जबकि लोगों को साथ लेकर चलना जानने वाले लोग सफलता के शिखर छू लेते हैं। कभी-कभी दिल की बात मान लेना भी हमारे लिए अच्छा होता है और यह प्रेरणा का एक बड़ा कारण बन सकता है। मान लीजिए, आप कोई वस्तु खरीदना चाहते

किसी भी सरकार के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं का संतुलित करना आसान नहीं होता। ऑनलाइन व्यापार अब शायद विश्व भर में अपनी सुविधा के लिए बढ़त पर है जिससे ऑफलाइन ट्रेड घबराया हुआ है। ऐसे में देखना होगा कि मोदी सरकार नॉन-कारपोरेट सेक्टर की आशाओं पर खरा उतरने के लिए क्या करती

खोमचे वाले, पटरी वाले, घूम-घूम कर सामान बेचने वाले इन लोगों की हम उपेक्षा करते हैं, पर यह भूल जाते हैं कि हमारी रोज़मर्रा की अधिकांश जरूरतें यही लोग पूरी करते हैं। बड़े उद्योग घाटे में जाएं तो सरकारों में हडक़ंप मच जाता है और उनके लिए राहत पैकेज की बात होने लगती है, जबकि

यह धर्म-भीरुता बहुत खतरनाक है जो अंतत: सिर्फ अपराध को ही बढ़ाने के काम आएगी। ऐसे बाबाओं के खिलाफ जब कानूनी कार्रवाई होने लगती है तो अक्सर बड़ी संख्या में उनके भक्त कानून और प्रशासन के विरोध में सडक़ों पर उतर आते हैं, रास्ते जाम करते हैं, तोडफोड़ करते हैं और धन-संपत्ति का नुकसान करने

नालेज इकानमी में बड़े शहरों के दायरे से बाहर निकल कर कस्बों और गांवों को उद्योग और रोजग़ार का केंद्र बनाने की अपार संभावना है। यह एक ऐसी क्षमता है जिसका लाभ लिया जाना अभी बाकी है। यह खुशी की बात है कि कई निजी कंपनियां भी इस उद्देश्य में सहयोग देकर अपने प्रयासों से

इसके विपरीत प्रपोर्शनल रिप्रेज़ेंटेशन यानी आनुपातिक प्रतिनिधित्व में विभिन्न दलों को उनके वोट प्रतिशत के हिसाब से सीटें दी जाती हैं और उनकी सूची के वरीयता क्रम के अनुसार उम्मीदवारों को सदन में जगह मिलती है। यानी अगर सदन में कुल 100 सीटें हों और किसी एक दल को सारे प्रदेश में 34 प्रतिशत मत

हम मैटावर्स के युग में रह रहे हैं। ‘हैलो अलादीन’ नाम की कंपनी ने इसी दिशा में नए प्रयोग किए हैं और सालों-साल की रिसर्च और मेहनत के बाद मैटा ट्रांस्फार्मेशन का तीन महीने का एक प्रशिक्षण कोर्स तैयार किया है जो दावा करता है कि हम और हमारा शरीर एनर्जी का ही भौतिक रूप

जिस प्रकार एक पुरुष अपने अन्य पुरुष सहकर्मियों में से सिर्फ कुछ लोगों को ही ज्य़ादा पसंद करते हैं या किसी एक के साथ ही गहरी मित्रता करते हैं, वैसे ही कोई महिला भी किसी एक पुरुष सहकर्मी के ज्य़ादा नज़दीक हो तो यह भी स्वाभाविक मित्रता है, ‘आमंत्रण’ नहीं, पर कई बार इस खुलेपन