तुम कब ठहरोगे?

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार कलिंग युद्ध के बाद युद्ध क्षेत्र में क्षत-विक्षत लाशें और विधवाओं के हाहाकार से त्रस्त सम्राट अशोक ने भी खुद से ही पूछा - तुम कब ठहरोगे? अब शायद यही प्रश्न हमें आज के शासकों से पूछना है। हर शासक चाहता है…

चार प्रदेश, एक संदेश

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जिस प्रकार मोदी का जलवा आंध्र प्रदेश में नहीं चला, वैसे ही पंजाब में भी मोदी लहर का कोई असर नहीं था। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला तो यह कि भाजपा पंजाब में है ही नहीं और दूसरा यह कि शिरोमणि अकाली दल की…

असली चुनौती अर्थव्यवस्था

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अमरीका के दबाव में हमने ईरान के तेल मंत्री तक को टरका दिया। छप्पन इंच की छाती के बावजूद अब हम तेल महंगा भी ले रहे हैं और उसका भुगतान भी विदेशी मुद्रा में हो रहा है। यह ज्यादा आश्चर्य की बात नहीं है कि देश…

गड़बड़ी तो सिस्टम में है

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार अगर सिस्टम ठीक हो, तो समाज के नब्बे प्रतिशत लोगों के ईमानदार बने रहने की संभावना होती है और यदि सिस्टम खराब हो, तो समाज के नब्बे प्रतिशत लोग भ्रष्ट और बेईमान हो जाते हैं। चुनाव आयोग तो बस एक उदाहरण है। देश…

संविधान बदलने का समय

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार भावार्थ यह कि सत्तासीन दल के ऐसे सांसद जो मंत्रिपरिषद में नहीं हैं, संसद में कुछ नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री यदि मजबूत हो, तो वह संसद और अपने दल ही नहीं, अपनी मंत्रिपरिषद की भी परवाह नहीं करता। प्रधानमंत्री…

मोदी, मुद्दे और मसूद अजहर

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार संयुक्त राष्ट्र संघ का अस्तित्व अमरीकी सहायता पर निर्भर करता है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ की नीतियां अमरीकी हितों से प्रभावित होती हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और अमरीका ने एकजुट होकर चीन पर दबाव बनाया, तो चीन…

अंग्रेजों के जमाने के चौकीदार

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार क्या हम यह नहीं जानते कि वही बात छिपाई जाती है, जो अनुचित, अनैतिक और गैरकानूनी हो? इससे भी बड़ी बात यह है कि वर्तमान सरकार ने 2016 और 2017 का वित्त विधेयक पेश करते हुए चुपचाप वित्तीय कानून में संशोधन कर…

प्रज्ञा ठाकुर मुद्दा है ही नहीं

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार स्पष्ट है कि मोदी ग्रैंडमास्टर हैं। अपनी नायाब चाल से उन्होंने चुनाव का नेरेटिव ही बदल दिया है। मुद्दे पीछे छूट गए हैं और प्रज्ञा के अंटशंट बयान सबकी चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस बीच हम सब भूल गए हैं कि…

संविधान बदलना जरूरी

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार संविधान देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाए जाते हैं। अतः संविधान आस्था का नहीं, सुचारू प्रशासन का विषय है और संविधान की उन धाराओं पर खुली बहस होनी चाहिए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर…

घोषणा पत्रों का चाट-मसाला

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार असल जीवन में डॉन जैसे अपराधी या तो पुलिस के हाथों मारे जाते हैं या फिर उनके प्रतिद्वंद्वी उनकी हत्या कर देते हैं और बहुत बार तो खुद उनके साथियों में से ही कोई उनकी जीवन लीला समाप्त कर देता है। अपराध…

जनता का प्रतिनिधि कौन

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार मुद्दों को लेकर चर्चा के मामले में मीडिया में कोई ज्यादा उत्साह नजर नहीं आता। उसके बजाय मीडिया की ओर से भी ऐसी कोशिशों की कमी नहीं है, जहां अनावश्यक और अप्रासंगिक बातों को मुद्दा बनाया जा रहा है। मीडिया तो…

ये कहां आ गए हम?

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार इंडियन आयल कारपोरेशन कब चुपचाप अडानी के हवाले कर दिया गया, पता ही नहीं चला। हाल ही में अडानी को छत्तीसगढ़ के सरगुजा और सूरजपुर जिलों के घने जंगलों में स्थित पारसा कोयला खदान के संचालन की शुरुआती स्तर की…

प्रजातंत्र की चाट-पकौड़ी

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार एक केंद्रीय मंत्री के बेटे की कंपनी का बनाया पुल उत्तर प्रदेश में ढह गया, साठ से अधिक लोग मारे गए, लेकिन कोई अंगुली नहीं उठी, कोई जांच नहीं हुई। जीवन बीमा निगम के फंड का दुरुपयोग, रिजर्व बैंक के फंड का…

चुनाव में कहीं गुम हैं मुद्दे

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार आंकड़ों में देश की अर्थव्यवस्था के गीत गाए जा रहे हैं, लेकिन क्या बातों से वस्तुस्थिति छिप सकती है। अब आखिरी समय में मोदी सरकार ने इतने लालीपॉप बांटे हैं कि जनता के हर वर्ग को उसने छुआ है, लेकिन सवाल यह उठ…

अब मुद्दों की स्ट्राइक

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार एक और बात पर ध्यान देना आवश्यक है। बालाकोट हमले के बाद आतंकवादियों की संख्या को लेकर फौज ने कभी कोई दावा नहीं किया। इसलिए यदि कोई सवाल उठाए जा रहे हैं, तो ये फौज के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यदि राजनीतिक…