
इतिहास गवाह है कि जब-जब भी मंदी आती है या नौकरियों का अकाल पड़ता है तो उद्यम ज्यादा अच्छा विकल्प है और ज्यादा से ज्यादा लोग उद्यमी बनने के रास्ते तलाशते हैं। मीडिया उद्योग में पिछले कई सालों से यह हो रहा है कि रिटायर होने के बाद, नौकरी से इस्तीफा देने के बाद या
यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जब कोई हमें पसंद करने लगता है तो यह स्वाभाविक है कि हम भी उसे पसंद करने लग जाते हैं। कोई जुगत नहीं भिड़ानी पड़ती, कोई प्रयत्न नहीं करना पड़ता, बस हो जाता है। हां, जुगत तब भिड़ानी पड़ती है जब रिश्ता बनाना हो, जब यह सुनिश्चित करना हो
उसने सिर्फ यह देखा कि उसको थप्पड़ लगा है और उसका अपमान हुआ है। काम देखा, काम के पीछे की नीयत नहीं देखी। इसमें कोई दो राय नहीं कि जब कोई व्यक्ति कोई बात करे या कोई काम करे, चाहे वह हमसे संबंधित हो या न हो, तो हमें उसका व्यवहार तो नज़र आता है,
हम भीड़ की मानसिकता में जी रहे हैं। धर्म के नाम पर तलवार भांजने वाली, हर असहमत व्यक्ति को देशद्रोही करार दे देने वाली, आईटी सैल के हर झूठे-सच्चे तर्क को आगे ठेल देने वाली भीड़ एक तरफ है तो मानसिक गुलामी में जी रही एक और भीड़ है जो हर भ्रष्टाचार की उपेक्षा करती
हर रोज़ कुछ नया सीखें, पढ़कर, सुनकर या देखकर, पर सीखें। संगीत का आनंद लें, सवेरे जल्दी उठने की आदत डालें और अपने विचारों में तथा अपने व्यवहार में सामंजस्य लाएं। आपका व्यवहार ही नहीं, आपके विचार भी शुद्ध हों, आपके काम भी शुद्ध हों, उनमें नैतिकता हो, अपने समय का सदुपयोग कीजिए, समय ही
दरअसल अधिकतर सरकारी एजेंसियां, टेलिकॉम कंपनियां और बैंक आदि अपना काम आगे अलग-अलग कंपनियों को ठेके पर देते हैं। इन कंपनियों के कर्मचारी ‘उधार के सिपाही’ हैं जो कुछ पैसों के लिए किसी भी तरह की जानकारी बांटने, बेचने आदि के लिए स्वतंत्र हैं। बहुत सी मार्केटिंग कंपनियों ने ऐसे लोगों की टीम बना रखी
हताश व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता, इसलिए वह कोई नया काम नहीं कर पाता और वह अपनी असफलता को स्थायी बनाकर हमेशा के लिए असफल हो जाता है। वहीं यदि हम असफलताओं से घबराए बिना असफलता के कारणों का विश्लेषण करें तो हम न केवल उन गलतियों का तोड़ निकालने की जुगत
लब्बोलुबाब यह कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। हम कितने ही काबिल हों और कितने ही ऊंचे पद पर हों, हमें दूसरों का साथ चाहिए, सहयोग चाहिए, समर्थन चाहिए, प्रायोजन चाहिए। ऐसा नहीं है कि इनके बिना हम सफल नहीं हो सकते, लेकिन तब सफलता के शिखर छूने में कदरन लंबा समय लग सकता
मान लीजिए कि आप बंगाल के रहने वाले हैं और नौकरी, व्यवसाय या रिश्तेदारी की वजह से आप पंजाब में आकर बस गए हैं तो आपके लिए पंजाब का स्थानीय खाना ज्यादा मुफीद है क्योंकि यह पंजाब की जलवायु के अनुरूप है। इसी तरह अगर कोई पंजाबी बंगाल में जा बसे तो उसे अपने मैन्यु