
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार संयुक्त राष्ट्र संघ का अस्तित्व अमरीकी सहायता पर निर्भर करता है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ की नीतियां अमरीकी हितों से प्रभावित होती हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और अमरीका ने एकजुट होकर चीन पर दबाव बनाया, तो चीन सीधे रास्ते पर आया और उसे मोहम्मद मसूद अजहर को लेकर झुकना पड़ा। पिछले कई
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार क्या हम यह नहीं जानते कि वही बात छिपाई जाती है, जो अनुचित, अनैतिक और गैरकानूनी हो? इससे भी बड़ी बात यह है कि वर्तमान सरकार ने 2016 और 2017 का वित्त विधेयक पेश करते हुए चुपचाप वित्तीय कानून में संशोधन कर दिया तथा राजनीतिक दलों को मिलने वाले विदेशी चंदे
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार स्पष्ट है कि मोदी ग्रैंडमास्टर हैं। अपनी नायाब चाल से उन्होंने चुनाव का नेरेटिव ही बदल दिया है। मुद्दे पीछे छूट गए हैं और प्रज्ञा के अंटशंट बयान सबकी चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस बीच हम सब भूल गए हैं कि प्रज्ञा सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ रही
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार संविधान देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाए जाते हैं। अतः संविधान आस्था का नहीं, सुचारू प्रशासन का विषय है और संविधान की उन धाराओं पर खुली बहस होनी चाहिए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर करती हों और उन्हें बदलकर जनहितकारी संविधान बनाया जाना चाहिए। आवश्यक होने पर
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार असल जीवन में डॉन जैसे अपराधी या तो पुलिस के हाथों मारे जाते हैं या फिर उनके प्रतिद्वंद्वी उनकी हत्या कर देते हैं और बहुत बार तो खुद उनके साथियों में से ही कोई उनकी जीवन लीला समाप्त कर देता है। अपराध फिल्मों में दर्शकों के लिए चाट-मसाला खूब होता है।
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार मुद्दों को लेकर चर्चा के मामले में मीडिया में कोई ज्यादा उत्साह नजर नहीं आता। उसके बजाय मीडिया की ओर से भी ऐसी कोशिशों की कमी नहीं है, जहां अनावश्यक और अप्रासंगिक बातों को मुद्दा बनाया जा रहा है। मीडिया तो जनता का प्रतिनिधि हुआ करता था, फिर आखिर मीडिया का
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार इंडियन आयल कारपोरेशन कब चुपचाप अडानी के हवाले कर दिया गया, पता ही नहीं चला। हाल ही में अडानी को छत्तीसगढ़ के सरगुजा और सूरजपुर जिलों के घने जंगलों में स्थित पारसा कोयला खदान के संचालन की शुरुआती स्तर की अनुमति दे दी गई है। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण मंत्रालय ने
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार एक केंद्रीय मंत्री के बेटे की कंपनी का बनाया पुल उत्तर प्रदेश में ढह गया, साठ से अधिक लोग मारे गए, लेकिन कोई अंगुली नहीं उठी, कोई जांच नहीं हुई। जीवन बीमा निगम के फंड का दुरुपयोग, रिजर्व बैंक के फंड का दुरुपयोग और अब शेष सरकारी बैंकों तथा नेशनल इन्वेस्टमेंट
पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार आंकड़ों में देश की अर्थव्यवस्था के गीत गाए जा रहे हैं, लेकिन क्या बातों से वस्तुस्थिति छिप सकती है। अब आखिरी समय में मोदी सरकार ने इतने लालीपॉप बांटे हैं कि जनता के हर वर्ग को उसने छुआ है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी प्रधानमंत्री को सिर्फ