अर्थव्यवस्था में संशय

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार एक समय ऐसा था जब भाजपा की आंतरिक रस्साकशी के चलते उन्हें गुजरात से दूर कर दिया गया था, लेकिन केशुभाई पटेल के मुख्यमंत्रित्व काल में जब गुजरात के हालात बिगड़े तो भाजपा हाईकमान ने उन्हें स्थिति संभालने के…

जनता को समाधान चाहिए

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हम यह भूल जाते हैं कि हमारी भैंस तो दरअसल हमारे जीवन से जुड़े रोजमर्रा के सवाल हैं। यानी, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य , महिला सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, पीने योग्य…

समता, ममता और महिलाएं

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार ‘राष्ट्रीय एकल नारी अधिकार मंच’ नामक इस संगठन की सदस्या महिलाओं में विधवाएं, परित्यक्ताएं, तलाकशुदा महिलाएं व ऐसी अविवाहित महिलाएं शामिल हैं जो अपने परिवार और समाज से उपेक्षापूर्ण व्यवहार का दंश झेल रही…

कैसे पाएं मनचाही सफलता

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार सफलता की कामना सब करते हैं पर ज्यादातर लोग कामना तक ही सीमित रहते हैं, वे सफल होना चाहते हैं पर सफलता के लिए कुछ करने को तैयार नहीं हैं। वे चाहते हैं कि सफलता किसी लॉटरी की तरह खुद ही उनकी झोली में आ…

सही दिशा में नहीं जा रहा देश

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार सरकार की ओर से एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स का विस्तार करके इसे देश भर में लागू करने की योजना है, इसी तरह नागरिकता संशोधन विधेयक और एक सामान्य सिविल कोड भी लाया जाएगा, इसके अलावा सर्वोच्च…

सेहत, सफलता और खुशी

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार आज हम सचमुच प्रकाश से वंचित हैं और ऐसा हमने खुद जानबूझ कर किया है। हमारे भवन ऐसे बनने लगे हैं जहां सूर्य का सीधा प्रकाश नहीं आता, आता भी है तो उसे हम मोटे-मोटे परदे लगाकर बाहर रोक देते हैं और कृत्रिम…

‘करने’ और ‘होने‘ का फर्क

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार मुझे ‘हाउ टु मेक फ्रेंड्स एंड इंफलुएंस पीपल’ का हिंदी अनुवाद ‘लोक व्यवहार’ पढ़ने को मिली। मेरे जीवन पर इस पुस्तक का गहरा प्रभाव रहा है और मेरी सफलता में इस पुस्तक की शिक्षा का भी योगदान रहा है। मेरे बड़े…

जी भर के जियो

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार जीवंत जीवन जीने के लिए आवश्यक है कि हम खुद से ज्यादा प्यार करना सीखें। खुद से प्यार करने का मतलब है कि हम अपनी सेहत पर फोकस करें, सच्चे रिश्ते बनाएं और अपना ज्ञान बढ़ाते रहें। सेहत पर फोकस में फिर तीन…

लोकतंत्र की दशा-दिशा

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार सन1945 में विश्व भर में कुल 12 देशों में लोकतंत्र था। बीसवीं सदी की समाप्ति के समय यह संख्या बढ़कर 87 तक जा पहुंची लेकिन उसके बाद लोकतंत्र का प्रसार रुक गया। कुछ देशों में दक्षिणपंथी…

युवा और बीमार देश का सच

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार मैं जब सवेरे सैर के लिए निकलता हूं तो सैर करते हुए युवाओं को देखकर मन खुशी से भर जाता है लेकिन उनमें से बहुत से ऐसे हैं जो लंबे समय से सैर कर रहे हैं पर स्वस्थ नहीं हैं। खुद मैं भी अज्ञानता का शिकार…

क्या होता है प्रधानमंत्री?

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार मंत्रियों का मुखिया ‘प्रधानमंत्री’ होता है जो पुराने जमाने में राजाओं का प्रमुख सलाहकार होता था, पर प्रधानमंत्री की भूमिका निर्णय करने की नहीं बल्कि निर्णय में सहायता के लिए सलाहकार की होती थी। लेकिन…

दिल तो बच्चा है जी

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार हमारा अवचेतन मस्तिष्क जो हमारे मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत है। दूसरा हिस्सा है चेतन मस्तिष्क जो हमारे मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत भाग है। हमारा अवचेतन मस्तिष्क खिलंदड़ा और मनोरंजन प्रिय है…

समृद्धि के नए द्वार

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है।…

भारत की संसद का सच

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार प्रधानमंत्री की असीम शक्तियों के सामने हर दूसरा व्यक्ति कठपुतली जैसा है। सांसदों के वेतन-भत्ते तथा उनको मिली अन्य सुविधाओं पर अनाप-शनाप धन खर्च होता है, लेकिन यदि 543 सांसदों में से कानून बनाने की…

बेनकाब होती जिंदगी

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार गूगल अब सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं रह गया है, बल्कि यह एक डेटा और इंटरनेट कांग्लोमेरेट बन चुका है। यह एक ऐसा दैत्य है, जो हमें लगता है कि बोतल में बंद है, पर दरअसल अब यह बोतल से बाहर है और हमारे जीवन…