Divya Himachal Logo Sep 25th, 2017

आस्था


आत्म पुराण

गीले ईधन में से आग के कारण जल निकलता जान पड़ता है, पर वहां जल का कारण अग्नि है अथवा लकड़ी का गीलापन है, इसका निश्चय करना कठिन होता है, इससे हमने अग्नि को छोड़कर वायु को ही जल का कारण मान लिया है। जैसे पुत्र का कारण जो पिता है, वह तर्क से पुत्र के पुत्र का भी कारण है। इसी प्रकार तेज कारण जो वायु है, वह तेज से उत्पन्न कार्य जल का भी कारण मानी जा सकती है।

गार्गी- हे याज्ञवल्क्य! वह वायु किस कारण में ओत प्रोत है?

याज्ञवल्क्य- हे गार्गी! वह वायु अंतरिक्ष लोक में ओत प्रोत है

गार्गी- अंतरिक्ष लोक किस कारण में ओत प्रोत है?

याज्ञवल्क्य- अंतरिक्ष लोग गंधर्व लोक में ओत प्रोत है।

गार्गी- गंधर्व वह सूर्यलोक कारण कौन सा है?

याज्ञवल्क्य- सूर्य लोक चंद्रमा लोक में ओत प्रोत है।

गार्गी- चंद्रमा लोक कारण कौन सा है।

याज्ञवल्क्य- वह इंद्र लोक में ओत प्रोत है।

गार्गी- इंद्रलोक का कारण क्या है?

याज्ञवल्क्य- वह प्रजाति लोक में ओत प्रोत है।

गार्गी- प्रजापति लोक किसमें है।

याज्ञवल्क्य- प्रजापति लोक ब्रह्म लोक में ओत प्रोत है। अब अंतरिक्ष आदि शब्दों का अर्थ भी जान लेना चाहिए। तात्पर्य यह कि अंतरिक्ष लोक से आरंभ करके जो आकाश आदि पंच भूतों के पश्चात जो गंर्धव लोक आदि अन्य बताए गए वे एक-दूसरे से अधिकाधिक सूक्ष्म अवस्थाओं के नाम हैं। इस प्रकार गंधर्व लोक से सूर्य लोक सूक्ष्म है और चंद्रमा लोक की अपेक्षा सूर्यलोक स्थूल है। ऐसा ही क्रम इंद्रलोक तक चला जाता है। अब इंद्रलोक, प्रजापति लोक और ब्रह्म लोक का अर्थ समझना चाहिए। इनमें से जो संपूर्ण दृष्टि गोचर होने वाले प्रपंच आत्मा रूप में देखे, उसे इंद्र कहते हैं। इससे इंद्र कटाह के भीतर तथा बाहर जो सूत्र आत्मा है और जिसको पारिक्षित पुरुष कहते हैं,इससे प्रजापति शब्द से उस सूत्र-आत्मा का अर्थ समझना चाहिए और माया के अज्ञान का अर्थ अव्याकृत है। यही अव्याकृत सूत्र आत्मा का आधार है। इससे ब्रह्मलोक का अर्थ अव्याकृत ही समझना चाहिए। वह अव्याकृत समष्टि और रूप से दो प्रकार का है।

गार्गी-हे याज्ञवल्क्य! वह अव्याकृत रूप ब्रह्म लोक किसी कारण में ओत प्रोत है?

याज्ञवल्क्य- हे गार्गी! यह आदंन स्वरूप आत्मा केवल शास्त्र प्रमाण से ही जानने योग्य है। इसलिए शास्त्र का प्रमाण देकर ही तुमको आत्मा का रूप पूछना चाहिए। उस मर्यादा का त्याग करके तुमने जो अनुमान-प्रमाण की रीति से यह प्रश्न किया, वह व्यर्थ ही है। क्योंकि सब का अधिष्ठान आत्मा किसी अनुमान का विषय नहीं है। आत्मा के विषय में अनुमान की रीति से पूछना अनुचित है। अगर तुम ऐसा दुराग्रह करोगे, तो तुम्हारा मस्तक गिर जाएगा। याज्ञवल्क्य के वचनों से भयभीत होकर गार्गी अरुण ऋषि के पुत्र उद्दालक की ओर देखती हुई अपने स्थान पर बैठ गई। उद्दालक ने भी भुज्यु की तरह मद्रदेश में पतंजलि की कन्या के शरीर में प्रतिष्ठ अग्नि देवता का वर्णन करके कहा कि अग्नि देवी ने उस समय हमारे गुरु और सब ब्रह्मचारियों के सम्मुख सूत्र और अंतर्यामी के स्वरूप कथन किया। तू उस सूत्र और अंतर्यामी के रूप में न जान कर जो सब ब्राह्मणों की गउओं को अपने घर ले जाएगा तो तेरा मस्तक गिर जाएगा।

September 23rd, 2017

 
 

मृत महिला से कराई जाती है शादी

आज हम आपको उस गांव के बारे में बताते हैं जहां मृत महिला से लड़कों की शादी कराई जाती है। हम बात कर रहे हैं चीन के बीजिंग शहर की। यहां परंपरा के अनुसार लड़कों की शादी मृत महिला से कराई जाती है… दुनिया में […] विस्तृत....

September 23rd, 2017

 

गीता रहस्य

स्वामी रामस्वरूप अर्जुन क्षत्रिय था। श्रीकृष्ण महाराज उसे क्ष्त्रिय धर्म का वेदों से उपदेश देकर धर्म युद्ध करने की प्रेरणा दे रहे हैं। आज हम वेदों से अपने-अपने क्षेत्र के लिए कर्त्तव्य कर्म करके ही राष्ट्र में सुख-शांति एवं भाईचारा बढ़ा सकते हैं अन्यथा वेद […] विस्तृत....

September 23rd, 2017

 

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयतेशक्ति की कल्पना प्रायः हम प्रभुत्व स्थापित करने के संदर्भों में करते हैं, परंतु शक्ति केवल प्रभुत्व के संदर्भों तक सीमित नहीं होती। विद्वान भी शक्तिशाली होता है और धनवान को भी शक्तिमान माना जाता है। संभवतः इसी कारण भारतीय मनीषा में शक्ति की  विविध […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

माँ छिन्नमस्तिका शक्तिपीठ

माँ छिन्नमस्तिका शक्तिपीठइस मंदिर में स्थापित मूर्ति के गले से दोनों ओर  से हमेशा रक्त की धारा बहती रहती हैं। जिसके कारण यह अधिक फेमस भी है। इस मंदिर को असम के कामाख्या मंदिर के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ के रूप में माना जाता […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

किरीट शक्तिपीठ

किरीट शक्तिपीठदेवताओं की अरदास सुनकर भगवान विष्णु ने देवी सती के शव को अपने चक्र से  51 टुकड़ों में बांट दिया था। इन्हीं टुकड़ों में से पहला देवी का मुकुट जहां गिरा, वही स्थल आज किरीट माता के शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है… शिव […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

धारी माता मंदिर

धारी माता मंदिरदेश के कई कोनों में प्राचीन मंदिर हैं और उससे जुड़े कई रहस्य व चमत्कार की बातें, किस्से व कहानियां लोगों से सुनने को मिलती हैं। एक ऐसा ही मंदिर है, जहां देवी की मूर्ति एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। यह […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

भ्रम विनाशिनी माँ भरमाणी

भ्रम विनाशिनी माँ भरमाणीयहां माता के दो मंदिर बने हुए हैं, एक पुराना मंदिर एवं एक नया मंदिर। बताया जाता है कि 17 अक्तूबर, 1999 की रात को माता के मंदिर में रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। पूजा के दौरान माता की पिंडी का आकार बढ़ने लगा तथा […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

विष्णु पुराण

फिर मंदराचल की रई और बासुकि नागकी नेती बनाकर अत्यंत वेगपूर्वक समुद्र में अमृत का मंथन करने लगे। जिस ओर वासु की पूंछ थी उसी और भगवान ने देवताओं को तथा मुख की ओर दैत्यों को खड़ा किया। अत्यंत तेजस्वी वासुकि नाग के मुख से […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 

आत्म पुराण

शंका – हे याज्ञावल्क्य! क्या श्रवण, मनन और निदिध्या सन आदि उपायों के बिना किसी अन्य उपाय से मनुष्य ब्राह्मण नहीं बन सकता। अगर कोई ऐसा उपाय हो तो बताओ। समाधान- हे कहोल! अभी जो श्रावण-मनन-निदिध्यास का उपाय बताया, उसके सिवाय मनुष्य और किसी तरह […] विस्तृत....

September 16th, 2017

 
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