प्रताप सिंह पटियाल

बहरहाल यदि देश की सियासी व्यवस्था गुरबत का दर्द समझने वाले कर्पूरी ठाकुर जैसे महान नेता के सियासी आदर्शों को तसलीम करने का प्रयास करे तो यकीनन देश में आदर्शवादी सियासत की मिसाल कायम हो सकती है। कर्पूरी का सियासी कद ऊंचा रहेगा...

आस्था के धरातल हिमाचल की वादियों में ड्रग्स तस्करों ने पनाह लेकर नशे के अवैध ध्ंाधे को अंजाम देकर पहाड़ की जवानी के खिलाफ खामोश युद्ध का आगाज कर दिया। नशीले पदार्थों की तस्करी में गैर हिमाचली व विदेशी लोगों की गिरफ्तारियां तस्दीक करती हैं कि राज्य में नशा नेटवर्क के ता

चीन की उल्फत में डूब कर भारत के विरोध में उतरे मालदीव के एहसान फरामोश हुक्मरानों को भारतीय सेना के उन शूरवीर पैरा कमांडोज व नौसेना तथा वायुसेना का मरहून-ए-मिन्नत रहना होगा जिन्होंने सन् 1988 में मालदीव में तख्तापलट के मंसूबों को ध्वस्त करके वहां जम्हूरियत को दोबारा कायम कर दिया था

विश्व का सबसे बड़ा खेल आयोजन ओलंपिक इसी वर्ष दस्तक देने वाला है। भारतीय कुश्ती तथा उभरते युवा पहलवानों के बेहतर भविष्य के मद्देनजर भारतीय कुश्ती महासंघ व पहलवानों के बीच चल रहे विवाद का हल निकलना चाहिए। खेल संस्थाएं सियासत के चंगुल से मुक्त होनी चाहिएं...

मैदाने जंग में दुश्मन की बहादुरी का एहतराम करके शत्रु सैनिकों को रणभूमि में खिराज-ए-अकीदत पेश करने वाले जज्बात भारतीय सेना की महानता को जाहिर करते हैं। पाक सेना से भारतीय सरजमीं को मुक्त कराने में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले ‘नग्गी युद्ध’ के शूरवीरों को सेना नमन करती है...

पश्चिमी मोर्चे पर भयंकर जंग में सेना की ‘नौ पंजाब’ बटालियन ने अमृतसर के नजदीक ‘रानियां’ क्षेत्र में पाकिस्तान की 18वीं फ्रंटियर फोर्स व पाक टैंकों के एक बड़े हमले को पांच दिसंबर 1971 के दिन सरहद के उस पार ही ध्वस्त कर दिया था। युद्ध में विशिष्ट वीरता के लिए मेडल दिए गए...

नौसेना की ‘किलर स्क्वाड्रन’ ने द्वारका का इंतकाम कराची विध्वंस करके पूरा किया था। अत: चार दिसंबर को भारतीय नेवी अपना ‘नौसेना’ दिवस मनाती है। कराची को खाक में मिलाने वाले समंदर के योद्धाओं को देश शत्-शत् नमन करता है। कराची पर हमला करके भारतीय नौसेना ने सन 1971 के युद्ध का अंजाम अवश्य ही तय कर दिया था...

सरहद के उस पार पाक सहित दुनिया के कई मुल्क भारत के खिलाफ आतंकियों की खुली हिमायत कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि देश महफूज है तो इसके पीछे शहादत के गुमनाम ज्योति स्तम्भ देश के हजारों सैनिकों का बलिदान है। रणबांकुरों का इतिहास शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा बनना चाहिए

बहरहाल 21 नवंबर 1962 को युद्ध विराम हुआ था। मौत को सामने देखकर भी मैदाने जंग में डटे रह कर फिदा-ए-वतन हो जाना, सैनिकों में सरफरोशी की इस तमन्ना को शूरवीरता की पराकाष्ठा कहें, वतन के लिए मोहिब्बे वतन के जज्बात या मुल्क की हशमत के लिए शहादत का जज्बा। वालोंग युद्ध के शूरवीरों को देश नमन करता है...

नशाखोरी के खिलाफ युद्ध का आगाज करके पहाड़ की शांत शबनम पर नशे का चिराग गुल करना होगा ताकि वीरभूमि की शिनाख्त वाले राज्य का रुतबा व शोहरत बरकरार रहे। देवभूमि की धरा नशाभूमि न बने। अपराध मुक्त समाज की कल्पना को हकीकत में बदलने के लिए नशाखोरी का नेटवर्क मरघट में तब्दील करना होगा...