राजेंद्र मोहन शर्मा, पूर्व डीआईजी

सरकार को चाहिए कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर विश्वास पैदा करने के लिए विभिन्न कानूनों में संशोधन लाए ताकि पीडि़त लोगों को न्याय मिले… पुलिस का नाम सुनते ही लोगों को एक अजीब सी घबराहट होने लग जाती है। लोग कहते हैं पुलिस की न तो दोस्ती अच्छी न ही दुश्मनी। पुलिस का नाम हर

यह बात भी सही है कि सेवा में रहते हुए हर व्यक्ति अपनी आंखों पर अहंकार व अहम की पट्टी इस तरह से बांध लेता है कि उसे अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नहीं दिखाई देता। इनसानियत की सभी हदें लांघ कर वह हैवानियत पर उतारू हो जाता है तथा मानवीय मूल्यों का तिरस्कार

यूक्रेन ने गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाया होता तथा एनपीटी पर हस्ताक्षर न किए होते तो आज वह महाशक्ति बनकर उभरा  होता… यूक्रेन यूरोप के पूर्वी हिस्से में स्थित है तथा तीनों तरफ से रूस से घिरा हुआ है। यह रूस के बाद यूरोप का सबसे बड़ा देश है। इसमें लगभग 67 प्रतिशत यूक्रेनियन, 30

मदरसों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि वह इन संस्थाओं में पढ़ रहे विद्यार्थियों के एक हाथ में लैपटॉप व दूसरे हाथ में कुरान देखना चाहते हैं। इसी तरह असम सरकार ने कुछ मदरसों को स्कूलों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है… धर्म का प्रयोग

हालांकि न्यायाधीश डर या पक्षपात के बिना न्याय करने की शपथ लेते हैं, लेकिन अपमानजनक आलोचना की आशंकाओं ने उन्हें इस मामले से हटने के लिए मजबूर कर दिया। यह ठीक है कि कुछ कनिष्ठ जजों ने समय-समय पर आपत्तिजनक निर्णय देकर अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, मगर इस मामले में कार्रवाई

इसके अतिरिक्त अकुशल व स्वार्थी सलाहकार समय रहते सरकार की कमियों के बारे में उच्च नेतृत्व को आगाह नहीं करते तथा अपनी सुख-सुविधाओं का लुत्फ उठाने में ही मशरूफ रहते हैं। अफसरशाहों द्वारा तैयार किए गए विधि-विधानों को यथावत रूप से ही लागू कर दिया जाता है तथा कई बार उनकी व्यावहारिकता की तरफ पूरा

कई बार कर्मचारियों व अधिकारियों के स्थानांतरण राजनीतिक कारणों से किए जाते हैं तथा प्रताडि़त मुलाजिमों को या तो राजनीतिज्ञों की शरण में जाना पड़ता है या फिर न्यायालयों में चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकार स्थानांतरण की नीतियों को कागजों पर तो बना लेती है, मगर इनका कार्यान्वयन नहीं किया जाता। कर्मचारियों से भेदभाव बंद

चार, समय को व्यर्थ न गंवाएं तथा समय प्रबंधन की कला को सीखंे। समय किसी का इंतजार नहीं करता तथा आगे निकलता ही चला जाता है तथा ध्यान रखें कि एक बार बहते हुए नदी के पानी को दोबारा छुआ नहीं जा सकता। समय के कुप्रबंधन से आप बहुत पिछड़ जाओगे तथा एक साधारण व्यक्ति

अपने दैनिक जीवन यापन की सारिणी बनानी चाहिए तथा परमात्मा के ध्यान में कुछ समय गुजारना चाहिए। कोई हॉबी जैसे कि संगीत, लेखन, गार्डनिंग व बच्चों को पढ़ाने इत्यादि पर समय लगाना चाहिए। समाज सेवा में भी योगदान किया जा सकता है… रिटायरमेंट एक परिर्वतन है। जिस तरह मौसम बदलता है उसी तरह मनुष्य के

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने 2015 में एक निर्णय में कहा था कि मीडिया ट्रायल न्याय को पटरी से उतार देता है तथा लोगों का न्यायपालिका पर से विश्वास उठने लगता है। न्याय वितरण में पुलिस, प्रेस व न्यायपालिका का परिपूरक रोल होता है… किसी भी संगठित व्यवस्था का आधार कानून होता