राजेंद्र मोहन शर्मा, पूर्व डीआईजी

उच्च न्यायालयों में वकील लोग लाखों रुपयों की फीस चार्ज करते हंै, भले ही फरियादी को वांछित न्याय मिले या न मिले। वकीलों का कत्र्तव्य न्याय दिलाना है...

सरकार को चाहिए कि प्रत्येक जिला मुख्यालय में ऐसे टेस्ट की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं ताकि निजी अस्पतालों का एकाधिकार खत्म हो...

कई पीडि़त लड़कियां अपने साथ हुए यौन शोषण-छेडख़ानी की घटनाओं को हल्के से लेती हैं… बाल अपराधों को रोकने के लिए समय-समय पर सख्त से सख्त कानून भी बनाए गए, मगर फिर भी ऐसे घृणित अपराधों में कोई कमी नहीं आई है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के अपराध बड़े लंबे

जनता को पुलिस की मजबूरियों को समझना चाहिए तथा उसके हर कार्य में एक सारथी व सहयोगी की तरह काम करना चाहिए… पुलिस की आलोचना तो हर कोई करना जानता है तथा हर काम के लिए पुलिस को ही बलि का बकरा बनाया जाता है। न्याय दिलवाने के लिए पुलिस ही पहली चौखट होती है

संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जनता को जल्द न्याय मिलने के मौलिक अधिकार के तहत अदालतों की खुली कार्यवाही देखने का भी अधिकार है, मगर ऐसा अदालतें होने नहीं देती… पुलिस एवं न्यायालय दोनों न्याय के सोपान होते हैं। पीडि़त व्यक्ति के लिए जहां पुलिस न्याय का पहला पड़ाव है, वहां न्यायालय एक आखिरी

यदि कानून व्यवस्था की स्थिति को दुरुस्त रखना है तो दोषसिद्धि की दर बढ़ानी होगी… अपराध एक सामाजिक बुराई है तथा अतीत से ही समाज इससे ग्रसित रहा है। ज्यों-ज्यों मनुष्य स्वार्थ और भौतिकवाद की ओर प्रवृत्त हुआ, त्यों-त्यों हर प्रकार के अपराधों में वृद्धि होती चली गई। मानव मूल्यों में गिरावट आने से अनैतिक

वास्तव में आत्म सुरक्षा का अधिकार एक प्रतिरोध है और इसे अधिनियमित किया है… हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी समय और किसी भी परिपे्रक्ष्य में गुस्सा आना स्वाभाविक है। जब गुस्सा व आक्रोश एक सीमा से ऊपर चला जाता है तो व्यक्ति का व्यवहार हिंसक हो जाता है तथा विधि द्वारा

पुलिस को ही बलि का बकरा न बनाकर अन्य विभाग भी अपने दायित्व को समझें… किसी भी समाज की व्यवस्था, विकास और सुरक्षा के लिए पुलिस बल जैसी संस्थाओं का होना अति आवश्यक होता है। पुलिस तंत्र आदिकाल से ही शासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्यरत रहा है तथा पुलिस विभाग हमेशा अच्छाइयों व

यदि अधिकतर लोग इन शातिर लोगों की हरकतों पर अपनी पैनी निगाह रख पाएं तो राजनेता व नौकरशाह भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे… महंगाई आम आदमी के जीवन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा होता है जो पूरे आर्थिक ढांचे को प्रभावित करता है। पिछले कुछ वर्षों से चलती आ रही महंगाई का मुख्य कारण आपूर्ति की

भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार ही देश के हित में लोगों का भला कर सकती है… राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार समाज की आर्थिक व्यवस्था को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है तथा यही भ्रष्टाचार समाज के अंग-अंग में बस कर आम जनता को त्रस्त करता है। वास्तव में भ्रष्टाचार इन दोनों संगठनों की परस्पर सांठगांठ से ही