राजेंद्र मोहन शर्मा, पूर्व डीआईजी

वास्तव में आत्म सुरक्षा का अधिकार एक प्रतिरोध है और इसे अधिनियमित किया है… हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी समय और किसी भी परिपे्रक्ष्य में गुस्सा आना स्वाभाविक है। जब गुस्सा व आक्रोश एक सीमा से ऊपर चला जाता है तो व्यक्ति का व्यवहार हिंसक हो जाता है तथा विधि द्वारा

पुलिस को ही बलि का बकरा न बनाकर अन्य विभाग भी अपने दायित्व को समझें… किसी भी समाज की व्यवस्था, विकास और सुरक्षा के लिए पुलिस बल जैसी संस्थाओं का होना अति आवश्यक होता है। पुलिस तंत्र आदिकाल से ही शासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्यरत रहा है तथा पुलिस विभाग हमेशा अच्छाइयों व

यदि अधिकतर लोग इन शातिर लोगों की हरकतों पर अपनी पैनी निगाह रख पाएं तो राजनेता व नौकरशाह भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे… महंगाई आम आदमी के जीवन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा होता है जो पूरे आर्थिक ढांचे को प्रभावित करता है। पिछले कुछ वर्षों से चलती आ रही महंगाई का मुख्य कारण आपूर्ति की

भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार ही देश के हित में लोगों का भला कर सकती है… राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार समाज की आर्थिक व्यवस्था को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है तथा यही भ्रष्टाचार समाज के अंग-अंग में बस कर आम जनता को त्रस्त करता है। वास्तव में भ्रष्टाचार इन दोनों संगठनों की परस्पर सांठगांठ से ही

उंगली पकडऩे वाले जब नजर नहीं आते तो आंखें धुंधला जाती हैं। मां-बाप एक ऐसी नेमत है जो एक बार छिन जाए तो दोबारा लौट कर कभी नहीं आती… माता-पिता अपनी हर खुशी का त्याग कर अपने बच्चों की देखभाल करते हैं तथा हमेशा उनकी फिक्र करते रहते हंै। संसार में सबसे पवित्र रिश्ता मां-बाप

भारत का विदेशी कर्ज वित्त वर्ष 2022 के दौरान 8.2 प्रतिशत बढ़ोतरी की दर पर 620.7 अरब डालर हो गया है। हर भारतीय पर 32 हजार कर्ज है… जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, सभी राजनीतिक दल अपने मतदाताओं को थोड़े समय के लिए रिझाने के लिए बहुत ही आकर्षक चुनावी वायदों की घोषणा करनी

सुरक्षा परिषद के यह पांच बड़े देश किसी अन्य देश को स्थायी सदस्य नहीं बनने देंगे तथा विश्व में अन्य देशों को आपस में लड़ाते रहेंगे… दूसरे महायुद्ध की विभीषिका को रोकने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति रुजवेल्ट ने पहल करते हुए 51 देशों के साथ मिलकर एक चार्टर पर हस्ताक्षर करवाए तथा 24 अक्तूबर

भ्रष्टाचार रोकने के लिए कुछ सुझाव इस तरह हैं : इसे रोकने के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि केवल कानूनों के माध्यम से ही इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। जापान देश की तरह भारत में भ्रष्ट राजनीतिज्ञों व नौकरशाहों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए… धन की लिप्सा ने आज

सरकार को चाहिए कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर विश्वास पैदा करने के लिए विभिन्न कानूनों में संशोधन लाए ताकि पीडि़त लोगों को न्याय मिले… पुलिस का नाम सुनते ही लोगों को एक अजीब सी घबराहट होने लग जाती है। लोग कहते हैं पुलिस की न तो दोस्ती अच्छी न ही दुश्मनी। पुलिस का नाम हर

यह बात भी सही है कि सेवा में रहते हुए हर व्यक्ति अपनी आंखों पर अहंकार व अहम की पट्टी इस तरह से बांध लेता है कि उसे अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नहीं दिखाई देता। इनसानियत की सभी हदें लांघ कर वह हैवानियत पर उतारू हो जाता है तथा मानवीय मूल्यों का तिरस्कार