मोदी को नया नेहरू बनाने से पहले जरा सोचें

भानु धमीजा (सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) जब मजबूत विपक्ष की बात आती है तो मोदी का दृष्टिकोण नेहरू से पूरी तरह भिन्न है। जहां नेहरू ने एक बार कहा था, ‘‘मैं ऐसा…

भारत में द्वि-दलीय राजनीति क्यों नहीं

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) किसी भी देश में एक स्वस्थ राजतंत्र के निर्माण के लिए द्वि-दलीय व्यवस्था आवश्यक है। मुद्दों पर बहुमत का नजरिया जानने की…

‘एक भारत, एक चुनाव’ लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन

भानु धमीजा ( भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ ) लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं चुनावों पर आधारित एक देश में चुनावों की संख्या कम करना कुछ विचित्र है। क्या भारत के लोकतंत्र से भी अधिक…

‘सीमित सरकार’ से जनमानस मजबूत

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं वर्ष 1963 में न्यायमूर्ति सरकारिया, जिन्हें केंद्र-राज्य संबंधों के अध्ययन को नियुक्त किया गया था ने रिपोर्ट दी कि ‘‘केंद्र…

फिर एक बार व्यवस्था ने जनता को पछाड़ा

भानु धमीजा ( सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) नौकरशाही को दोष देना तर्कसंगत भी नहीं है, क्योंकि अधिकतर अफसर हमारे मंत्रियों की पसंद से रखे जाते हैं। मोदी की भी…

विमुद्रीकरण अव्यवस्थाः संस्थाओं की बजाय व्यक्तियों पर निर्भर हैं हम

भानु धमीजा ( सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) विमुद्रीकरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी व्यक्तिगत नीति के रूप में पेश किया है। उन्होंने इसे यह कहकर उचित ठहराया…

ट्रंप का चुनाव भारत के लिए उदाहरण

भानु धमीजा लेखक ( सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) दो वर्ष, एक अरब डॉलर और बेशुमार ऊर्जा लगाकर भी देश ने केवल ‘सबसे कम बुरा विकल्प’ ही चुना है। फिर भी, अमरीका को…

ओबामा दिखाते हैं भारत क्यों अपनाए राष्ट्रपति प्रणाली

 भानु धमीजा लेखक ( सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) अमरीका के राष्ट्रपति के पास केवल कार्यकारी अधिकार हैं। विधायी एजेंडा कांग्रेस द्वारा नियंत्रित होता है, जो…

‘कश्मीरियत, जम्हूरियत, इनसानियत’: सोची-समझी रणनीति

भानु धमीजा लेखक ( सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) प्रधानमंत्री वाजपेयी ने उक्त नारा 2003 में कश्मीर में एक भाषण के दौरान दिया था। उन्होंने संसद में इसकी व्याख्या की…

थरूर के ‘अध्यक्षीय’ विधेयक पर ध्यान देना जरूरी

भानु धमीजा लेखक ( चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) शहरी स्थानीय निकायों को स्वशासन की संस्थाएं बनाने को 20 वर्ष पूर्व किया गया 74वां संविधान संशोधन असफल रहा है। लेकिन अब उम्मीद दिख रही है।…

स्वायत्त राज्यों से ही मजबूत बनेगा भारत

भानु धमीजा लेखक ( चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) सच्चाई यह है कि ‘‘अनेकता में एकता’’ के भेस में विविध जनता को एक संघ में बलपूर्वक शामिल करने से बात नहीं बनती। बात इससे बनेगी कि…

भारतीय नौकरशाही योग्यता-आधारित नहीं हो सकती

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं सच्चाई यह है कि भारत की नौकरशाही, हर अन्य चीज की तरह, भारत की कमजोर राजनीतिक व्यवस्था से त्रस्त है। इस व्यवस्था में मूलभूत…

भारतीय एक सच्चा संघ चाहते हैं, मिथ्या नहीं

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं दरअसल, राज्य सरकारों को केंद्र के अधीन लाना, या इसके विपरीत, राज्य चुनावों को केंद्र सरकार के प्रति जनमत संग्रह बनाना…

अंबेडकर का ‘संयुक्त राज्य भारत’

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) अंबेडकर ने ‘संयुक्त राज्य भारत’ का अपना प्रस्ताव संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष का कार्य प्रारंभ करने से सात माह पूर्व प्रस्तुत किया था। उस समय…

भारत में कानून प्रक्रिया मूलतः दोषपूर्ण

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) भारत को कमजोर कानून नसीब होते हैं। सुघड़ सियासत के बल पर खराब कानून पास हो जाते हैं, जबकि खरे कानून छटपटाते रहते हैं अथवा नामंजूर हो जाते हैं।…