पीके खुराना

हमारे देश में तो बहुत छोटी कक्षाओं से ही यह सिलसिला आरंभ हो जाता है कि बच्चे के प्रोजेक्ट उनके मां-बाप, भाई-बहन पूरे करते हैं, साइंस की प्रेक्टिकल की कापियां कोई और बनाता है, पुराने शोधपत्र उठाकर कई बार तो सिर्फ  नाम बदल कर जमा करा दिए जाते हैं। ऐसे बच्चे जिन्हें व्यावहारिक ज्ञान है

इस समस्या से बचने का एक ही तरीका है कि हम कुटीर उद्योगों पर फिर से ध्यान दें, उन्हें तकनीक का लाभ लेना सिखाएं। दस्तकारों को प्रोत्साहित करें, उनका सामान खरीदें और उसके निर्यात के लिए अधिक से अधिक बाजार ढूंढें। यह सच है कि भविष्य में तकनीक सिर्फ  एक सपोर्ट-सिस्टम न रहकर उद्योगों की

यदि आप एवरेस्ट विजय करना चाहते हैं तो आप सैर करते हुए वहां नहीं पहुंच सकते। परिवर्तन की मानसिक यात्रा हमें सफलता की ओर ले चलती है। यदि हमें जीवन की बाधाओं से पार पाना है और सफल होना है तो हमें इस मानसिक यात्रा में भागीदार होना पड़ेगा जहां हम नए विचारों को आत्मसात

पी. के. खुराना राजनीतिक रणनीतिकार भारतीय संस्कृति में गणेश जी की बड़ी महत्ता है। हर कार्य की शुरुआत से पहले गणेश वंदना द्वारा कार्य की सफलता की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी सफलता की शुरुआत हैं। आज हम सफल जीवन के रहस्यों की जानकारी की शुरुआत भी गणेश जी से ही करेंगे। घबराइए मत,

टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोट और निजी कारणों से आस्ट्रेलिया के खिलाफ  सीरीज़ में शामिल नहीं थे। इसके बावजूद टीम इंडिया ने जुझारू प्रदर्शन किया और लगातार दूसरी बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की है। भारत के इस जीत के चर्चे अमरीका, इंग्लैंड और पाकिस्तान में भी सुनाई दिए। कई प्रमुख विदेशी अखबारों ने

देश को गरीबी के गर्त से निकालने के लिए यह आवश्यक है कि बचपन से ही बच्चों को उद्यमिता का पाठ पढ़ाया जाए, उद्यमिता के गुरों की जानकारी दी जाए, प्रतियोगिता को समझने और प्रतियोगिता के बावजूद अपने लिए नई पोज़ीशनिंग ढूंढने की कला किसी व्यवसाय की सफलता की गारंटी है। सवाल सिर्फ  यही है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रयोग के कारण अब इनसान के बजाय मशीनें आपस में ज्यादा बातें करेंगी और प्राइवेसी की समस्या और भी गहराएगी। यहां तक तो ठीक था, पर अब हमारी निजता ही नहीं, हमारा धन भी चोरों-ठगों-हैकरों के निशाने पर है। हम जानते हैं कि कुछ माह पूर्व दक्षिण कोरिया की लगभग आधी

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार लेकिन यह कैसे होगा? यह तब होगा जब हम सरकार पर निर्भर होना छोड़ेंगे, सरकार को कोसना बंद करेंगे, नौकरशाही को दोष देने के बजाय खुद को दोष देंगे, गुस्सा तो आएगा, पर दूसरों पर नहीं, बल्कि खुद पर। यह तब होगा, जब हमारा व्याकरण बदलेगा और हम कहेंगे, ‘हां, मैं

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार सुचित्व मिशन के अधिकारियों का कहना है कि यह विधि पर्यावरण रक्षा के लिए उपयोगी और सटीक है तथा इसे बड़े स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। हमारे देश में अव्वल तो प्रशासनिक अधिकारी ही इतनी अड़चनें डालते हैं कि कोई काम करना मुश्किल हो जाता है और यदि किसी तरह से