
नाशपाती पौष्टिक गुणों से भरपूर फल है, जिसका आयुर्वेद में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। ये न सिर्फ त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है, बल्कि कई तरह की बीमारियों को ठीक...
बढ़ते समय के साथ लोगों में तनाव और एंग्जायटी के मामले इतने ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं कि मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। काम का दबाव, आर्थिक चिंता, खराब नींद और लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने जैसी आदतें मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों में बिना किसी बड़ी वजह के भी घबराहट, बेचैनी, दिल की धडक़न का तेज होना या लगातार तनाव बने रहना जैसी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। यदि इन लक्षणों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव डायबिटीज, नींद की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर इम्युनिटी और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और मिनरल्ज की कमी भी तनाव और एंग्जायटी की एक वजह हो सकती है। ऐसे में कुछ जरूरी पोषक तत्त्वों की कमी पूरी करके आप एंग्जायटी को मैनेज कर सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश की वादियों में अब सिर्फ बाइक और कारों की रफ्तार ही नहीं, बल्कि साइकिल के पहिए भी तेजी से घूम रहे हैं। प्रदेश में युवाओं के बीच साइकिलिंग का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते बड़ी संख्या...
जुलाई की यह चिपचिपी गर्मी और हवा में घुली उमस अच्छे-भले स्किन केयर रूटीन की बैंड बजा देती है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि घर से निकलते ही चेहरा एकदम ऑयली, चिपचिपा और कुछ ही देर में काला दिखने लगता है।
आंचल चौहान—शिमला हिमाचल में बरसात की शुरुआत के साथ ही स्क्रब टायफस, डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में तेज बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही अस्पताल में जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है। इंदिरा
बारिश के मौसम में बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें हमेशा घर का बना ताजा और पौष्टिक भोजन दें और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिलाएं। कपड़ों और हाथों की सफाई का पूरा ध्यान रखें।
मुकेश संगर—चंडीगढ़ ट्राइसिटी, हिमाचल प्रदेश एवं हरियाणा में मशहूर नेत्र चिकित्सक एवं दृष्टि आई हॉस्पिटल पंचकूला के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अर्जुन गुप्ता कहते हैं कि मोतियाबिंद हो जाए तो उसे टालना ही नहीं चाहिए, क्योंकि इससे बीमारी बहुत गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती है। समय पर उपचार महत्वपूर्ण है क्योंकि समय के साथ मोतियाबिंद खराब
सुबह उठते ही मोबाइल और रात को सोने तक स्क्रीन... बदलती जीवनशैली अब आंखों की रोशनी पर भारी पडऩे लगी है। मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट का लगातार बढ़ता इस्तेमाल लोगों को डिजिटल आई सिंड्रोम जैसी गंभीर समस्या की ओर धकेल रहा है। सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल में हर दिन 25 से 30 मरीज आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब एक साल तक के मासूम बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा कॉलेज के युवा, आईटी और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी, शिक्षक...
सोलन शहर में महिलाओं के बीच जुम्बा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पहले जहां महिलाएं फिट रहने के लिए केवल सुबह-शाम टहलने या योग का सहारा लेती थीं, वहीं अब बड़ी संख्या में महिलाएं जुम्बा क्लास से जुड़ रही हैं। संगीत की धुन पर किए जाने वाले इस फिटनेस वर्कआउट ने...