किस वजह से खुशी मनाए चंबा

*औद्योगिक विकास शून्य, सीमेंट कारखाना बना चुनावी स्टंट *स्वास्थ्य-शिक्षण संस्थानों में स्टाफ का अभाव *परियोजना प्रभावित न्याय के लिए काट रहे अदालतों के चक्कर *चंबा-पठानकोट मुख्य मार्ग आज तक नहीं हुआ डबललेन *सुविधाएं न होने से…

सियासत में कई सितारे विकास करवाने में हारे

चंबा की राजनीति में अधिकांश समय कांग्रेस का ही आधिपत्य रहा है। जिला के पांच हलकों में कांग्रेस व भाजपा में सीधी टक्कर होती है। भरमौर, चुराह व भटियात ही ऐसे हलके रहे हैं, जहां कांग्रेस के बागियों ने बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़कर रण जीता…

कांगड़ा क्या खोया , क्या पाया

वीरभूमि के नाम से मशहूर कांगड़ा जिला विकास के रथ पर सवार है। देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के जिला को जहां एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम, बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा और चाय बागानों ने विश्व में…

शिमला क्या खोया क्या पाया

बेजोड़ खूबसूरती और स्वादिष्ट सेब की बदौलत शिमला हर दिल में बस गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों होने के बाद भी जिला हर क्षेत्र में आगे है। पर्यटन और सेब ने जहां इसे विश्व स्तरीय पहचान दिलाई तो अंग्रेजों का बसाया शहर शिमला कई…

किन्नौर क्या खोया क्या पाया

अनोखी और ऐतिहासिक परंपराएं संजोए जनजातीय जिला किन्नौर विकास के मामले में बाकी जिलों से पीछे नहीं है। यह उन मेहनतकश लोगों का कमाल है, जिन्होंने कठिन पहाड़ी क्षेत्र की सच्चाई को झुठलाकर सेब और मटर को अपनी तरक्की का जीवन साथी बनाया। जिन गांवों…

लाहुल-स्पीति क्या खोया क्या पाया

बेजोड़ खूबसूरती और विश्व स्तरीय जानकारियां समेटे लाहुल-स्पीति जहां क्षेत्रफल के लिहाज से प्रदेश में सबसे बड़ा है, वहीं 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिंग अनुपात में देश भर में पहले स्थान पर है। आलू-मटर के जरिए बेशक शीत मरुस्थल तरक्की की ओर कदम…

मंडी क्या खोया क्या पाया

देव परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं की मंडी बलिदान और शौर्य का इतिहास समेटे हुए है। शिवरात्रि ने जहां इसे विश्व भर में पहचान दिलाई, वहीं देवताओं के प्रति अपार श्रद्धा ने इस जिला को छोटी काशी बना दिया। सियासत में भी अहम भूमिका निभाता आया मंडी…

खूबसूरती बेशुमार, पर पर्यटन को चाहिए निखार

ऐसी सुंदर वादियां और ऐसे धार्मिक स्थल, जो कि दूसरे जिलों में देखने को नहीं मिलेंगे, बावजूद इसके मंडी जिला पर्यटन मानचित्र में उभर नहीं पाया। जिला से हर वर्ष लाखों पर्यटक गुजरते हैं, लेकिन रुकते महज दस प्रतिशत है। बरोट, झंटीगरी, फुलाधार,…

मंडी ने दी पहली गैर कांग्रेस गठबंधन सरकार

हिमाचल में कांगड़ा के बाद राजनीति में मंडी जिला का सबसे अधिक महत्त्व है। 10 विधानसभा क्षेत्रों के कारण मंडी जिला हमेशा सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम रहा है। यह वही जिला है कि जिसने प्रदेश में पहली बार हिविकां के नेतृत्व में गैर कांग्रेस…

सोलन क्या खोया क्या पाया

पहली, सितंबर 1972 को अस्तित्व में आए सोलन जिला मेें तरक्की के पहिए तो घूमे, पर हरियाली को कुचलते  भी चले गए। समस्याओं के अंबार से घिरे व कंकरीट की ऊंची इमारतों ने शहर की आबोहवा में जहर घोल दिया।  हालांकि उद्योग जगत ने बीबीएन-परवाणु जैसे…

पार्किंग-सीवरेज-पानी की टेंशन

सोलन शहर की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है।  करीब 40 हजार वाहन प्रतिदिन शहर की सड़कों पर दौड़ते हैं, मुश्किल से यहां दस हजार वाहनों के लिए भी पार्किंग नहीं मिलती। अधिकतर वाहन या तो सड़क किनारे या फिर गली-मोहल्लों में पार्क होते हैं। शहर के…

विकास बेशुमार, पर समस्याओं का अंबार

जिला ने औद्योगिक क्षेत्र के रूप में देश भर में पहचान बनाई है। देश की कई जानी मानीं निजी कंपनियां यहां पर स्थित हैं। करीब पांच हजार निजी उद्योग वर्तमान में जिला में चल रहे है, जहां हजारों हिमाचली रोजगार से जुड़े हैं। प्रदेश के सबसे बड़े…

सिरमौर क्या खोया क्या पाया

प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार का गृह जिला जहां खेल जगत, अदरक और पुष्प उत्पादन के साथ स्वच्छता में सिरमौर है, वहीं विकास के पिछड़ेपन में भी सबको पछाड़ता है। रियासतकाल में उत्तरी भारत में मिसाल रहा यह क्षेत्र भगवान परशुराम,…

ऊना

क्‍या खोया क्‍या पाया युग-युगांतरों से देवभूमि के रूप में विख्यात ऊना जिला धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है, वहीं स्वां की लहरों को बांध कृषि व बागबानी में भी लगातार आगे बढ़ रहा है। इन्हीं के दम पर निरंतर तरक्की की राह पर…

प्रदेश की सियासत में ऊना की अहमियत

भाजपा-कांग्रेस में होती है सीधी टक्कर जिला सदैव प्रदेश की राजनीति की धुरी रहा है। मौजूदा समय में जिला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में युवा नेतृत्व ने मजबूती से अपनी पकड़ कायम की है। जिला में भाजपा व कांग्रेस के मध्य सभी पांचों सीटों पर…