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संचार का सृजन करती पुस्तक

संचार को सनातन संचार बनाने के सरोकारों, सूचना-संवाद से प्रकट होती बौद्धिकता तथा उस पर वक्त के प्रभाव से जूझती एक किताब ‘सम्पूर्ण संचारविद्- आचार्य अभिनवगुप्त’ अपने साथ कई मौलिक प्रश्न लेकर आई है। अतीत के दर्शन और पुस्तक की परिक्रमा में लेखक…

दो लघुकथाएं

पुण्य प्रत्येक दीपावली पर शहर के प्रतिष्ठित नेताजी शहर के वृद्धाश्रम में जाकर दीन-दुखियों में वस्त्र बांटते। इस बार बड़े व्यथित थे कि उनके हाथों कुछ पुण्य नहीं हो पाएगा। वजह बहुत स्पष्ट थी। उनके लिए वसूली करने वाले शहर के मशहूर गुंडे कल्लू…

दीपों की बारात

दीपावली की रात झिलमिल-झिलमिल दीपों की बारात लगती ऐसे जैसे सज-धज के निकली हो प्रिय के द्वार लग्न मंडप में फुलझडि़यां हंस रही हौले-हौले संग अनार अद्भूत रूप धरकर दीपावली की रात पैरों में महावर रचाए झूम रही अमावस की रात घूंघट की ओट से मंद-मंद…

भगिनी निवेदिता

भगिनी निवेदिता का मूल नाम ‘मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल’ था। वे एक अंग्रेज-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, शिक्षक एवं स्वामी विवेकानंद की शिष्या थीं। भारत में आज भी जिन विदेशियों पर गर्व किया जाता है, उनमें भगिनी निवेदिता का नाम पहली पंक्ति में…

साहित्य की नई श्रेणी को नोबेल

इस वर्ष साहित्य का नोबेल पुरस्कार बॉब डायलन को प्रदान किया गया है। डॉयलन साहित्य की परंपरागत श्रेणियों में फिट नहीं बैठते। वह गायक और गीतकार दोनों हैं। उनकी पहचान एक मर्मस्पर्शी लोकगायक की रही है। डायलन को यह पुरस्कार मिलना इसलिए अलग हो…

एक कविता बेटी जैसी

पुस्तक  :  जरूरत भर सुविधा लेखिका :             चंद्ररेखा डढवाल प्रकाशक  :           अंतिका प्रकाशन, गाजियाबाद मूल्य       :          250 रुपए कविता के जहन में कवि की छाया जो आकार बनाती है, उन्हीं रेखाओं में शब्द का हर प्रवाह एक हकीकत का…

पहाड़ों पर उतरती सर्दी

ओस से धुले सुंदर गेंदा फूल सम्मोहित करती पंखुडि़यां उनकी अदृश्य खुशबू स्लेट के छप्पर से लटकती लौकी, तुरई, खीरे, कद्दू की पीली पड़ती बेल । पकी घास आंगन खेत-खलिहान में बिखरी, कटी छोड़ती भीनी-भीनी सुवास पछाड़ती फूलों की महक जैसे बिखेर रही हो…

पुस्तक समीक्षा

लोकनाट्य पर प्रामाणिक अध्ययन पुस्तक : धाज्जा,  करियाला एवं बरलाज मूल्यः 195 रुपए लेखक : अमर देव आंगिरस प्रकाशक : दयावंती प्रकाशन अंगिरा भवन,  दाड़लाघाट (सोलन) लोकनाटक लोकमानस की अंतरंग तरंगों एवं भावनाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति के साधन होते…

अछूती आलोचना को छूते आग्रह

हिमाचल में आजकल रचनात्मक साहित्य तो खूब लिखा जा रहा है, पर अच्छे आलोचनात्मक लेखन की कमी है। आलोचक लगभग चुप हैं और स्तुति-निंदा को आलोचना का नाम दिया जा रहा है। असल में आलोचना, रचना और रचनाकार के द्वारा पाठकों को दुनिया की पहचान कराती है...…

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उनके छंद, भाषा, शैली, भाव संबंधी नव्यतर दृष्टियों ने नवीन काव्य को दिशा देने में सर्वाधिक…

विश्वभाषा बनती अपनी हिंदी

हिंदी भाषा आज महज संवाद का माध्यम भर नहीं रह गई है बल्कि यह हमारी पहचान बन चुकी है। बदलते समाज एवं व्यापक होती जरूरतों के बीच हिंदी ने तेजी से अपने पंख पसारे हैं जो कि हिंदी भाषा के विकास के लिए शुभ संकेत हैं। ‘कम्प्यूटर एवं स्मार्टफोन’ में…

कौन सी हिमाचली

विद्वान फुल्ल जी के ‘खोया ही खोया, पाया कुछ नहीं’ के कथन से असहमत होते हुए मुझे बड़ी विनम्रता से कहना है कि लम्हों की भूलें, सदियों को झेलनी पड़ती हैं। और यह भी कि ये भूलें जनसाधारण से नहीं, उस समय के समझदार कारकूनों से होती हैं। जब इन…

चिनारों की पीड़ा

कैसी हालत है जन्नत की पूछो आज चिनारों से रहना धरा पर सीख न पाए बतियाते चांद सितारों से केसर के जो फूल उगे क्यों जलते अंगारों से लहूलुहान है वादी सारी झेलम बहे किनारों से अमन चैन हो घाटी में अब गूंजे सदा मीनारों से बशर सियासत के पारों में अब…

एसआर रंगनाथन

शियाली रामअमृत रंगनाथन एक विख्यात पुस्तकालाध्यक्ष और शिक्षाशास्त्री थे। उन्हें भारत में पुस्तकालय विज्ञान का अध्यक्ष व जनक माना जाता है।पुस्तकालय विज्ञान के लिए रंगनाथन का प्रमुख तकनीकी योगदान वर्गीकरण और अनुक्रमणीकरण (इंडेक्सिंग) सिद्धांत…

श्रीपाद दामोदर सातवलेकर

श्रीपाद दामोदर सातवलेकर का बीसवीं शताब्दी के भारतीय सांस्कृतिक उन्नयन में विशेष योगदान रहा था। वे वेदों का अध्ययन करने वाले शीर्षस्थ विद्वान थे। वेदों के अर्थ और आशय का जितना गंभीर अध्ययन और मनन सातवलेकर जी ने किया था, उतना कदाचित ही किसी…
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