Divya Himachal Logo May 26th, 2017

प्रतिबिम्ब


काका कालेलकर

काका कालेलकर भारत के प्रसिद्ध गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद, पत्रकार और लेखक थे। प्रारंभिक दौर में काका कालेलकर देश की मुक्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष के पक्षपाती थे। 1915 ई. में गांधी जी से मिलने के बाद ही इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गांधी जी के कार्यों को समर्पित कर दिया। गुजराती भाषा पर भी इनका अच्छा ज्ञान था। उन्होंने कुछ समय तक गुजराती पत्र ‘नवजीवन’ के संपादक का दायित्व भी संभाला …

August 21st, 2016

 
 

साहित्य और स्वतंत्रता का मेल

जसौर गांव में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अद्भुत संयोग देखने को मिला। प्रातःकालीन सत्र में लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्णकांत ने ध्वजारोहण किया। तत्पश्चात रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम विभिन्न महिला मंडलों, स्कूली बच्चों तथा स्थानीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए। इस सत्र […] विस्तृत....

August 21st, 2016

 

एक ट्वीटी संवेदना अपनी भी

जब भी आतंकवादियों द्वारा निर्मम हत्या का खेल खेला जाता है तो मेरे अंदर का वही बच्चा मुझ पर हावी हो जाता है। पर अब मैं बच्चा नहीं बचा, दुनिया भी बदल गई है न तो किसी को मेरा खून चाहिए न ही चंदा। मुझे […] विस्तृत....

August 21st, 2016

 

मां

वो हाथ पकड़ के तेरा, एक कदम उठाना, जो तू न थामे तो झट से गिर जाना, फिर ममता भरी निगाहें, मेरी तरफ उठाना और मुझे बेटा कह कर बुलाना, आज तू पास नहीं तो सब सताता है मुझे मां तेरा हर अफसाना याद आता […] विस्तृत....

August 21st, 2016

 

अमरभाषा है संस्कृत

सभी भाषाओं में एकवचन और बहुवचन होते हैं, जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है। संस्कृत भाषा की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है संधि। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं, तो वहां संधि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है। इसे कम्प्यूटर अर्थात […] विस्तृत....

August 21st, 2016

 

कहानी कंदरौर पुल की

सभ्यताओं, दो संस्कृतियों और दो ऐतिहासिक स्थानों को आपस में जोड़ कर नव सृजन करता है। निर्मित पुलों की फेहरिस्त में असंख्य नाम हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला में कंदरौर नामक स्थान पर निर्मित कंदरौर पुल का अपना एक अमूल्य एवं समृद्ध इतिहास […] विस्तृत....

August 14th, 2016

 

वह शहर

वह शहर अब वीरान हो गया नहीं रहते अब वहां आदमी क्योंकि आदमी अब आदमी का ही दुश्मन हो गया। राज करते हैं वहां अब घुसपैठिए और आतंकवादी चारों तरफ दहशत और मौत का साया हो गया। नहीं भरते बच्चे किलकारियां। नहीं गाती अब माताएं […] विस्तृत....

August 14th, 2016

 

बरसात में

बरसात में वह हरियाली सा बिछ जाता है चहुंओर बादलों सा बरसता है दूर-दूर तक धुंध सा छा जाता है हर कोने कछार में रिमझिम के मधुर स्वरों में गूंजता है एक गीत सा भीगी-हवाओं सा हो जाता है किसी याद मे धीरे-धीरे बागों में […] विस्तृत....

August 14th, 2016

 

सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म नागपंचमी के दिन 16 अगस्त, 1904 को इलाहाबाद के पास निहालपुर गांव में हुआ था। सुभद्रा कुमारी की काव्य प्रतिभा बचपन से ही सामने आ गई थी। आपका विद्यार्थी जीवन प्रयाग में ही बीता। सुभद्रा और महादेवी वर्मा दोनों बचपन […] विस्तृत....

August 14th, 2016

 

आखिरी पड़ाव पर लोक काव्य

अब तो यह धरोहर सुरक्षित है केवल उन ग्रामीण वृद्धाओं के पास जो अगले लोक के द्वार पर बैठी हैं। नई पीढ़ी के पास न तो ऐसे अवसर हैं, न दिलचस्पी है। न ही अब समाज में ऐसे अवसर जुटाए जाते हैं, जहां ऐसी धरोहर […] विस्तृत....

August 7th, 2016

 
Page 20 of 163« First...10...1819202122...304050...Last »

पोल

क्या कांग्रेस को हिमाचल में एक नए सीएम चेहरे की जरूरत है?

View Results

Loading ... Loading ...
 
Lingual Support by India Fascinates