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प्रतिबिम्ब


कविता

भेदी

नैया खाए है हिचकोले,

घोर तिमिर में यह डोले।

भटकी रास्ता ऊंची लहरें,

भेदी, भेद नहीं क्यूं खोले?

चप्पू चलते आगे बढ़ती,

नीचे उतरे ऊपर चढ़ती,

चलती- चलती कभी हंसाती,

कभी रुलाती पर,

भेदी भेद नहीं है खोले। …

मैंने कितने पतझड़ देखे,

विधि के लिखे अनुपम लेखे,

लोग लुगाई दौड़े-दौड़े,

मेहनत कड़ी के फल हैं थोड़े,

भेदी भेद नहीं क्यूं खोले। …

नैया खेवै कौन खेवैय्या,

नाच नचाए ता-ता-थैय्या,

अंधियारे में है उजियार,

भेदी वहीं है मेरे यार,

फिर भी भेदी भेद न खोले।।…

— नवीन शर्मा ‘नवीन’, गांव/पत्रालय गुलेर, तह देहरा, जिला कांगड़ा

November 13th, 2016

 
 

नागार्जुन

30 जून सन् 1911 को जन्मे वैद्यनाथ मिश्र ने अपनी फकीरी और बेबाकी से अपनी अनोखी पहचान बनाई। कबीर की पीढ़ी का यह महान कवि नागार्जुन के नाम से जाना गया। ‘यात्री’ आपका उपनाम था। बाबा नागार्जुन हिंदी, मैथिली, संस्कृत तथा बांग्ला में कविताएं लिखते […] विस्तृत....

November 6th, 2016

 

राजनीति में कुछ अच्छे काम कर सका क्योंकि मेरे भीतर लेखक जीवित रहा…

शांता कुमार की राजनीति साहित्य के मर्म से परिचित दिखती है और साहित्य, राजनीति की दुरुह पगडंडियों से। उनकी चर्चित किताब ‘हिमालय पर लाल छाया’ के परिवर्धित संस्करण का हाल में विमोचन हुआ है। इस अवसर पर हमने उनकी सक्रियता के दोनों ध्रुवों से जुडे़ […] विस्तृत....

November 6th, 2016

 

राजनीति की ‘लाल छाया’ में शब्दों की हरियाली

चीन के साथ युद्ध में कांगड़ा जनपद के सर्वाधिक सैनिक शहीद हुए। कांगड़ा का शायद ही कोई ऐसा गांव अथवा परिवार होगा, जहां के वीर सैनिकों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति न दी हो। उन दिनों सेना की ओर से […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 

अंग्रेजी और चोगा, दोनों हटें

हाल-फिलहाल दो खबरें पढ़कर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। एक तो भोपाल में पढ़ी और दूसरी दिल्ली में। दिल्ली की खबर यह है कि  ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ ने मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को अंग्रेजी के बारे में कई साहसिक सुझाव दिए। इस न्यास के […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 

आचार्य नरेंद्र देव

आचार्य नरेंद्र देव भारत के प्रसिद्ध विद्वान, समाजवादी, विचारक, शिक्षा शास्त्री और देशभक्त थे। नरेंद्र देव गर्म विचारों के व्यक्ति थे। वे सन् 1916 से 1948 तक ‘आल इंडिया कांग्रेस कमेटी’ के सदस्य रहे थे। देश की आजादी के लिए उन्होंने कई बार जेल यात्राएं […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 

आस्था के दीप जलाओ

आज दीप जलाओ कल किसने देखा आज लुत्फ  उठाओ आस्था विश्वास के दीप तुम जलाओ मन के कोने में अंधेरा है जितना आलोक से बुहारो छोटी सी जिंदगी यूं ही न गंवाओ प्यार के दीप मन मंदिर में आज तुम जलाओ। दीप पर्व दीप पर्व […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 

ड्यूठलियों की जगह चीनी लडि़यां

गांव में बच्चे मक्की के डंठलों के समूह को इकट्ठा करके हाथ में उन्हें पकड़ कर और जलाकर खेतों में इधर-उधर दौड़कर कहते -ध्यो दयालिए…. ध्यो दयाली… खिन्नुएं दी जंघ जाली।  उस समय इन संवादों का अर्थ क्या अर्थ होता है…यह नहीं पता था। बाद […] विस्तृत....

October 23rd, 2016

 

संचार का सृजन करती पुस्तक

संचार को सनातन संचार बनाने के सरोकारों, सूचना-संवाद से प्रकट होती बौद्धिकता तथा उस पर वक्त के प्रभाव से जूझती एक किताब ‘सम्पूर्ण संचारविद्- आचार्य अभिनवगुप्त’ अपने साथ कई मौलिक प्रश्न लेकर आई है। अतीत के दर्शन और पुस्तक की परिक्रमा में लेखक संचार के […] विस्तृत....

October 23rd, 2016

 

दो लघुकथाएं

पुण्य प्रत्येक दीपावली पर शहर के प्रतिष्ठित नेताजी शहर के वृद्धाश्रम में जाकर दीन-दुखियों में वस्त्र बांटते। इस बार बड़े व्यथित थे कि उनके हाथों कुछ पुण्य नहीं हो पाएगा। वजह बहुत स्पष्ट थी। उनके लिए वसूली करने वाले शहर के मशहूर गुंडे कल्लू दादा […] विस्तृत....

October 23rd, 2016

 
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क्या कोटखाई रेप एवं मर्डर केस में पुलिस ने असली अपराधियों को पकड़ा है?

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