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विचार


औपचारिक पर्यावरण दिवस

(शगुन हंस, योल)

हर साल 5 जून को हम विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाते हैं यानी यह सिर्फ औपचारिकता भर ही होता है। इस दिन एक जनसभा कर ली, एक पौधा लगा दिया या ज्यादा से ज्यादा रैली निकाल दी और पूरे साल भर के लिए पर्यावरण से छुट्टी। ऐसे एक दिन के अभियान से पर्यावरण बचने वाला नहीं है। इसके लिए सब को संकल्प लेना होगा। क्या हम उत्तराखंड की आपदा भूल गए हैं। यह भी प्रकृति से छेड़छाड़ की पराकाष्ठा थी। प्रकृति ने हमारे लिए ही सब बनाया है। पर हम अपनी सुविधाओं के लिए उससे छेड़छाड़ करते हैं। प्रकृति में सब कुछ हमारे अनुकूल है, पर जब हम खुद प्रकृति से छेड़छाड़ कर सब कुछ अपने अनुकूल बनाने की कोशिश करते हैं, तभी ऐसी आपदाएं आती हैं। यानी फिर प्रकृति बदला लेने पर उतारू हो जाती है। बादल फटना, बाढ़ आना ये भी प्रकृति के संकेत हैं कि मनुष्य उससे छेड़छाड़ कर रहा है। जंगलों को काट कर कंकरीट के  जंगल उगाए जा रहे हैं जो हमें रहने के लिए तो आसरा देंगे पर बिना पर्यावरण के हम रहेंगे कब तक, यह तो कोई सोच ही नहीं रहा। प्रकृति का सहयोग करोेगे, तो बेशुमार मिलेगा और यदि प्रकृति से छेड़छाड़ करोगे तो सिवाय मुसीबत के कुछ भी नहीं मिलेगा।

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June 5th, 2017

 
 

समझदार को इशारा

(अक्षित आदित्य तिलक राज गुप्ता,सदौर (हरियाणा)) जम्मू-कश्मीर सरकार प्रदेश में अलगाववाद और आतंकवाद पर नकेल कसने में पूरी तरह से नाकाम रही। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अंततः भाजपा के लिए एक इशारा कर दिया है। अगर भाजपा समझदार होगी, तो देश हित में उसे जरूर […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

भारत में दूध क्रांति

(भूपेन्द्र ठाकुर, गुम्मा मंडी) भारत का पूरे विश्व में दूध उत्पादन में पहला स्थान है। हमारे यहां पर गांव से लेकर शहरी क्षेत्रों में भी पशु धन में लोग व्यस्त हैं। यह एक रोजगार का बढि़या तरीका है। खासकर महिलाएं इस तरह के धंधे में […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

अमरीका के बिन जलवायु मुहिम

आज विश्व पर्यावरण दिवस है। पर्यावरण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की भी याद आती है। बेशक जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती और मानवीय परिस्थिति से जुड़ा भीषण खतरा है। यदि हमारी धरती यूं ही तपती-जलती रही, तो मानव और जीव की प्रकृति पर […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

शब्द वृत्ति

पर्यावरण का पंच सांस चल रही है मुश्किल से, वायु प्रदूषित भारी, प्रकृति सिसकती है कोने में, बड़ी हुई लाचारी। बेटों ने ही काटा, पीटा, संक्रामक बीमारी, पसर रहा विज्ञान, विष भरा दूध, आम, तरकारी। जीत गए कचरे के पर्वत, साफ-सफाई हारी। दम घुटता है […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

अंग्रेजी की पढ़ाई : बच्चों की तबाही

जाब के सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा बच्चे अंग्रेजी में फेल होते हैं। हर विषय में 60-65 प्रतिशत नंबर लानेवाले बच्चे अंग्रेजी में 15-20 नंबर भी नहीं ला पाते। अंग्रेजी का रट्टा लगाने में अन्य विषयों की पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पाती। अंग्रेजी […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा एक आदिवासी नेता और लोकनायक थे। वह 19वीं सदी में बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक मुख्य कड़ी साबित हुए। ये मुंडा जाति से संबंधित थे। बिरसा मुंडा का जन्म 1875 ई. में झारखंड राज्य के रांची में हुआ था। उन्होंने […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

गुम्मा बनाम कटासनी

शिमला के गुम्मा में क्रिकेट की हरियाली पर खड़े सांसद अनुराग ठाकुर, फिर खेल को चरितार्थ करते हैं। करीब साढ़े पांच हजार फुट की ऊंचाई पर, क्रिकेट के सपनों की जमीन पैदा करना केवल जुनून का ही पुरस्कार है। जाहिर है अब जबकि गुम्मा में […] विस्तृत....

June 5th, 2017

 

पर्यटन सीजन में हिमाचल जाम

सैलानी हिमाचल की खूबसूरत छटाओं के दीदार के लिए बड़े उत्साह से यहां पहुचते हैं, लेकिन जब उनका सामना ट्रैफिक जाम से होता है, तो सारा उत्साह काफूर हो जाता है… पहाड़ी राज्य हिमाचल की सड़कें वाहनों के बोझ से इन दिनों पूरी तरह से […] विस्तृत....

June 4th, 2017

 

सत्याग्रह से गोवध तक की यात्रा

सत्याग्रह से गोवध तक की यात्राडा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कभी तमिलनाडु के पशु उत्सव जलीकट्टू पर इसलिए प्रतिबंध लगा दिया गया था कि इस उत्सव में बैलों को दौड़ाया जाता है । इसको पशुओं के प्रति क्रूरता कहा गया था, लेकिन गाय के एक बछड़े को […] विस्तृत....

June 3rd, 2017

 
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