प्राइवेट स्कूलों के लिए बसें चलाए एचआरटीसी

कांगड़ा जिला के तहत नूरपुर में हुए निजी स्कूली बस के सड़क हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया है। इसके चलते निजी स्कूलों में लगी प्राइवेट गाडि़यों और बिना परमिट की बसों को बंद तो कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा…

अब यह मोदी की भाजपा है!

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में अब सर्वेसर्वा बन गए हैं। उन्होंने अपने नजदीकी साथी अमित शाह को पार्टी के अध्यक्ष पद पर प्रतिस्थापित कर दिया है। लेकिन चार साल के शासन के बाद भी यह पता…

हिमाचली कदमों की आहट

हेमांशु मिश्रा लेखक, महाधिवक्ता हैं प्रदेश में नई सरकार की स्थापना के बाद कुछ नए आमूल-चूल परिवर्तन प्रशासन और व्यवस्था में देखने को मिले हैं। अंत्योदय की भावना से काम करती हुई सरकार की प्रतिबद्धता ने अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति को…

जरूरत है कठोर कानून की

अजय भंडारी, चंबीधार, राजगढ़ आठ साल की मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद निर्दयतापूर्ण तरीके से हत्या कर के इनसान इनसानियत की सभी हदें पार कर गया है। आए दिन अखबार की सुर्खियों में सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद बेरहमी से हत्या…

कैग हमें बचा लो…

कैग की रिपोर्ट में लगभग हर विभाग की लापरवाही सामने आई है। विभिन्न महकमों को करोड़ों का नुकसान रिपोर्ट में दर्शाया गया है। बड़ी बात यह है कि अगर सरकारी खजाने को नुकसान न हो तो प्रदेश तरक्की के लंबे डग भर सकता है। हर साल ऐसे ही चपत लगती रही…

देश स्वच्छ क्यों नहीं!

शगुन हंस, योल अभियान तो बहुत चलते हैं स्वच्छता के लिए, पर शायद ये सब दिखावे के ही होते हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री स्वच्छता पर मन की बात करते हैं और दिल्ली कितना दूषित है उन्हें शायद खबर नहीं है। जरा रेलवे लाइन के पास झुग्गी-झोंपडि़यों और…

युवा पीढ़ी के नए फलक

हिमाचली युवा के भविष्य की लकीर सींचने का यथार्थ कहीं गुमराह तो नहीं हो रहा है या सरकारों की माथापच्ची का तरीका पुराना पड़ गया है। युवा अपनी आशाओं को समेटे, शिक्षा के कालखंड में जो सपने देखता है या ज्ञान की ऊर्जा में प्रवाहित होने का मकसद…

मोदी पर निहाल होंगे दलित ?

अंततः प्रधानमंत्री मोदी ने बेटियों और दलितों पर अपनी चुप्पी तोड़ी, तो भ्रांतियां दरकने लगीं, धारणाएं बदलने लगीं। इतिहास के पन्ने खंगाले गए, जो स्पष्ट करते हैं कि कांग्रेस और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, बाबा अंबेडकर के कितना…

सरोज परमार का कलम से अटूट नाता

सरोज परमार किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। सरोज परमार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का विश्लेषण करना ठीक वैसे ही है, जैसे कोई आहिस्ता से नदी की लहरों का स्पर्श करते हुए गहरे समुद से रू-ब-रू हो पाए। सरोज परमार का व्यक्तित्व बहुआयामी है। इन्होंने…

लाशों के बीच शब्द ढूंढते मीडिया का अपना सच

नूरपुर के मलकवाल में गत सोमवार को बस हादसे में मारे गए 27 लोगों में शामिल चार से 15 साल की आयु के 23 बच्चों के आकस्मिक निधन ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। यह ऐसा दुःखद समाचार था, जिसके मिलते ही हर आदमी सुन्न होकर रह गया। शायद ही कोई…

अयोध्या सिंह उपाध्याय

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (जन्म-15 अप्रैल, 1865, मृत्यु-16 मार्च, 1947) का नाम खड़ी बोली को काव्य भाषा के पद पर प्रतिष्ठित करने वाले कवियों में बहुत आदर से लिया जाता है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में 1890 ई. के आस-पास अयोध्या सिंह…

कविता

गुलाम तुम गुलाम हो बंदिशें भी हैं पर बेडि़यां नहीं काम का खिलौना है हर कोई गलती करना अधिकार नहीं तुम्हारा स्वतंत्रता मुझे नहीं मालूम!!! देश तो आजाद है पर फैसला कानून भी नहीं लेता तो मेरी क्या मजाल! मैं और तुम तो गुलाम हैं…

बंगाल में पंचायत चुनाव ममता स्टाइल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद आम जनता के इसी दबाव के चलते प्रदेश के चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख बढ़ा दी। उसके बाद सरकार का दबाव बढ़ा होगा तो अगले दिन आयोग ने वह अधिसूचना वापस भी ले ली।…

बेटियों के लिए ‘व्रत’ कब ?

संसद में गतिरोध पर प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और करीब 2000 सांसदों-विधायकों का एकदिनी सामूहिक उपवास तर्कसंगत और सरोकारी था। करीब 250 घंटे संसद में हंगामे और नारेबाजी ने बर्बाद कर दिए। देश के करदाताओं के करीब 372 करोड़ रुपए…

हिमाचली छलांग का दिवस

स्थापना से संदर्भों तक बिछी हिमाचल की प्रगति तस्वीर ने देश के दर्पण को अचंभित किया, तो दूसरी ओर अधिकारों की जंग में मसलों की फेहरिस्त का घायल दर्द विद्यमान है। हिमाचल दिवस अपने हिस्से की राजनीति चुनता है, तो इस बार केंद्रीय रिश्तों की बात…