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हिंदी का नया ‘कबूतर’: सोशल मीडिया

हिंदी दिवस पर हाल में देशभर में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी कई तरह के आयोजन हुए। इनमें हिंदी के विकास में बेहतरीन योगदान देने वाले वैयक्तिक व सामूहिक प्रयासों का खूब अलंकरण हुआ। साहित्य, मीडिया व सिनेमा ऐसे प्रमुख स्तंभ हैं जो भाषायी विकास…

करोड़ों के अस्पताल, स्वास्थ्य सुविधाएं नाम की

सरकार की ओर से करोड़ों की लागत से भवनों को तो यहां तैयार कर दिया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य सुिवधा के नाम पर आज भी लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के चलते और अस्पताल में बेहतर सुविधा होने के बाद भी मरीजों को…

बंदरों का आतंक…आधी से ज्यादा भूमि बंजर

हनुमान जी की सेना के रूप में आम जनमानस के लिए पूजनीय रहे बंदर ऐसे खुराफाती हुए कि किसानों को दाने-दाने के लाले पड़ गए हैं। कल तक गुड़-चना डालकर अपने अराध्य देव को खुश करने में लगे किसान आज बंदरों के आतंक से इस कद्र परेशान हैं कि घाटे का…

रामधारी सिंह दिनकर

हिंदी के कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर,1908 को सिमरिया, मुंगेर (बिहार) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा उनकी पत्नी मनरूप देवी के पुत्र के रूप में हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर एक ओजस्वी व राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में जाने…

उफ ! ये जाम… ले लेगा हमारी जान

हमीरपुर - शहर में जाम की समस्या आम हो गई है। लोगों को इसके चलते खासा परेशान होना पड़ रहा है।  जाम का मुख्य कारण निजी बसें हैं, जो कि एक-दूसरे का टाइम खाने के चक्कर में बाजार में धीमी रफ्तार में चलती रहती हैं। ऐसे बस आपेरटरों पर आज तक कोई भी…

किराया भी दें, पर सेफ्टी-ठिकाने की कोई गारंटी नहीं

ऊना शहर में रेहड़ी वाले अभी भी स्थायी ठिकाने के इंतजार में है। दशकों बाद भी ऊना शहर के इन करीब 400 दुकानदारों को स्थायी ठिकाना नहीं मिल पाया है। इन दुकानदारों को अतिक्रमण का डंडा भी सहना पड़ता है। कई बार इनकी रेहडि़यां तो कभी इनका सामान…

चुटकुलों को गंभीर बनाने की त्रासदी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं सोनिया कांग्रेस के लोगों  के अनुसार राहुल गांधी ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अपनी बौद्धिक क्षमता का जो प्रकटीकरण किया है, उससे बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली…

कालेज बंदला में, तो कक्षाएं नगरोटा में क्यों

हिमाचल फोरम बिलासपुर की बंदलाधार पर बनने वाले देश के दूसरे हाइड्रो इंजीनियरिंग कालेज निर्माण में विलंब को लेकर यहां की जनता में रोष व्याप्त हो गया है। लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद बिलासपुर के बजाय कक्षाएं…

भरमौर में बड़ा अस्पताल बनता तो बनती बात

‘‘उम्मीदों की नींव पर ही सही, इक पुल चाहिए। गांव-शहर से जुड़ें, डग भरने का हमें भी हक चाहिए।’’ मगर विडंबना यही रही कि लगातार उम्मीदों के कई पुल ढह गए और कई सोचे भी न जा सके। भौगोलिक परिस्थितियां सियासत के दृष्टिकोण पर इतनी भारी पड़ेंगी यही…

हिमाचली फासले

टूटे पंख की पीड़ा सहलाने से दूर नहीं होती और न ही फुसलाने से कम होते हैं फासले। हिमाचल के फासले कितने सामाजिक-कितने राजनीतिक, इस पर चिंतन की आवश्यकता है। सोशल मीडिया में किसी ने उछाल दिया कि प्रदेश के किस हिस्से की धाम अव्वल है और…

बुलेट के रणनीतिक आयाम

बुलेट ट्रेन सिर्फ एक रेलगाड़ी ही नहीं है, जो 320-350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। बुलेट ट्रेन की परियोजना भारत के लिए एक रणनीतिक और संतुलनकारी आयाम भी साबित होगी। बेशक इसके साथ ही हम चीन को मात नहीं दे सकेंगे, जिसकी बुलेट टे्रन…

कुदरत से खिलवाड़

(किशोरी लाल कौंडल, कलीन, सोलन ) जल, जंगल और जमीन के अस्तित्व के आधार पर ही सारा ब्रह्मांड स्थिर है। ये तीनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि जल, जंगल और जमीन में से किसी एक में भी अस्थिरता आ जाती है, तो भू-मंडल पर असामान्य घटनाएं घटनी शुरू हो…

कुदरत से खिलवाड़

(किशोरी लाल कौंडल, कलीन, सोलन ) जल, जंगल और जमीन के अस्तित्व के आधार पर ही सारा ब्रह्मांड स्थिर है। ये तीनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि जल, जंगल और जमीन में से किसी एक में भी अस्थिरता आ जाती है, तो भू-मंडल पर असामान्य घटनाएं घटनी शुरू हो…

सरकारी कर्मचारियों के ही अच्छे दिन क्यों

(मनीषा चंदराणा (ई-मेल के मार्फत) ) सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता चार से बढ़ाकर पांच फीसद कर दिया है। दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश होगा, जहां सरकार कर्मचारियों पर उनके काम का परीक्षण किए बिना बड़ी मात्रा में खर्च करती है। आखिर अच्छे…

स्वच्छता से पहले सुरक्षा की जरूरत

डा. सीमा परिहार लेखिका, राष्ट्रीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग, शिमला से संबद्ध हैं हर साल हम रावण को जलाते हैं, लेकिन आज हर कोने में दुबके उस रावण का क्या करें, जो हर वक्त नारी की अस्मिता से खेलने को आतुर बैठा है? हालांकि दुष्कर्म सरीखी…
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