प्रो. सुरेश शर्मा ,लेखक नगरोटा बगवां से हैं

कर्मचारी किसी भी सरकार व संगठन के लिए एक संपत्ति होता है। वह किसी भी दृष्टिकोण से व्यवस्था पर बोझ नहीं होता। सेवाकाल में वह अपने संगठन के लिए मेहनत, परिश्रम, समर्पण, निष्ठा, कर्मठता, कटिबद्धता तथा खून-पसीना बहाकर काम करता है। जिस तरह वह पूरी जवानी सरकार और संगठन के लिए लगाकर त्याग करता है,

प्रो. सुरेश शर्मा लेखक नगरोटा बगवां से हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देविका को देवभूमि हिमाचल की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए संदेश भेजा है : ‘केरल की बेटी देविका ने अपनी सुरीली आवाज में प्रसिद्ध हिमाचली गीत ‘चंबा कितनी की दूर’ गाकर हिमाचल की शान बढ़ाई है,

प्रो. सुरेश शर्मा लेखक नगरोटा बगवां से हैं इस मामले में तो जान के खतरे के डर से कंगना को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा वाई श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है जिसमें दो कमांडो सहित ग्यारह सीआरपीएफ  के जवान चौबीसों घंटे उन्हें  सुरक्षा देंगे क्योंकि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां

प्रो. सुरेश शर्मा लेखक नगरोटा बगवां से हैं बहुत से अध्यापक पुरस्कार की चाहत रखते हैं, योग्यता भी रखते हैं, परंतु आवेदन प्रक्रिया की जटिलताओं से परेशान होकर दूर से ही पुरस्कार को नमस्कार कर देते हैं। सेना या पुलिस में सम्मान, पदक या अलंकरण के लिए आवेदन नहीं करना पड़ता। इसी प्रकार शिक्षक पुरस्कारों