भरत झुनझुनवाला

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं 2017 की पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ रेट 5.7 प्रतिशत थी, जो कि दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत हो गई है। हालांकि यह सुधार प्रभावी नहीं है। न्यून ग्रोथ रेट का पहला कारण काले धन पर सरकार का प्रहार है। जी हां, सरकार की स्वच्छता ही

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं डब्ल्यूटीओ के विस्तार की दूसरी संभावना ई-कॉमर्स की है, जैसे आज आप चीन की किसी कंपनी को ऑनलाइन ऑर्डर देकर माल मंगवा सकते हैं। इस व्यापार को सुनियोजित करने के लिए कोई वैश्विक कानून नहीं है। हाल में हुई डब्ल्यूटीओ की मंत्रिस्तरीय वार्ता में इन विषयों

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं आतंकवाद एवं नंबर दो के धंधे पर अल्प समय के लिए अंकुश लगा है। बड़ी रकम का लेन-देन डिजिटल माध्यम से बढ़ा है। यह नोटबंदी का दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव है। छोटे उद्यमियों पर डिजिटल प्रयास का दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मेरे आकलन में डिजिटल पेमेंट

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकार को चाहिए कि देशी गाय, विदेशी गाय एवं भैंस के दूध के गुण के इस अंतर को जनता तक पहुंचाए जिससे देशी गाय के दूध की बाजार में मांग बढ़े, लोग इस दूध का ऊंचा दाम अदा करें तथा किसान के लिए देशी गाय को

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं अपने देश में सरकारी शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएं सभी को उपलब्ध हैं। गरीब को इनका ही सहारा होता है, परंतु इन सेवाओं को उत्तरोत्तर निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। निजी सेवाओं की गुणवत्ता सामान्यतः उत्तम होती है। जैसे आम तौर पर ग्रामीण निजी

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं संविधान की धारा-33 में सेना के जवानों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया गया है। इस धारा का विस्तार करके सभी सरकारी कर्मियों को धारा-33 के अंदर ले आना चाहिए और इनके मौलिक अधिकारों को निरस्त कर देना चाहिए। यदि ये सरकारी जॉब सिक्योरिटी चाहते

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं केंद्र सरकार के एक पूर्व सचिव ने बताया कि उन्हें विश्व बैंक ने 1,000 डालर यानी 65,000 रुपए प्रतिदिन की सलाहकारी का ठेका दिया है। विश्व बैंक पर अमरीका का वर्चस्व है, इसलिए विश्व बैंक की ठेकेदारी करने वाले अमरीका का विरोध नहीं कर सकते हैं।

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के लिए सरकारी नियमों का उल्लंघन करने में ये इकाइयां मददगार हैं। सार्वजनिक बैंकों को आज लग रहे भारी घाटे में मंत्रियों एवं अधिकारियों का यह दुराचरण मुख्य कारण है। जाहिर है कि घाटे में चल रहे बैंकों का लाभ में चल

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं यदि सरकार दूसरे विचारों को सुनती, तो शायद यह गलती न करती। तब लोगों का रुपए के नोट पर भरोसा नहीं टूटता। लोग सोना नहीं खरीदते। अर्थव्यवस्था की गाड़ी के टायर की हवा नहीं निकलती और अर्थव्यवस्था चलती रहती। अर्थव्यवस्था के संचालन में सदैव विभिन्न मत